भ्रूण हत्या !जादूगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जादू का नया खेल

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संसद में 16 अप्रैल से लेकर तीन दिनों तक संसद का विशेष सत्र लाया गया था। इसका उद्देश्य था 2029 ई के लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33% सीटों का आरक्षण करना। इसके लिए 16 अप्रैल को संसद में सरकार के द्वारा नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम प्रस्तुत किया गया। इस अधिनियम पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर रोक सभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने उन्हें जादूगर कहते हुए धोखे से इस नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम में परिसीमन को लाने की बात कही । फिर नेता विपक्ष राहुल गांधी ने इस बार जादूगर नरेंद्र मोदी की जादूगरी पकड़ लेने की बात करते हुए उन पर आरोप लगाया कि परिसीमन वाला जादू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसलिए दिखा रहे थे ,ताकि लोग इसे समझ नहीं पाए और ये चुपके से इसी बहाने दक्षिण भारत के राज्यों की तुलना में उत्तर भारत के राज्यों जहां इनकी पकड़ ज्यादा है,वहां संसदीय सीटों की संख्या को तुलनात्मक रूप से ज्यादा बढ़ा लें, जिससे उन्हें 2029 ई के लोकसभा चुनाव के दौरान बड़ा फायदा हो जाए और ये इस जादू के सहारे 2029 ईस्वी में लोकसभा का चुनाव जीत कर फिर से प्रधानमंत्री की कुर्सी पर काबिज हो जाएं। इस पर रोक लगाने के उद्देश्य से लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने एससी-एसटी के साथ ओबीसी को शामिल करने की बात कही तो विपक्षी राजनीतिक दल समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसमें मुसलमान के शामिल होने का मुद्दा उठाया।

संसद के लोकसभा में पेश किया गया नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम संविधान संशोधन से जुड़ा हुआ अधिनियम था, लिहाजा इसे पास कराने के लिए सदन के दो तिहाई बहुमत से पास होना अनिवार्य था। इस लिहाज से लोकसभा की 543 सदस्यों में से इस बिल इस अधिनियम के पक्ष में 362 सांसदों का कम से कम समर्थन मिलना अनिवार्य था। बीजेपी समेत एनडीए के सभी घटक दलों को मिलाकर एनडीए गठबंधन के पास जीते हुए सांसदों की संख्या 293 है। इस लिहाज से इसके पास कम से कम 49 सांसद कम पड़ रहे थे। ऐसे में उनके पास दो विकल्प थे ।एक
विकल्प यह कि विपक्षी गठबंधन के कम से कम विपक्षी राजनीतिक दलों के 49 सांसदों को किसी भी तरह से इस पेश किए गए नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम के पक्ष में वोट करवा लें या दूसरा यह कि ये 103 से ज्यादा सांसदों को वोटिंग के दिन लोकसभा से अनुपस्थित रहने के लिए मना लें। इन दोनों ही उद्देश्यों में से किसी एक को या दोनों को पूरा कर लोकसभा से नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम को पारित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा बाजीगरी की जा रही थी। इसके तहत एक तरफ जहां एनडीए खेमे से गृह मंत्री अमित शाह समेत कई मंत्री लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी राजनीतिक दलों के नेताओं के द्वारा उठाए गए प्रश्नों के जवाब देकर उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे थे। तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भावुक होकर नेता विपक्ष राहुल गांधी समेत तमाम विपक्षी राजनेताओं से इस नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम को पारित कराने की अपील कर कह रहे थे कि ये इस नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम के पारित होने पर इसका सारा श्रेय उन्हें देने को तैयार है। यहां तक कि उन्होंने सरकारी खजाने से इस आशय के विज्ञापन छपवाने की बात भी विपक्षी राजनीतिक दल के नेताओं से कही। लेकिन इस बार लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव समेत तमाम विपक्षी राजनीतिक दल के नेताओं ने यह कहते हुए कि इस बार वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बाजीगरी नहीं चलने देंगे , जैसा कि वे पूर्व में कर लिया करते थे, इस नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम के विरोध में मतदान किया। मत विभाजन में इस नई शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम के पक्ष में 298 मत पड़े जो इसे पारित होने के लिए अनिवार्य की दो तिहाई बहुमत 352 से कम था। इस तरह से सरकार के द्वारा लोकसभा में लाया गया नारी शक्ति बंधन संशोधन अधिनियम लोकसभा से पारित नहीं हो सका। इसके बाद विपक्षी राजनीतिक दल के नेताओं के द्वारा कहा जाने लगा कि अब उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बाजीगरी के राज का पता चल गया है और अब ये ऐसे ही आगे उनकी बाजीगरी को नहीं चलने देंगे।

