5G को भूल जाइए! 115Gbps की तूफानी स्पीड वाला दुनिया का पहला 6G डिवाइस लॉन्च

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इंटरनेट की दुनिया में एक बड़ी तकनीकी क्रांति आने वाली है जो लोगों के डाउनलोड और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग के तरीके को पूरी तरह बदल सकती है। जापान के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा 6G प्रोटोटाइप डिवाइस तैयार किया है जिसने वायरलेस इंटरनेट इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसे दुनिया का पहला 6G डिवाइस माना जा रहा है। इस नई तकनीक की मदद से शोधकर्ताओं ने 112Gbps की जबरदस्त वायरलेस इंटरनेट स्पीड हासिल की जो मौजूदा 5G नेटवर्क से 20 गुना से भी ज्यादा तेज बताई जा रही है।

अब तक 6G नेटवर्क विकसित करने वाले वैज्ञानिक बेहद हाई फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल कर रहे थे लेकिन एक सीमा के बाद सामान्य इलेक्ट्रॉनिक सर्किट सही तरीके से काम करना बंद कर देते हैं।खासतौर पर जब सिग्नल की फ्रीक्वेंसी 350 GHz से ऊपर पहुंचती है तो डिजिटल नॉइज़ बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।इसकी वजह से डेटा अस्थिर हो जाता है और इंटरनेट कनेक्शन भरोसेमंद नहीं रह पाता।

टोकुशिमा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक ताकेशी यासुई की टीम ने इस बड़ी चुनौती का समाधान खोज लिया। शोधकर्ताओं ने पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक सीमाओं को हटाकर 560 GHz बैंड पर बिना किसी सिग्नल रुकावट के 112Gbps की रिकॉर्ड वायरलेस स्पीड हासिल कर ली। यह उपलब्धि 6G टेक्नोलॉजी के भविष्य के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

पुराने इलेक्ट्रॉनिक्स की जगह इस्तेमाल हुई लाइट टेक्नोलॉजी
इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा योगदान फोटोनिक्स यानी लाइट-बेस्ड टेक्नोलॉजी का रहा।वैज्ञानिकों ने सामान्य इलेक्ट्रॉनिक सर्किट की जगह प्रकाश आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया।इस एक्सपेरिमेंट में ऑप्टिकल माइक्रोकॉम्ब नाम का खास डिवाइस बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ।

ऑप्टिकल माइक्रोकॉम्ब को एक बेहद एडवांस लेजर सिस्टम की तरह समझा जा सकता है जो बहुत स्थिर और सटीक लाइट बीम तैयार करता है।चूंकि ये लाइट सिग्नल काफी स्थिर होते हैं, इसलिए इनमें डिजिटल नॉइज़ लगभग ना के बराबर पैदा होता है। यही वजह है कि वैज्ञानिक बेहद तेज टेराहर्ट्ज सिग्नल तैयार करने में सफल रहे जो बिना रुकावट डेटा ट्रांसफर कर सकते हैं।

आमतौर पर लेजर आधारित तकनीकों में हल्का सा कंपन भी सिस्टम को प्रभावित कर देता है क्योंकि इससे लेजर अलाइनमेंट बिगड़ सकता है।इस समस्या को दूर करने के लिए जापानी वैज्ञानिकों ने ऑप्टिकल फाइबर को सीधे सिलिकॉन नाइट्राइड माइक्रोरेजोनेटर चिप से स्थायी रूप से जोड़ दिया। इससे डिवाइस का आकार छोटा हो गया और अलाइनमेंट की समस्या भी खत्म हो गई।

इसके अलावा रिसर्च टीम ने इसमें खास टेंपरेचर कंट्रोल सिस्टम भी जोड़ी जिससे बदलते मौसम और तापमान का असर डिवाइस की परफॉर्मेंस पर नहीं पड़ेगा। माना जा रहा है कि यह तकनीक भविष्य में अल्ट्रा-फास्ट इंटरनेट और अगली पीढ़ी के वायरलेस नेटवर्क की दिशा बदल सकती है।

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