दिशा सालियान केस: हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस की जांच पर उठाए सवाल

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सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के बाद मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है।हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं और इसे लगभग ‘व्यर्थ’ करार दिया है। अदालत में यह सवाल भी सामने आया कि जब गंभीर अपराध की शिकायत का दावा किया जा रहा है, तो एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई। कोर्ट की तरफ से यह भी कहा गया कि अभी भी एफआईआर दर्ज की जा सकती है। पुलिस ने अब तक इस मामले की जांच आपराधिक प्रक्रिया संहिता CRPC की धारा 174 के तहत की है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस धारा के तहत जांच की अपनी सीमाएं होती हैं और इसके तहत दर्ज किए गए बयानों की अदालत में सबूत के तौर पर अहमियत काफी कम होती है।

अदालत का कहना है कि अगर कोई संज्ञेय अपराध यानी कि आशंका थी, तो पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज करनी चाहिए थी और फिर जांच करके यह तय करना चाहिए था कि अपराध साबित होता है या नहीं। एफआईआर दर्ज करने का विकल्प अभी भी खुला है।

कोर्ट ने यह कहा कि उन्हें इस मामले में राजनेताओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों या राजनीतिक बयानबाजी में कोई दिलचस्पी नहीं है। कोर्ट ने इस बात पर भी असंतोष जताया कि पुलिस अप्रैल 2026 की क्लोजर रिपोर्ट अब सौंप रही है।कोर्ट ने कहा कि दिशा के पिता को इस क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती देने का पूरा अधिकार है।

सुनवाई के बाद दिशा सालियान के पिता ने अदालत से इंसाफ की उम्मीद जताते हुए कहा कि उन्हें कोर्ट पर भरोसा है।छह साल बाद उन्हें महसूस हो रहा है कि अब उन्हें, उनकी बेटी और उनकी पत्नी को इंसाफ मिलेगा। पुलिस की ओर से दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस ने जो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, वह पूरी तरह फर्जी थी और उसमें सही तथ्यों को सामने नहीं रखा गया। यह रिपोर्ट आरोपियों को बचाने के उद्देश्य से तैयार की गई थी।उन्होंने कहा कि दिशा की मौत के दिन वह अस्पताल पहुंचे थे। उसी दिन पुलिस ने उनका बयान लिया और उनसे पूछा कि क्या उन्हें किसी पर शक है।उन्होंने उस वक्त कहा था कि अभी उन्हें किसी पर शक नहीं है और बाद में इस बारे में देखा जाएगा। इसके दो-तीन दिन बाद उन्हें मालवणी पुलिस स्टेशन बुलाया गया।वहां पुलिस ने दिशा की पढ़ाई, उसके स्कूल-कॉलेज, नौकरी और उसके साथ काम करने वाले लोगों के बारे में सवाल किए।

एजेंसी के मुताबिक, दिशा के पिता ने कहा कि उनकी बेटी की मौत के बाद मीडिया में लगातार रेप और मर्डर जैसी बातें सामने आ रही थीं।इन खबरों को सुनकर वह बेहद परेशान हो गए थे और उस समय उन्हें केवल राहत चाहिए थी। इसी परिस्थिति में उन्होंने कहा था कि उनकी बेटी की मौत का फायदा न उठाया जाए और जो सही है, वही बताया जाए।

दिशा के पिता ने बताया कि वह कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने आदित्य ठाकरे, रोहन राय, सूरज पंचोली और डिनो मोरिया समेत दो-तीन अन्य लोगों के नाम लिए। उन्होंने कहा कि मामला दर्ज होने के बाद जांच होनी चाहिए और जिसकी भी गलती सामने आए, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। दोष सामने आने पर गिरफ्तारी होनी चाहिए।

दिशा सालियान के पिता के वकील नीलेश ओझा ने सुनवाई को अहम बताते हुए कहा कि कोर्ट ने सरकारी वकील और पुलिस से स्पष्ट सवाल किया कि धारा 174 के तहत की गई जांच की कानूनी स्थिति क्या है। पुलिस ने अदालत में कहा कि उसने धारा 174 के तहत जांच की है और गवाहों के बयान दर्ज किए हैं।इस पर अदालत ने सवाल किया कि अगर शिकायत में गैंगरेप और हत्या जैसे संज्ञेय अपराध के आरोप हैं, तो केवल धारा 174 के तहत जांच कैसे की जा सकती है।

निलेश ओझा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के केस लॉ के आधार पर ऐसी जांच का कानूनी आधार नहीं है।अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि एक पिता को अपनी बेटी की मौत की सच्चाई जानने का अधिकार है और इसके लिए कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच होना जरूरी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकारी वकील से कहा कि अगर इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का कोई काउंटर या अलग कानूनी आधार है, तो उसे अगली सुनवाई में अदालत के सामने रखा जाए।

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