अखिलेश अखिल
संसद सत्र ख़त्म हो चुका है। अब मामला राहुल गांधी की लोकसभा सदस्य्ता को खत्म करने का है। राहुल गांधी ने अडानी मसले पर संसद में कई सवाल पूछे थे। पीएम मोदी और अडानी के सम्बन्धो से जुडी तस्वीर भी दिखाई थी। यह बात और है कि राहुल के किसी सवाल का जवाब पीएम मोदी नहीं दिए। राहुल के भाषण के अधिकतर अंश को हटा भी दिया गया लेकिन बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी कर दिया। अब वे कहते फिर रहे हैं कि तो माफ़ी मांगे या सदस्यता से हाथ धोये। उधर संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा है कि इस बार विशेषाधिकार मामले पर कार्यवाई होगी। राहुल पर एक्शन लिया जाएगा।
सत्ता पक्ष और विपक्ष अपने -अपने कामो में जुट गए हैं। सबके पास चुनावी काम ही है। सत्ता पक्ष इस साल होने वाले दस राज्यों के चुनाव को जीतना चाहता है ताकि अगले लोकसभा चुनाव में भी बेरा पार लग जाए। इधर सभी विपक्ष अपने -अपने राज्यों में जातीय राजनीति को साधने की कोशिश में लगे हैं ताकि अगले चुनाव में बीजेपी की खटिया खड़ी की जाए।
इधर कई और भी घटनाएं घटी है। केंद्र सरकार ने बीबीसी वृत्तचित्र पर भारत में बैन लगाया था। मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया और अदालत ने बैन से इंकार कर दिया। कहा लोकतंत्र का गला घोंटा नही जा सकता। बीजेपी को दर्द हुआ। फिर जस्टिस नजीर को राज्यपाल बनाने की खबर सामने आयी। जस्टिस नजीर नोटबंदी ,अयोध्या मामले और तीन तलाक पर सरकार के फेवर में निर्णय दिया था। उन्हें राज्यपाल बनाया गया। कई दिनों तक इस पर बहस हुए। आलोचना भी की गई। लेकिन मोदी सरकार को आलोचना से क्या लेना देना !
राहुल को जो नोटिस मिला था उसका अंतिम दिन है। सबकी निगाहें इस मामले पर टिकी है। राहुल पहले ही कह चुके हैं उन्होंने संसद में कोई ऐसी बात नहीं कही है जो असंसदीय है। कोई ऐसी बात नहीं जो पहले से पब्लिक डोमेन में नहीं है। सारे मामले पहले से ही इंटरनेट पर उपलब्ध हैं और गूगल में और भी बहुत पड़ा हुआ है। ऐसे में बड़ा सवाल तो यही है कि क्या संसद के अंदर प्रधानमंत्री के ऊपर टिप्पणी करने के लिए राहुल गांधी की सदस्यता खत्म हो सकती है? यह सवाल ऐसे भी पूछा जा सकता है कि क्या सरकार यह अफोर्ड कर सकती है कि राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता खत्म की जाए? यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा सांसद अपने बड़बोलेपन में इस मामले को जिस दिशा में ले जाना चाहते हैं, पार्टी आलाकमान उस दिशा में बढ़ता है या नहीं।
ध्यान रहे राहुल गांधी ने जो बातें कही थीं उनमें से ज्यादातर को संसद की कार्यवाही से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से सात सवाल पूछे थे और उन सवालों को भी कार्यवाही से हटा दिया गया है। यह भी ध्यान रखने की बात है कि राहुल के भाषण के दौरान स्पीकर खुद आसन पर थे और उन्होंने राहुल को रोका नहीं था। आमतौर पर कोई असंसदीय बात होती है तो बीच में टोका जाता है। उलटे राहुल का भाषण पूरा होने के बाद स्पीकर ने उनको याद दिलाया कि वे आगे से जनता के बीच यह न कहें कि उनका माइक बंद कर दिया जाता है। हालांकि बाद में उनके भाषण के अंश कार्यवाही से हटाए गए।
अब सवाल है कि क्या गौतम अदानी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबंधों को लेकर पूछे गए सवाल के मसले पर राहुल की सदस्यता खत्म हो सकती है? उन्होंने सदन में एक तस्वीर दिखाई, जिसमें एक विशेष विमान में नरेंद्र मोदी और गौतम अदानी एक साथ हैं। क्या भाजपा या सरकार में से किसी ने इस तस्वीर की सचाई पर सवाल उठाया है? विदेशी प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और अदानी के एक साथ होने की तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल हो रही हैं तो क्या उसका खंडन हो रहा है? तभी कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि राहुल ने वही कहा, जो पहले से सार्वजनिक जानकारी में है। ऐसी किसी बात पर किसी सांसद की सदस्यता कैसे जा सकती है?
भाजपा को अंदाजा है कि अगर इस बात पर राहुल की सदस्यता जाती है तो उसका ज्यादा मुद्दा बनेगा। कांग्रेस पूरे देश में राहुल का भाषण सुनाएगी, उनके पूछे सवाल लोगों के बीच लेकर जाएगी, गौतम अदानी के साथ संबंधों की और ज्यादा चर्चा होगी।अदानी के नाम पर सदस्यता जाएगी तो राहुल के प्रति सहानुभूति होगी और यह बात स्थापित होगी की सरकार, प्रधानमंत्री का अदानी से संबंध है। वैसे भी आजतक विशेषाधिकार के मसले पर संभवतः किसी की सदस्यता नहीं गई है। अगर इस मामले में राहुल की सदस्यता जाती है तो विपक्ष के बीच भी उनका कद बढ़ेगा। नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी का मुकाबला बनाने की कांग्रेस की कोशिश कामयाब होगी। ऐसे में कांग्रेस को ही लाभ होता दिख रहा है। ऐसे में कांग्रेस भी इस ताक में बैठी है कि सरकार कोई बड़ा निर्णय ले।

