दिशा सालियान (सांयम) मामले में चश्मदीद गवाहों (Eyewitnesses) को लेकर चल रहे विवाद में हाल ही में कई बड़े खुलासे हुए हैं। सितंबर 2026 में बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा इस मामले की सीबीआई (CBI) जांच के आदेश दिए जाने के बाद यह मामला फिर से गरमा गया है।
सीबीआई के द्वारा फिर एक तरकर इस मामले की जांच करने से पूर्व ही विटनेस को धमका कर इस जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया जाने लगा है ।गवाहों को कौन धमकी दे रहा है और क्या बोल रहा है? इसे लेकर प्रभावशाली लोगों पर आरोप लगाये जा रहा है।
दिशा सालियान के पिता के वकील निलेश ओझा ने कोर्ट में दावा किया है कि उनके पास ऐसे चश्मदीद गवाह (Eyewitnesses) मौजूद हैं, जिन्होंने घटना की रात कई बड़े राजनेताओं और अभिनेताओं को वहां देखा था। याचिकाकर्ताओं और वकीलों का आरोप है कि मामले से जुड़े चश्मदीदों और पीड़ित परिवार को केस दबाने के लिए लगातार डराया-धमकाया जा रहा है ताकि वे कोर्ट या सीबीआई के सामने मुंह न खोलें।
इन धमकियों में गवाहों को झूठी गवाही देने, मामले से पीछे हटने या चुप रहने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। आरोप है कि उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने या झूठे मामलों में फंसाने की बातें बोली जा रही हैं ताकि मुख्य आरोपियों के नाम सामने न आ सके।यह स्थिति मामले को कैसे प्रभावित कर सकती है?गवाहों को प्रभावित करने या धमकी देने से कानूनी प्रक्रिया पर निम्नलिखित गंभीर असर पड़ सकते हैं:
सबूतों और बयानों से छेड़छाड़: अगर गवाह डर के मारे अपने बयान बदल देते हैं या मुकर जाते हैं (Hostile Witness), तो असली गुनहगारों तक पहुँचना मुश्किल हो सकता है।
सीबीआई जांच की दिशा बदलना: बॉम्बे हाई कोर्ट ने सीबीआई को पूरी स्वतंत्रता के साथ नए सिरे से एफआईआर (FIR) दर्ज कर जांच करने को कहा है। ऐसे में मुख्य चश्मदीदों का सुरक्षित रहना और सही बयान देना इस केस की अंतिम रिपोर्ट (Chargesheet) तय करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
जांच में देरी: अगर गवाहों की सुरक्षा को खतरा रहता है, तो कोर्ट को उनकी सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम करने होंगे, जिससे कानूनी कार्रवाई और लंबी खिंच सकती है।

