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चुनावी बांड का खेल :जिन कंपनियों पर पड़े छापे ,वही से मिले बीजेपी को चंदा 

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न्यूज़ डेस्क
 इस देश की कहानी गजब है। और इस देश की राजनीति और नेताओं के बारे में क्या कहने ! सब पार्टियां खुद को बड़ा ईमानदार कहती है और सभी नेता सामने वालों से ज्यादा साख वाले मानते हैं लेकिन नेताओं की कहानी इस देश में कई बार खुल चुकी है। अब चुनावी बांड के जरिये जो कहानी सामने आ रही है वह बीजेपी की कलई खोलने के लिए काफी है। चुनावी चंदे के जरिये जो धंधा किया गया है उसकी एक छोटी जानकारी तो यही मिली है कि जिसने बीजेपी को चंदा दिया उसे चंदे के बदले मालामाल कर दिया गया। देश की संपत्ति को उसके हवाले कर दिया गया। आज कांग्रेस ने चुनावी बांड की जांच के बाद कुछ खुलासा किया है।  

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने जो बयान दिया है उसकी सच्चाई जानकार अब बहुत कुछ सोंचने को मजबूर होना पड़ सकता हगाई। बयान में का गया है 1,300 से अधिक कंपनियों और व्यक्तियों ने इलेक्टोरल बॉन्ड के रूप में दान दिया है, जिसमें 2019 के बाद से बीजेपी को 6,000 करोड़ से अधिक का दान शामिल है।अब तक, इलेक्टोरल बॉन्ड का डेटा बीजेपी की कम से कम 4 भ्रष्ट नीति को सामने लाता है –
 चंदा दो, धंधा लो

ऐसी कई कंपनियों के मामले हैं जिन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड दान किया है और इसके तुरंत बाद सरकार से भारी लाभ प्राप्त किया है। मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रा ने 800 करोड़ रुपए से अधिक इलेक्टोरल बॉन्ड में दिए हैं। अप्रैल 2023 में, उन्होंने 140 करोड़ डोनेट किया और ठीक एक महीने बाद, उन्हें 14,400 करोड़ रुपए की ठाणे-बोरीवली ट्विन टनल प्रोजेक्ट मिल गया। इसी तरह जिंदल स्टील एंड पावर ने 7 अक्टूबर 2022 को इलेक्टोरल बॉन्ड में 25 करोड़ रुपए दिए और सिर्फ़ 3 दिन बाद वह 10 अक्टूबर 2022 को गारे पाल्मा 4/6 कोयला खदान हासिल करने में कामयाब हो गया।

 हफ़्ता वसूली:

 बीजेपी की हफ्ता वसूली नीति बेहद सरल है – ईडी/सीबीआई/आईटी के माध्यम से किसी कंपनी पर छापा मारो और फ़िर कंपनी की सुरक्षा के लिए हफ़्ता (“दान”) मांगो। शीर्ष 30 चंदादाताओं में से कम से कम 14 पर छापे मारे गए हैं।
 इस साल की शुरुआत में एक जांच में पाया गया कि ईडी/सीबीआई/आईटी छापे के बाद, कंपनियों को चुनावी ट्रस्टों के माध्यम से बीजेपी को दान देने के लिए मजबूर किया गया था। हेटेरो फार्मा और यशोदा अस्पताल जैसी कई कंपनियों ने इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से चंदा दिया है।  इनकम टैक्स विभाग ने दिसंबर 2023 में शिरडी साईं इलेक्ट्रिकल्स पर छापा मारा और जनवरी 2024 में उन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से 40 करोड़ रुपए का दान दिया।
 फ्यूचर गेमिंग एंड होटल्स ने 1200 करोड़ रुपए से अधिक का दान दिया है जो इसे अब तक के आंकड़ों में सबसे बड़ा दान देने वाला बनाता है। आप क्रोनोलॉजी समझिए-2 अप्रैल 2022: ईडी ने फ्यूचर पर छापा मारा, और 5 दिन बाद (7 अप्रैल) को उन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड में 100 करोड़ रुपए का दान दिया। अक्टूबर 2023: आईटी विभाग ने फ्यूचर पर छापा मारा, और उसी महीने उन्होंने इलेक्टोरल‌ बॉन्ड में 65 करोड़ रुपए का दान दिया।

 रिश्वत लेने का नया तरीक़ा

 आंकड़ों से एक पैटर्न उभरता है, जिसमें केंद्र सरकार से कुछ मदद मिलने के तुरंत बाद कंपनियों ने चुनावी बॉन्ड के माध्यम से एहसान चुकाया है। वेदांता को 3 मार्च 2021 को राधिकापुर पश्चिम प्राइवेट कोयला खदान मिला, और फिर अप्रैल 2021 में उन्होंने चुनावी बॉन्ड में 25 करोड़ रुपए का दान दिया।
 मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रा को अगस्त 2020 में 4,500 करोड़ का जोजिला सुरंग प्रोजेक्ट मिला, फिर अक्टूबर 2020 में उन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड  बॉन्ड में 20 करोड़ रुपए का दान दिया। मेघा को दिसंबर 2022 में बीकेसी बुलेट ट्रेन स्टेशन का कॉन्ट्रैक्ट मिला, और उन्होंने उसी महीने 56 करोड़ रुपए का दान दिया।

 शेल कंपनियों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग

 इलेक्टोरल बॉन्ड योजना के मामले में एक बड़ा मुद्दा यह है कि इसने यह प्रतिबंध हटा दिया कि किसी कंपनी के मुनाफे का केवल एक छोटा प्रतिशत ही दान किया जा सकता है, जिससे शेल कंपनियों के लिए काला धन डोनेट करने का रास्ता साफ़ हो गया। ऐसे कई संदिग्ध मामले हैं, जैसे 410 करोड़ रुपए का दान क्विक सप्लाई चेन लिमिटेड द्वारा दिया गया है, यह एक ऐसी कंपनी है जिसकी पूरी शेयर पूंजी MoCA फाइलिंग के अनुसार सिर्फ 130 करोड़ रुपए है।

बयान में आगे कहा गया, “एक अन्य प्रमुख मुद्दा डेटा का नहीं होना है

एसबीआई द्वारा प्रदान किया गया डेटा अप्रैल 2019 से शुरू होता है, लेकिन एसबीआई ने मार्च 2018 में बॉन्ड की पहली किश्त बेची। इससे 2,500 करोड़ रुपए के बॉन्ड का डेटा गायब है। मार्च 2018 से अप्रैल 2019 तक इन गायब बांड्स का डेटा कहां है? उदाहरण के लिए, बांड की पहली किश्त में, बीजेपी को 95% धनराशि मिली। बीजेपी किसे बचाने की कोशिश कर रही है?

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