अखिलेश अखिल
क्या दक्षिण भारत से विपक्ष को एक और पार्टी का समर्थन मिलेगा ? पूर्व पीएम देवगौड़ा के बयान से तो यही लगता है कि आने वाले समय में वे विपक्षी एकता को और धार देंगे और बीजेपी के खिलाफ मुखर होंगे । देवगौड़ा की पार्टी जेडीएस का कर्नाटक में अपना जनाधार है ।यह बात और है कि इस बार के विधान सभा चुनाव में जेडीएस बेहतर नही कर पाई लेकिन उसकी पहुंच हर समाज तक है इसे कोई नकार नहीं सकता ।आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पटखनी देने के लिए विपक्ष एक हो रहा है ।अभी तक देवगौड़ा इससे अलग ही रहे है लेकिन जिस तरह का बयान अभी उन्होंने दिया है उससे साफ हो जाता है कि वे विपक्ष के साथ खड़े हो सकते है ।
पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा ने मंगलवार को कहा कि यह एक ‘खुला रहस्य’ है कि कर्नाटक सहित कई राज्यों में कांग्रेस के कई नेताओं ने अपने स्वार्थी लक्ष्य साधने के लिए भाजपा से हाथ मिलाया है। आगामी संसदीय चुनावों के लिए राज्य में भाजपा और उनके जद-एस के बीच गठजोड़ की अफवाहों के बीच उनका यह बयान महत्वपूर्ण हो गया है। देवेगौड़ा ने पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए आगामी लोकसभा चुनावों में भाजपा के साथ अपनी पार्टी के संभावित गठबंधन पर सवालों का जवाब देते हुए यह बयान दिया और यह भी कहा कि भाजपा के खिलाफ मोर्चा बनाने के लिए समान विचारधारा वाले दलों के एक साथ आने पर वह उसका नेतृत्व करेंगे।
देवेगौड़ा से यह भी सवाल किया गया कि क्या वह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भाजपा के खिलाफ मोर्चा बनाने के प्रयासों का समर्थन करेंगे, इसके जवाब में देवेगौड़ा ने कहा कि वह इस सवाल का जवाब तब देंगे, अगर रिपोर्टर कोई ऐसी पार्टी दिखाए, जिसने भाजपा से हाथ मिलाए बिना राजनीति की हो।
उन्होंने आरोप लगाया, “विभिन्न राज्यों में विभिन्न दलों की भाजपा के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समझौता रहती है और कांग्रेस पार्टी के कई नेताओं की भाजपा के साथ सांठगांठ है।” उन्होंने कहा, “हम कर्नाटक में रुझान देख सकते हैं। इस मामले में छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है।”
उन्होंने कहा कि जद-एस आगामी जिला पंचायत, तालुक पंचायत और बीबीएमपी चुनावों पर ध्यान केंद्रित करेगा। उन्होंने कहा, इसके बाद लोकसभा चुनाव होना है। उस समय फैसला लिया जाएगा कि हमें कितनी सीटों पर चुनाव लड़ना है।
देवगौड़ा ने कहा, मैं चुपचाप घर पर नहीं बैठूंगा। मैं दौरे करूंगा, सभी 28 संसदीय क्षेत्रों में प्रचार किया जाएगा और सभी समुदायों को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। उद्देश्यों को लागू करने के लिए एक समिति बनाई जाएगी। यह पूछे जाने पर कि क्या वह आगामी लोकसभा चुनाव लड़ेंगे, 91 वर्षीय देवेगौड़ा ने कहा कि उनकी पार्टी इस पर फैसला लेगी।

