नीतीश- नायडू सत्ता के सूत्रधार समेत लोकसभा चुनाव परिणाम कई मायनों में अनूठा

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2 माह तक रिकॉर्ड गर्मी के बीच चला 18 वीं लोकसभा चुनाव मंगलवार को हुई मतगणना के बाद समाप्त हो गया।इस चुनाव में बीजेपी की अगुआई वाले एनडीए को 292 सीट के साथ स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ है ,लेकिन बीजेपी 240 सीट के साथ बहुमत से काफी दूर रही।वहीं विपक्षी इंडिया गठबंधन को 234 सीटें प्राप्त हुआ। मतगणना के इस परिणाम के कई मायने निकलकर सामने आ रहे हैं।

नीतीश कुमार- चंद्रबाबू नायडू सरकार बनाने केअहम किरदार

18 वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में एनडीए को 292 सीटों पर जीत मिली है तो विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने 234 सीटें जीतीं हैं। इससे यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि इस बार एनडीए का सामना एक मजबूत विपक्ष से हो सकता है।इस चुनाव में बीजेपी ने 240 सीटें जीती हैं,हालांकि मोदी के नेतृत्व में पहली बार बीजेपी को अकेले बहुमत प्राप्त नहीं हो सका है। ऐसी स्थिति में बिहार के सीएम नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू को सत्ता का सूत्रधार माना जा रहा है।

हाल ही में बीजेपी के साथ आए नीतीश और नायडू

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए की भावी सरकार के प्रमुख सूत्रधार माने जा रहे चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार हाल में ही बीजेपी के साथ आये हैं। हालांकि इन दोनों के साथ बीजेपी का रिश्ता बहुत पुराना रहा है,लेकिन चंद्र बाबू नायडू 1 बार और नीतीश कुमार तो कई बार एनडीए को छोड़कर विपक्षी खेमा जा हाथ थाम चुके हैं। गौरतलब है की विपक्षी इंडिया गठबंधन के सूत्रधार भी नीतीश कुमार ही थे जो इंडिया गठबंधन में अपनी महत्त्वकांछा पूरी होते न देख लोकसभा चुनाव के कुछ समय पहले ही बीजेपी की अगुआई वाले एनडीए गठबंधन में शामिल हुए थे। इसके बाद उनके नेतृत्व में बिहार में जेडीयू और बीजेपी गठबंधन की सरकार बनी थी।यहां एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि कम विधायक के बावजूद बीजेपी ने मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नीतीश कुमार को ही बिठाया।

नायडू ने आंध्रप्रदेश में की है बड़ी राजनीतिक वापसी

लोकसभा चुनाव के साथ ही आंध्र प्रदेश में हुए विधान सभा चुनाव में चंद्रबाबू नायडू ने बड़ी राजनीतिक वापसी की है।साथ ही केंद्र में भी बीजेपी के सहयोगी तौर पर इतनी सीटें जीती है कि गठबंधन सरकार में उनका रहना जरूरी है। नीतीश और चंद्रबाबू की पार्टी बीजेपी की पूर्व की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में भी सहयोगी रहे थे।

लोकसभा चुनाव के जनादेश के मायने

18 वीं लोकसभा चुनाव के परिणाद्मों के कई मायने हैं।इसमें एनडीए को 400 पार और बीजेपी पार्टी को 370 पार ले जाने की बीजेपी की रणनीति कामयाब नहीं हो पायी तो वहीं मोदी के नेतृत्व में 2014 और 2019 ईस्वी में हुई लोकसभा में बनी बहुमत की सरकार के बाद फिर से गठबंधन की अहमियत वाली सरकार का का दौर वापस लौट आया। बीजेपी इस बार अकेले अपने दम पर सरकार नहीं बना सकती है।इस लोक सभा के चुनाव परिणाम में मजेदार बात यह भी रही कि इस चुनाव परिणाम ने एग्जिट पोल्स की हवा निकाल दी।रुझानों अथवा नतीजों में एनडीए उससे तकरीबन 100 सीट पीछे रह गया।

गुमनामी में जा रहे कई चेहरे हुए मशहूर

2014 के लोकसभा चुनाव से हार की शुरुआत होने के बाद पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सरीखे नेता लगातार अपनी पार्टी की हर या कम सीट में निबट जाने की वजह से तेजी से विस्मृति के गर्भ में जा रहे थे।लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस को 99 और समाजवादी पार्टी को 37 लोकसभा सीटों पर जीत मिलने से वर्तमान राजनीति में इनका कद काफी बढ़ गया है।गौरतलब है कि कांग्रेस को 2014 में 44 और 2019 में 52 सीटों पर जीत मिली थी, वहीं समाजवादी पार्टी को 2019 में सिर्फ पांच सीटें मिली थीं।इस परिप्रेक्ष्य में तीसरा बड़ा नाम चंद्रबाबू नायडू का है जिसकी तेलगु देशम पार्टी विधान सभा चुनाव में 135 सीट लाकर आंध्र प्रदेश में सरकार बनने के करीब है और लोक सभा चुनाव में 16 सीटों के साथ एनडीए के सबसे अहम घटक दलों शामिल है,जिन्हें वर्तमान समय में सत्ता का सूत्रधार माना जा रहा है।

बीजेपी के लिए खेल बिगाड़ने वाला साबित हुआ उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश ऐसा राज्य है, जो लोकसभा में 80 सांसदों को भेजता है। बीजेपी के लिए पिछले दो लोकसभा चुनावों में यह राज्य खेल बदलने वाला साबित हुआ था,लेकिन 18 वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन ने बीजेपी विरोधी वोटों को एकजुट करके बीजेपी को उसके सबसे मजबूत गढ़ में मात दे दी है। पिछली बार 62 सीटों पर जीत हासिल करने वाली बीजेपी इसबार सिर्फ 33 सीटें ही जीत सकी है।अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी 37 सीटों जीती है। साल 2019 में इसे सिर्फ पांच सीटों पर जीत मिल सकी थी।वहीं उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने छह सीटें जीती है।

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