भारत ने साल 2019-2026 के बीच 36 देशों से 274 भगोड़ों को वापस लाया है इसकी जानकारी मंगलवार ( 4 अगस्त 2026) को गृह मंत्रालय की ओर से दी गई। गौरतलब है कि इन भगोड़ों में आतंकवादी, गैंगस्टर, फाइनेंशियल और ड्रग ट्रैफिकर्स के अपराधी, हत्या, दुष्कर्म और POCSO के तहत भागे हुए लोग शामिल हैं।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि साल 2019-2026 के बीच प्रेवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के कड़े प्रवर्तन के बीच भगोड़े अपराधियों से जुड़े 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत से भागे इकोनॉमिक ऑफेंडर्स से संबंधित मामलों में 18,762 करोड़ रुपये की राशि वापस की जा चुकी है। इसमें यह भी बताया गया है कि साल 2022 में कुल 40 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए, 2023 में 100, 2024 में 107, 2025 में 112 और 2026 में अब तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जा चुके हैं।इनमें पिछले 3 सालों में 501 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए हैं।गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2009 से भारत में वापस लाए गए 274 भगोड़ों में से इस साल जुलाई 2026 तक कुल 45 भगोड़ों को वापस लाया गया, जबकि 2025 में 70 , 2024 में 43, 2023 में 37, 2022 में 40, 2021 में 23, 2020 में सात और 2019 में 9 भगोड़ों को वापस लाया गया था।
गौरतलब है कि ये सभी भगोड़े अपराधी धोखाधड़ी, फाइनेंशियल फ्रॉड, टेरर एक्टिविटी, एंटी इंडिया एक्टिविटी, नार्को टेरर, वित्तीय अपराध, आतंकवादी गतिविधि, राष्ट्रविरोधी गतिविधि, नार्को टेरर, संगठित अपराध, गैंगस्टरों, जबरन वसूली, हत्या, डकैती, हिंसक अपराध, यौन अपराध, दुष्कर्म, POCS0, ड्रग ट्रैफिकिंग, NDPS,अवैध व्यापार, फेक करेंसी, साइबर क्राइम, मानव तस्करी और अपहरण समेत अन्य अपराधों में शामिल थे।इन 274 भगोड़ों में से 62 हत्या, डकैती और हिंसक अपराध से जुड़े मामलों में जुड़े थे बाकी 53 यौन अपराधों, दुष्कर्म और POCS0 समेत ; 45 अन्य आपराधिक गतिविधियों मे शामिल थे। वहीं, 42 संगठित अपराध, गैंगस्टरों और जबरन वसूली और 18 मानव तस्करी और अपहरण के अपराधों में शामिल थे। बाकी 15 टेरर एक्टिविटी, नार्को टेरर, 16 ड्रग्स, 12 फेक करेंसी, साइबर क्राइम और तस्करी से जुड़े मामलों में शामिल थे। इसके साथ ही 9 भगोड़े अपराधी धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों के लिए वांछित थे।
गृह मंत्रालय ने कहा कि भारत के प्रत्यर्पण प्रयासों को दोहरी सजा और दोहरी आपराधिकता के सिद्धांतों समेत कानूनी और न्यायिक बाधाओं का सामना करना पड़ा, जिसके चलते कई बार प्रत्यर्पण अनुरोध खारिज कर दिए गए। इसके साथ ही गृह मंत्रालय और कई विभागों के बीच ठीक से को-ऑर्डिनेशन न होने के चलते भी इस प्रक्रिया में बाधा आई।वहीं भगोड़ों के बारे में जानकारी शेयर करने, उनकी स्थिति का पता लगाना और रेड कॉर्नर नोटिस जारी करना भी स्लो स्पीड से चल रहा था।गृह मंत्रालय ने बताया कि पिछली सरकारों में भगोड़ों को वापस लाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव था।मोदी सरकार ने भगोड़ों के प्रत्यर्पण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बना दिया है।

