नीट अंडरग्रैजुएट परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक होने के मामले पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफा और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर जब कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर मंतर पर अपना आंदोलन प्रारंभ किया तब इसमें बल प्रदान करने के लिए उन लोगों ने प्रसिद्ध पर्यावरणविद सोनम वांगचुक का साथ लिया। सोनम वांगचुक ने इस मुद्दे पर अनशन शुरू कर दिया। एक तरफ सोनम वांगचुक भूख की स्थिति में जा रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ डफली गैंग वहां डफली बजा रहा था और खुशियां प्रकट कर रहा था। कहीं से नहीं लग रहा था कि उन्हें छात्रों की कोई चिंता हो। उनकी चिंता थी कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो जाए और वह ऐसे डफली बजाते रहें। राहुल गांधी भी कभी जंतर मंतर पर नहीं आए और पवन खेड़ा जैसे लोगों को ही इसलिए जंतर मंतर पर भेजा ताकि छात्रों में कांग्रेस के किसी नेता के नहीं आने को लेकर कांग्रेस के प्रति नाराजगी ना हो जाए। इस बीच सोनम वांगचुक की हालत खराब होने लगी। जंतर मंतर पर इस प्रकार की बातें होने लगी कि सोनम वांगचुक की जान चली जा सकती है। इस बात की भी चर्चा होने लगी कि कहीं इन आंदोलनकारी में छिपा अराजक तत्व ही सोनम वांगचुक की जान न ले ले। तब सुप्रीम कोर्ट निर्देश पर नरेंद्र मोदी की सरकार ने पुलिस भेज कर सोनम वांगचुक को वहां से हटा लिया और सफदरजंग अस्पताल में लाकर उनका इलाज कराने लगी। सोनम वांगचुक ने अस्पताल आने के बाद सरकार से छात्रों के इस मुद्दे पर संसद में चर्चा करने की बात कर दी। सरकार ने उनकी इस मांग को मान लिया। इसके बाद इस डफली गैंग वालों ने और राहुल गांधी ने सोनम वांगचुक से अपनी दूरी बढ़ाने शुरू कर दी। उन लोगों ने तो यहां तक कहना शुरू कर दिया की सोनम वांगचुक नरेंद्र मोदी सरकार की गोदी में जाकर बैठ गई है।
अब इस रहस्य पर से पर्दा उठने लगा है कि आखिर सोनम वांगचुक के अस्पताल जाने के बाद इन डफली गैंग वालों ने राहुल गांधी ने उनसे दूरी बनाने क्यों प्रारंभ कर दी।
इस बात का खुलासा सोशल मीडिया पर आए एक वीडियो से हुआ। इस वीडियो में सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे आगमों अपने उद्गार प्रकट करते हुए सनातन धर्म की बड़ाई कर रही हैं। इसमें वे संविधान में सेकुलर शब्द जोड़े जाने का भी विरोध कर रही हैं । वे तो यहां तक कह रही हैं कि देश में अप्रत्याशित ढंग से नेहरू जी प्रधानमंत्री ना बने होते तो आज देश की एक दूसरी ही छवि होती। गौरतलब है कि उसे समय कांग्रेस अध्यक्ष इसके बाद में प्रधानमंत्री बनने की बात थी। उसमें एक वोट को छोड़कर और सभी वल्लभभाई पटेल के पक्ष में पड़े थे ,लेकिन महात्मा गांधी के हस्तक्षेप से जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस के अध्यक्ष बने और बाद में भारत के प्रधानमंत्री भी बन गये।
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे आगमों का सोशल मीडिया पर आया यह वक्तव्य बताता है कि वे और सोनम वांगचुक अंदर से सनातनी है। ऐसे में उनकी विचारधारा और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा दोनों एक ही है।
सोनम वांगचुक एक प्रसिद्ध पर्यावरणविद् होने की साथ-साथ लद्दाख के अलग राज्य के भी पक्षधर हैं। लद्दाख की कुल आबादी लगभग 2.74 लाख (2011 की जनगणना के अनुसार) है और इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 1,66,698 वर्ग किलोमीटर है। लद्दाख का जनसंख्या घनत्व 4.5 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।लद्दाख में फिलहाल लेह और कारगिल दो जिले हैं ।हाल ही में प्रशासनिक रूप से 5 नए उप-जिले जोड़े जाने के बाद वहां कुल 7 क्षेत्र/प्रशासनिक इकाई ही गए हैं। ऐसे में लद्दाख का एक स्वतंत्र राज्य बना संभव नहीं लगता है।
इस बात को सोनम वांगचुक भी जानते हैं। ऐसे में अब लद्दाख को संविधान की पांचवी या छठी अनुसूची में डालने की बातचीत सोनम वांगचुक और नरेंद्र मोदी की सरकार के बीच शुरू हो गई है।
भारतीय संविधान की पाँचवीं अनुसूची में वर्तमान में 10 राज्य शामिल हैं, जिनके नाम हैं: आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड।ये 10 राज्य निम्नलिखित हैं:पाँचवीं अनुसूची के 10 राज्यआंध्र प्रदेश,छत्तीसगढ़,गुजरात,हिमाचल प्रदेश,झारखंड,मध्य प्रदेश,महाराष्ट्र,ओडिशा,राजस्थान और तेलंगाना है।
भारतीय संविधान की छठी अनुसूची में पूर्वोत्तर भारत के चार राज्य – असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम शामिल हैं। यह अनुसूची इन राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन और स्वायत्तता से जुड़ी है।
इस अनुसूची में शामिल होने वाले राज्यों के शेड्यूल ट्राइब के कल्याण के लिए कई प्रकार की विशेष अधिकार सरकार को दिए जाते हैं। सोनम वांगचुक लद्दाख को संविधान की इन्हीं अनुसूचियां में से एक में शामिल करवाना चाहते हैं ताकि लद्दाख का विकास हो और बाहर के लोग वहां की खनिज संपदा को लूट न ले। गौरतलब है कि इस समय लद्दाख में देश के अन्य राज्यों से आकर व्यवसायी वहां के खनिजों का दोहन कर रहे हैं। सोनम वांगचुक को लगता है कि इससे लद्दाख के खनिज पदार्थ का दोहन कर बाहर के लोग तो मालामाल हो जाएंगे और लद्दाख के लोग पहले ही की तरह गरीब बने रहेंगे। सोनम वांगचुक की इस चिंता पर नरेंद्र मोदी की सरकार गंभीर है और संभव है की लद्दाख को संविधान की पांचवी या छठी अनुसूची में जल्दी ही शामिल कर दिया जाएगा।

