नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सेना को महिला अधिकारियों के प्रति भेदभाव करने वाला बताते हुए उसे अपना घर व्यवस्थित करने की सलाह दी है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने 34 महिला अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। इनका आरोप है कि स्थायी कमीशन मिलने के बावजूद उनकी पदोन्नति में देरी की जा रही है। युद्धक और कमांडिंग भूमिकाओं में प्रोन्नति के लिए उनके मुकाबले जूनियर पुरुष अफसरों के नामों पर विचार किया जा रहा है।
सेना महिला अधिकारियों के प्रति निष्पक्ष नहीं: पीठ
पीठ ने कहा कि हमें लग रहा है कि सेना महिला अधिकारियों के प्रति निष्पक्ष नहीं है। हम मंगलवार को इस मामले में अंतिम निर्णय सुनाएंगे। बेहतर है कि आप अपना घर दुरुस्त करें और बताएं कि आप क्या करने जा रहे हैं। पीठ ने सेना को आदेश दिया कि वह प्रोन्नति के लिए किए गये पुरुष अधिकारियों के नामों की घोषणा तक तक न करें,जब तक कि महिला अधिकारियों के लिए चयन बोर्ड-3 की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।
1200 जूनियर पुरुष अफसरों को मिल चुकी है प्रोन्नति
महिला अफसरों की और से पेश वरिष्ठ वकील वी मोहना ने शीर्ष अदालत को बताया कि महिला अफसरों को स्थायी कमीशन दिये जाने के आदेश के बाद से अब तक 1200 जूनियर पुरुष अफसरों को पदोन्नत किया जा चुका है। 22 नवंबर को पिछली सुनवाई के बाद से भी 9 पुरुष अफसरों को उंची रैंक दी जा चुकी है। उन्होंने मांग की कि जब तक महिला अफसरों को पदोन्नति नहीं मिलती,तब तक किसी भी तरह की पदोन्नति पर रोक लगाई जाए। हालांकि केंद्र व सैन्य बलों की और से पेश आर बालसुब्रह्मणयम ने कोर्ट को बताया कि पिछली सुनवाई के बाद से किसी अधिकारी को प्रोन्नति नहीं दी गई है।
केंद्र बताए महिला अफसरों पर विचार क्यों नहीं?
पीठ ने केंद्र सरकार और सेना की और से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने पूछा कि अक्टूबर में प्रोन्नति के लिए महिला अफसरों के नामों पर विचार क्यों नहीं किया गया।
सेना बोली-महिला अफसरों की पदोन्नति के लिए 150 सीटें
सरकारी वकीलों ने कहा कि सेना महिला अफसरों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सैन्य प्रतिष्ठान भी इसके लिए प्रतिबद्ध है। सेना ने महिला अफसरों की प्रोन्नति के लिए 150 सीटें स्वीकृत की हैं।

