बीरेंद्र कुमार झा
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपना रुख बदल लिया है। उन्होंने सीपीएम पर हमला बोलते वक्त कांग्रेस के खिलाफ रहस्यमय चुप्पी साध ली है। बंगाल बीजेपी के खिलाफ तैयार विपक्षी दलों की गठबंधन (INDIA) में शामिल होने और कांग्रेस आलाकमान के साथ उनके नए संबंधों के कारण उन्होंने यह बदलाव किया है। हालांकि इससे पहले उन्होंने कई मौकों पर पश्चिम बंगाल कांग्रेस पर जोरदार हमला किया है।यहां तक कि कांग्रेस के एकमात्र विधायक को भी अपने पाले में कर लिया था।
बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष का टीएमसी पर हमला
ममता के विपरीत पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने तृणमूल पर अपना हमला जारी रखा है। बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने शनिवार को कहा कि तृणमूल कांग्रेस के नेता भ्रष्ट हैं। बीडीओ और राज्य प्रशासन तृणमूल कांग्रेस के निर्देश पर काम करते हैं ।
उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी की भारत जरूर यात्रा ने पूरे देश को एकजुट किया है। राहुल गांधी का नेतृत्व समग्र रूप से भारत में बदलाव का स्पष्ट संकेत है टीएमसी को एहसास हुआ कि अगर वे राहुल गांधी की राजनीति से नहीं जुड़ेंगे तो पार्टी टूट जाएगी।
टीएमसी ने भी किया पलटवार
टीएमसी नेता शांतनु सेन ने पलटवार करते हुए कहा कि गठबंधन को ध्यान में रखते हुए टीएमसी बदले में कांग्रेस पर हमला करने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि टीएमसी 180 से अधिक सीटों के साथ पश्चिम बंगाल में सत्ता में आई है। टीएमसी के विधायकों की संख्या यहां बढ़ ही रही है लेकिन 2011 में कांग्रेस यहां शून्य हो गई। गठबंधन को ध्यान में रखते हुए हम कांग्रेस पर हमला नहीं कर रहे हैं ,लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि हम कमजोर हैं। हम पश्चिम बंगाल में बीजेपी के खिलाफ लड़ने के लिए काफी शक्तिशाली हैं।हमें यहां किसी की मदद की जरूरत नहीं है।
टीएमसी की वार्षिक शहीद दिवस रैली के दिन ममता और उसके भतीजे अभिषेक बनर्जी ने कांग्रेसियों के बारे में बोलने से परहेज किया। उन्होंने सीपीआई (एम) और बीजेपी पर हमला किया। अपने भाषण में ममता ने कहा कि हमें सत्ता या पद की परवाह नहीं है, हम अपने देश की शांति की परवाह करते हैं।
बीजेपी का तंज
कांग्रेस और टीएमसी की स्थिति पर कटाक्ष करते हुए बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जो लोग टीएमसी सरकार के खिलाफ लड़ना चाहते हैं वे आगे आएं और बीजेपी के साथ इस लड़ाई में शामिल हो जाए या फिर एक ऐसा मंच बनाए जहां आप खड़े होकर अत्याचारी राज्य सरकार के खिलाफ लड़ सकें।यदि आप गठबंधन की बैठक में शामिल हुए नेताओं की तस्वीर देखकर राज्य सरकार के खिलाफ लड़ना चाहते हैं तो पश्चिम बंगाल के लोग आप पर विश्वास नहीं करेंगे।यह है दिल्ली में दोस्ती और बंगाल में कुश्ती।

