बीरेंद्र कुमार झा
मानसून सत्र के दौरान संसद में दिल्ली सेवा बिल केस कर दिया गया है।केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने यह बिल पेश किया। खास बात है कि इस दौरान कांग्रेस बिल के खिलाफ है और उड़ीसा में सत्तारूढ़ दल बीजू जनता दल ने राज्यसभा में सरकार का साथ देने का फैसला किया है।मंगलवार को बिल पेश होने के साथ ही कांग्रेस ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताया है ।
पहले कहा जा रहा था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सरकार (संसीधन )विधेयक 2023 पेश कर सकते हैं। दरअसल इस विधेयक पेश करने का मकसद उस अध्यादेश की जगह लेना है,जिसे सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लाया था। 11 मई को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से फैसले में दिल्ली में नौकरशाहों से जुड़े अधिकारों को दिल्ली सरकार को दे दिए थे।
गृह मंत्री अमित शाह ने जीएनसीटी (संशोधन) बिल को लेकर लोकसभा में कहा कि संविधान ने सदन को दिल्ली से जुड़े किसी भी कानून को पास करने की अनुमति दी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साफ हो गया है कि संसद दिल्ली से जुड़े किसी भी कानून को का सकती है। सारी आपत्तियां राजनीतिक हैं। कृपया मुझे इस बिल को पेश करने दें ।
राज्यसभा में होगा असली मुकाबला
गौरतलब है कि लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी कार्रवाई वाली एनडीए सरकार के पास बहुमत है। ऐसे में विपक्ष के दलों को क्षेत्रीय पार्टियों पर निर्भर रहना होगा अब इस बिल को लेकर लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी जमकर हंगामा होने के आसार है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगातार विपक्षी दलों को सरकार के इस कदम के खिलाफ एकजुट कर रहे हैं।
उच्च सदन में सदस्यों की कुल संख्या 245 है, लेकिन इसमें कुछ रिक्तियां भी हैं।उच्च सदन में सत्तारूढ़ गठबंधन के 100 सदस्य हैं, वही उसे मनोनीत सदस्यों और कुछ निर्दलीय सदस्यों के साथ ऐसे दलों से समर्थन मिलने की उम्मीद है जो सत्ता पक्ष और विपक्षी खेमे दोनों से अलग हैं।ऐसे दलों ने विभिन्न मुद्दों पर कई बार सरकार के पक्ष में मतदान किया है। उम्मीद है कि राज्यसभा में सत्ता पक्ष को आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी दल वाईएसआर कांग्रेस उड़ीसा के बीजू जनता दल का समर्थन प्राप्त है, जिससे राज्यसभा में भी इस बिल के पास हो जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

