दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक 2023 आज लोकसभा में किया जाएगा पेश ,सदन में हंगामे के आसार

0
133

बीरेंद्र कुमार झा

दिल्ली सेवा विधेयक आज (मंगलवार ) को लोकसभा में पेश किया जाएगा। गृह मंत्री अमित शाह इसे लोकसभा में पेश करेंगे। इसको लेकर इसे सूचीबद्ध कर लिया गया है।इधर विधेयक पर संसद में सरकार को कड़ी चुनौती देने के लिए विपक्ष ने भी अपनी तैयारी पूरी कर ली है।

विपक्षी गठबंधन इंडिया के घटक दलों ने जारी किया व्हिप

दिल्ली अध्यादेश को लेकर विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया के घटक दलों ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर दिया है। यही नहीं अस्वस्थ नेताओं के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था करने की भी तैयारी कर ली गई है। कांग्रेस समेत इस गठबंधन के सभी घटक दलों का मतदान के दौरान उनके सदस्यों की मौजूदगी शत प्रतिशत रहे।

राज्यसभा में इस विधेयक के पेश किए जाने के दौरान सदन में पहुंच सकते हैं मनमोहन सिंह

विपक्ष से जुड़े सूत्रों का कहना है कि राज्यसभा में इस विधेयक के पेश किए जाने के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के व्हीलचेयर पर सदन में आने की संभावना है, जबकि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन भी संसद की कार्यवाही में शामिल हो सकते हैं।मनमोहन सिंह और शिबू लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे हैं l।सूत्रों ने बताया कि जेडीयू सांसद 75 वर्षीय वशिष्ठ नारायण सिंह के भी एंबुलेंस से संसद पहुंचने की संभावना है।

क्या है मामला क्या है

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में अधिकारियों के तबादलों और नियुक्ति संबंधी मामलों में निर्णय की शक्तियां दिल्ली सरकार को प्रदत्त की थी।शीर्ष अदालत के इसी आदेश को निरस्त कराने के लिए दिल्ली में सेवाओं पर नियंत्रण को लेकर केंद्र द्वारा जारी अध्यादेश की जगह लेने के लिए यह विधेयक लाया जा रहे हैं।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी बनाने के लिए समय-समय पर जारी किए अध्यादेश

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी बनाने के लिए समय-समय पर अध्यादेश जारी किए हैं और दिल्ली सरकार से सेवाओं पर नियंत्रण वापस लेने से संबंधित अध्यादेश इस कड़ी में नवीनतम है।केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली एनसीटी सरकार (संशोधन) अध्यादेश जारी किया था।केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उस विधेयक को मंगलवार को मंजूरी दे दी जो दिल्ली में समूह ए के अधिकारियों के स्थानांतरण और पोस्टिंग के लिए प्राधिकरण के गठन के लिए घोषित अध्यादेश की जगह लेगा। जब संसद का सत्र नहीं चल रहा हो तो महत्वपूर्ण मुद्दों पर घोषणाओं को निष्प्रभावी बनाने के लिए सरकार को अध्यादेश जारी करने का अधिकार है। आजादी के बाद से विभिन्न सरकारों ने इस अधिकार का प्रयोग किया है।19 मई को दिल्ली में अधिकारियों के लिए एक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सरकार (संशोधन )अध्यादेश जारी किया था उससे 1 सप्ताह पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को छोड़कर सेवाओं का नियंत्रण निर्वचित सरकार को देने का निर्देश दिया था।

केंद्र सरकार ने इससे पहले जारी किया था दो अध्यादेश

इस अध्यादेश से पहले केंद्र सरकार ने दो अध्यादेश जारी किए थे जो प्रवर्तन निदेशालय ईडी और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो सीबीआई के निदेशकों के कार्यकाल को 5 साल तक बढ़ाने के प्रावधान से संबंधित था। यह अध्यादेश 2001 में सर्वोच्च अदालत के उस फैसले के बाद जारी किया गया था जिसमें सेवानिवृत्ति की आयु प्राप्त कर चुके अधिकारियों के कार्यकाल का विस्तार केवल विशेष मामलों में ही किया जाने संबंधी निर्देश थे। इसी प्रकार एक अन्य मामले में केंद्र सरकार ने न्यायाधिकरण अध्यादेश जारी किया जिसमें न्यायाधिकरण के सदस्यों के सेवानिवृत्त और सेवा शर्तों को निर्धारित किया गया था।अध्यादेश में अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित 5 साल से कम कर 4 साल कर दिया गया।

2018 में भी केंद्र सरकार ने जारी किया था अध्यादेश

अनुसूचित जाति /अनुसूचित जनजाति कानून के तहत की गई गिरफ्तारी के खिलाफ सुरक्षा उपायों पर सर्वोच्च अदालत के आदेश को निष्प्रभावी करने के लिए वर्ष 2018 में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा एक अध्यादेश जारी किया गया था। प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से लेकर मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार सर्वोच्च अदालत के फैसले को दरकिनार करने के लिए अध्यादेश जारी करती रही है।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here