लेकिन नरेंद्र मोदी को ऐसी बाजीगरी में महारत हासिल है। वह नया-नया नैरेटिव तैयार करते रहते हैं और उसका फायदा अपनी और अपने गठबंधन के नेताओं की जीत के लिए उठा ले जाते हैं। विपक्ष के नेता भले ही लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बाजीगरी पर रोक लगाने की बात कह रहे हैं , इसके अन्तर्गत वे परिसीमन जैसे टेक्निकल मुद्दे समेतओबीसी और मुसलमानों की बात कह कर जनता के बीच जा रहे हैं, लेकिन इस बात को ढंग से समझा नहीं पा रहे हैं। ये लोगों को परिसीमन जैसे टेक्निकल शब्दों के सहारे बाजीगरी कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोल खोलने की बात ज्यादा कर रहे हैं , दक्षिण के राज्यों के संसद के सीटों में कमी आने की बात करते हैं, जो प्रत्यक्षतः बढ़ता हुआ दिखता है। ऐसे में आम लोगों को इन टेक्निकल बातों मैं ज्यादा दिलचस्पी नहीं है। ऐसी टेक्निकल बातों और संख्या बल के कारण लोकसभा में नारी शक्ति बंधन संशोधन अधिनियम जैसे बिल भले गिर सकते हैं, लेकिन ऐसी बातें आम जनता के मर्म को स्पर्श कर उनका भरोसा जीतने में सहायक नहीं होती है।

वहीं दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम के गिरते ही अपनी नई जादूगरी दिखाना प्रारंभ कर दिया। तमिलनाडु के चुनाव के साथ-साथ पश्चिम बंगाल की वर्तमान विधानसभा चुनाव में महिलाओं को अपने पक्ष में करने के लिए इन्होंने वहां दी गई भाषणों से तो विपक्षी गठबंधनों पर भोली भाली महिलाओं को संसद में प्रवेश न करने देने के लिए भ्रूण हत्या का कसुरवार ठहराते हुए उन्हें चेतावनी दी कि इसके लिए महिलाएं विपक्षी राजनीतिक दलों को कभी माफ नहीं करेंगी। इतना ही नहीं उसी रात उन्होंने देश के नाम संदेश प्रसारित कर दिया। चूंकि मीडिया मैनेजमेंट में उन्हें महारत हासिल है इसलिए इसके द्वारा भी उन्होंने महिलाओं के दिल में उतारने का एक बड़ा प्रयास किया। यहां भी उनकी जादूगरी साफ देखी गई। 2029 के चुनाव में हर हाल में महिलाओं को संसद में 33% आरक्षण का लाभ दिलाने की बात तो कही, लेकिन कैसे इसे वैसे ही छुपा लिया जैसे जादूगर भीड़ इकट्ठी करने के लिए कहीं जाने वाले कई बातों को बाद में छुपा लेता है और इसका जिक्र तक नहीं करता है। ऐसे में लोकसभा में इस बार भले ही विपक्ष के कहे अनुसार उनकी जादूगरी की पोल खुल गई ,लेकिन एक बार फिर से वे महिलाओं को अपने पक्ष में करने के लिए नया जादू का खेल लेकर सामने आ गए हैं। नए-नए नैरेटिव गढ़ रहे हैं, ताकि महिलाओं को मंत्र मुग्ध कर इसका लाभ उठाया जा सके।

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