न्यूज़ डेस्क
इस बार झामुमो ओडिशा में भी लोकसभा चुनाव लड़ने जा रही है। झारखंड से सटे ओडिशा के कई इलाकों में दिशोम गुरु शिबू सोरेन का काफी प्रभाव माना जाता है। यही वजह है कि ओडिशा से झामुमो के विधायक भी जीतते रहे हैं। इस बार झामुमो ओडिशा की मयूरभंज सीट से अंजनी सोरेन को उतार रही है।
अंजनी सोरेन शिबू सोरेन की बेटी और हेमंत सोरेन की बड़ी बहन है। मयूरभंज लोकसभा सीट पर अंजनी के नाम के एलान के बाद मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। दरअसल इस सीट पर भाजपा ने नाबा चरण माझी को उतारा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को यहां से जीत मिली थी।
इस बार भाजपा ने मयूरभंज से अपना उम्मीदवार बदला है और बिशेश्वर टुडू की जगह नाबा चरण माझी को मैदान में उतारा है। वहीं बीजद के टिकट पर सुदाम मरांडी चुनाव मैदान में हैं। सुदाम मरंडी एक समय ओडिशा में झारखंड मुक्ति मोर्चा के शीर्ष नेता थे लेकिन बाद में वे बीजद में शामिल हो गए। सुदाम मरंडी जनाधार वाले नेता हैं और अब बीजद का साथ मिलने से उनका दावा मजबूत है। अब अंजनी सोरेन के नाम के एलान से यहां मुकाबला कड़ा हो गया है।
मयूरभंज की सीमा झारखंड के सिंहभूम जिले से मिलती है। अंजनी सोरेन ने 2019 में भी इस सीट से चुनाव लड़ा था और तीसरे नंबर पर रहीं थी। अब एक बार फिर उनके चुनाव में उतरने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
मयूरभंज लोकसभा सीट आदिवासी बहुल है और यहां की सात विधानसभा सीटों में से छह अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। जेएमएम के साथ गठबंधन के चलते कांग्रेस ने यहां अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है।

