शुगर के मरीज हो जाएं अलर्ट! आपकी आंखों को अंदर से अंधा बना रही है डायबिटीज

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डायबिटीज को अक्सर दिल, किडनी और नसों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन आंखें भी इससे बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।यह नुकसान अचानक नहीं होता, बल्कि धीरे-धीरे बिना दर्द के बढ़ता है और तब सामने आता है जब स्थिति संभालना मुश्किल हो जाता है।यही वजह है कि इसे समझना और समय रहते सावधानी बरतना बेहद जरूरी है. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर डॉक्टर का क्या कहना है.

डॉ. नुसरत बुखारी के अनुसार”डायबिटीज सिर्फ दिल, किडनी, लीवर और नसों को ही नहीं, बल्कि आंखों को भी प्रभावित करती है।” यह बात कई लोग तब समझते हैं जब समस्या बढ़ चुकी होती है। आंख एक कैमरे की तरह काम करती है, जिसमें पीछे की परत यानी रेटिना तस्वीरों को कैद करके दिमाग तक भेजती है। इस रेटिना में बहुत ही महीन ब्लड वेसल्स होती हैं।जब लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर ज्यादा रहता है, तो ये नसें कमजोर होने लगती हैं इनमें सूजन आ सकती है, रिसाव हो सकता है या ये बंद भी हो सकती हैं। कुछ मामलों में शरीर नई ब्लड वेसल्स बनाता है, लेकिन ये बेहद नाजुक होती हैं और ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती हैं।

इस स्थिति को डायबिटिक रेटिनोपैथी कहा जाता है। यह बिना किसी शुरुआती लक्षण के धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकती है और दुनिया भर में नजर कमजोर होने के बड़े कारणों में से एक है। इसके अलावा, डायबिटीज आंखों से जुड़ी अन्य समस्याओं का भी कारण बन सकती है।डायबिटीज के कारण होने वाली आंखों की समस्याओं में डायबिटिक रेटिनोपैथी, डायबिटिक मैक्युलर एडीमा, मोतियाबिंद और ग्लूकोमा शामिल हैं।डॉ. नुसरत बुखारी के अनुसार “अनकंट्रोल डायबिटीज वाले लोगों में इन समस्याओं का खतरा काफी ज्यादा होता है।” खास बात यह है कि इन बीमारियों के शुरुआती संकेत अक्सर नजर नहीं आते।

यही वजह है कि कई लोग तब तक सामान्य महसूस करते रहते हैं जब तक समस्या गंभीर नहीं हो जाती,जब लक्षण दिखते हैं, तो उनमें धुंधला दिखना, आंखों के सामने काले धब्बे नजर आना, रात में देखने में दिक्कत और अचानक नजर में बदलाव शामिल हो सकते हैं। डॉ. बुखारी चेतावनी देते हैं कि आंखों की समस्याएं बिना किसी स्पष्ट संकेत के बढ़ सकती हैं और बाद में तनाव और चिंता का कारण बनती हैं। डायबिटीज शरीर में एक तरह की चेन रिएक्शन भी पैदा करती है।हाई ब्लड शुगर के साथ हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की समस्या जुड़ जाए, तो स्थिति और खराब हो जाती है। धूम्रपान करने से ऑक्सीजन की आपूर्ति भी कम हो जाती है, जिससे आंखों को और नुकसान पहुंचता है
इसी कारण हर व्यक्ति में इसके असर अलग-अलग हो सकते हैं।

हालांकि, राहत की बात यह है कि सही देखभाल से इस नुकसान को रोका या कम किया जा सकता है। ब्लड शुगर को कंट्रोल रखना, नियमित जांच कराना, संतुलित और फाइबर युक्त आहार लेना, रोजाना फिजिकल एक्टिविटी करना और तनाव को कम करना बेहद जरूरी है।इसके साथ ही, साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच जरूर करानी चाहिए, भले ही नजर सामान्य लग रही हो।

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