बार-बार प्यास लगना 1 नहीं, इन 5 बीमारियों का होता है संकेत

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गर्मी हो, पसीना ज्यादा बहा हो या खाने में नमक थोड़ा तेज हो, ऐसे में बार-बार पानी की तलब लगना काफी कॉमन है। लेकिन सवाल तब खड़ा होता है जब यह प्यास किसी वजह के बिना ही पीछा नहीं छोड़ती। पानी पीने के बाद भी गला सूखा रहे, रात में नींद बार-बार पानी पीने के लिए टूटे, तो इसे यूं ही टाल देना समझदारी नहीं।

गुरुग्राम स्थित सीके बिड़ला हॉस्पिटल के यूरोलॉजी के डायरेक्टर डॉक्टर शालाभ अग्रवाल का कहना है कि लगातार बनी रहने वाली काफी ज्यादा प्यास शरीर के अंदर कुछ गड़बड़ी की ओर इशारा कर सकती है, चाहे वह पानी-नमक का असंतुलन हो, हार्मोन का मामला हो या फिर किडनी और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी कोई दिक्कत। डॉक्टर से समझते हैं किन स्थितियों में बार-बार प्यास लगती है?

बार-बार प्यास लगने के पीछे डायबिटीज की परेशानी हो सकती है।दरअसल, जब खून में शुगर की मात्रा जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है, तो किडनी उसे पेशाब के रास्ते बाहर निकालने में जुट जाती है और इस प्रोसेस में शरीर से पानी भी साथ निकलता रहता है।ऐसे में पेशाब बार-बार आने लगता है और प्यास भी उतनी ही तेजी से लगती रहती है।अगर इसके साथ थकान महसूस हो, नजर धुंधली पड़े या वजन अचानक घटने लगे, तो ब्लड शुगर टेस्ट कराना टालना नहीं चाहिए।

न्यूरोलॉजिस्ट का कहना है कि यह डायबिटीज मेलिटस से बिल्कुल अलग बीमारी है। यहां दिक्कत शुगर की नहीं, बल्कि शरीर की पानी को कंट्रोल करने की क्षमता की होती है।एंटीडाययूरेटिक हार्मोन (ADH) ठीक से काम न करे, तो व्यक्ति को बहुत पतला और काफी मात्रा में पेशाब आने लगता है और उसकी भरपाई के लिए प्यास भी असामान्य रूप से बढ़ जाती है। रात-रात भर पेशाब के लिए उठना भी इसी का एक लक्षण हो सकता है।

काफी ज्यादा प्यास लगना किडनी से जुड़ी परेशानी हो सकती है। दरअसल, हमारी किडनी शरीर में पानी, नमक और बाकी इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने का काम करती है। जब यह काम ठीक से नहीं हो पाता, तो इसका असर प्यास और पेशाब दोनों पर दिख सकता है।हालांकि, सिर्फ प्यास के आधार पर ये मान लेना कि किडनी में कोई समस्या है, जल्दबाजी होगी।इसलिए इस स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

तेज बुखार, उल्टी-दस्त, बहुत ज्यादा पसीना या कसरत या फिर सीधे-सीधे कम पानी पीना, इन सबसे शरीर डिहाइड्रेट हो सकता है। यहां प्यास लगना शरीर का स्वाभाविक अलार्म है कि उसे तरल पदार्थ चाहिए।लेकिन अगर ये स्थिति बार-बार बनती रहे या लंबे समय तक खिंचे, तो सिर्फ पानी पी लेना काफी नहीं।ऐसे में डॉक्टरी जांच जरूरी हो जाती है।

बार-बार पेशाब लगने के पीछे कुछ दवाएं भी जिम्मेदार हो सकती हैं।दरअसल, कुछ दवाओं की वजह से शरीर में पानी की कमी होने लगती है, जिसकी वजह से बार-बार प्यास महसूस होता है। इसके अलावा मुंह का बार-बार सूखना, बहुत नमकीन खाना, बुखार या कुछ हार्मोनल गड़बड़ियां भी इसमें भूमिका निभा सकती हैं।

डॉक्टर का कहना है कि हमें ये समझना भी जरूरी है कि हर बार बार-बार प्यास लगने के पीछे कोई बीमारी नहीं होती।कभी-कभी मौसम, शारीरिक गतिविधि, खानपान और सामान्य तौर पर पानी कितना पिया गया, ये सब भी वजह हो सकते हैं। असली चिंता तब शुरू होती है जब प्यास लगातार बनी रहे, भरपूर पानी पीने के बाद भी संतुष्टि न मिले, पेशाब बहुत ज्यादा आए, या रात के समय भी यही सिलसिला चलता रहे।

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