₹2000 की नोट बंदी पर दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश रखा सुरक्षित, आरबीआई के फैसले को दी गई है चुनौती

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बीरेंद्र कुमार झा

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक(RBI) के ₹2000 के नोट को चलन से बाहर करने के फैसले के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। अदालत में दायर याचिका में आरबीआई की ओर से 19 मई 2023 को जारी की गई अधिसूचना को रद्द करने की मांग की गई है।आरबीआई की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि उसने क्लीन नोट पॉलिसी के तहत ₹2000 के नोट को वापस करने का फैसला किया है।

हाईकोर्ट ने एक अन्य याचिका को किया है खारिज

जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने मंगलवार को याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों की दलील सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। आरबीआई ने अदालत में दाखिल याचिका का विरोध किया है, जिसमें कहा गया है कि ₹2000 के नोट वैध मुद्रा बने रहेंगे। हालांकि हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सोमवार को आरबीआई की ओर से बिना किसी पहचान प्रमाण के ₹2000 के नोटों को बदलने की अनुमति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था।

आरबीआई ने की है मनमानी

दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता ने अपनी याचिका में कई प्रकार के तर्क देते हुए कहा कि केंद्रीय बैंक के पास आरबीआई अधिनियम 1934 के तहत किसी भी मूल्य के बैंक नोट को बंद करने का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं है। आरबीआई अधिनियम 1934 की धारा 24 (2 ) के तहत यह शक्ति केवल केंद्र सरकार के पास है। उन्होंने आरोप लगाया है कि ₹2000 के नोट को चलन से बाहर किए जाने से जनता पर बड़े पैमाने पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण किए बिना ही आरबीआई की ओर से यह मनमाना फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि ₹2000 के नोट को बंद करने की पीछे आरबीआई ने कोई सटीक तर्क नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि क्लीन नोट पॉलिसी के तहत केवल कटे- फटे और पुराने गंदे नोटों को वापस लिया जाता है, न कि अच्छे नोट वापस किए जाते हैं।

2000 का नोट नहीं ले रहा दुकानदार

याचिका में यह भी कहा गया है कि आरबीआई की ओर से अधिसूचना जारी करने के बाद बाजार में कारोबारियों और दुकानदारों ने ₹2000 के नोट को लेना देना बंद कर दिया है। इससे बैंक से दूर रहने वाले ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले पुरुषों और महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। याचिका में कहा गया है कि इस भीषण गर्मी में लोगों को बिना किसी गलती के₹2000 का नोट बदलवाने के लिए कई कई किलोमीटर दूर बैंक जाना पड़ रहा है और वहां कतार में लगकर नोट बदलवाने पड़ रहा है।

क्लीन नोट पॉलिसी के तहत ₹2000 की वापसी कैसे

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि आरबीआई और वित्त मंत्रालय न केवल हर एक बैंक नोट पर छपाई के साल का ही उल्लेख करती है, बल्कि केंद्रीय बैंक क्लीन नोट पॉलिसी के तहत यह अनुमान भी लगाता है कि संबंधित नोट कितने साल तक चल सकते हैं और उनकी उम्र कितनी हो सकती है।नोट वापसी से पहले वित्त मंत्रालय और आरबीआई देश के नागरिकों को इसकी सूचना देते हैं,जबकि आरबीआई ने ₹2000 के नोट की वापसी करने का ऐलान करने से पहले ऐसा नहीं किया है।

 

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