न्यूज़ डेस्क
बिहार में कहने को शरबबंदी है लेकिन जहरीली शराब से लेकर आम शराब धड़ल्ले से लोग पी रहे हैं। पहले जो शराब सौ रुपये में मिलता था अब वही तीन सौ में मिल रहे हैं लेकिन शराब कीउपलब्धता में कोई कमी नहीं है। शराब पीने वालो पर आर्थिक बोझ पहले से ज्यादा बढ़ गया है लेकिन न तो शराब की आर्पूर्ति बाधित हो पाई है और न ही पीने वालों की संख्या में कोई कमी आयी है। लेकिन इन सबके बीच नकली और जहरीली शराब पीने से हर साल सौकड़ो लोगों की मौत होती जा रही है। इस मूत पर किसी का कोई जोर नहीं। सियासी गलियारों में खूब हलचल होती है और फिर बाद में सब कुछ शांत हो जाता है।
इस बार भी ऐसा ही कुछ हो रहा है। बिहार के सिवान और सारण जिलों में कथित तौर पर जहरीली शराब पीने से 10 और लोगों की मौत हो गई, जिससे इस त्रासदी में मरने वालों की संख्या बढ़ कर 35 हो गई है।
सारण रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक नीलेश कुमार ने शुक्रवार को बताया, “सिवान जिले की मगहर और औरिया पंचायतों में संदिग्ध अवैध शराब पीने से अब तक 28 लोगों की मौत हो चुकी है। सारण जिले के मशरख थाना क्षेत्र के इब्राहिमपुर इलाके में भी सात लोगों की संदिग्ध अवैध शराब पीने से मौत हो गई है।”
इस संदिग्ध शराब त्रासदी को लेकर प्रदेश में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। विपक्षी दल आठ साल से अधिक समय पहले नीतीश कुमार सरकार द्वारा शराब की बिक्री और सेवन पर लगाए गए प्रतिबंध की प्रभावशीलता पर सवाल उठा रहे हैं। दोनों जिलों के स्थानीय लोगों ने दावा किया कि “अवैध शराब पीने” के बाद लोगों की जान चली गई।
स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर दावा किया कि दोनों जिलों के 25 से अधिक लोग अभी भी सीवान, सारण और पटना के विभिन्न अस्पतालों में अपनी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
डीआईजी ने कहा कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही पता चल पाएगा। अभी तक मृतकों और उपचाराधीन लोगों की पहचान का खुलासा नहीं किया गया है। दोनों जिलों में हुई घटनाओं के सिलसिले में पुलिस ने अब तक करीब 15 लोगों को गिरफ्तार किया है। घटना के बाद दोनों जिलों के प्रशासन ने मगहर, औरिया और इब्राहिमपुर क्षेत्रों के तीन चौकीदारों को निलंबित कर दिया है। एक अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि कम से कम पांच पुलिसकर्मियों को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया गया है।
इस घटना को लेकर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, “बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्य में हुई हालिया मौतों के लिए दोषी ठहराया जाना चाहिए। यह एक सामूहिक हत्या है। शराबबंदी नीतीश सरकार के संस्थागत भ्रष्टाचार का एक उदाहरण है। शराबबंदी को प्रभावी ढंग से लागू करना सरकार की जिम्मेदारी है… लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है… शराबबंदी आज बिहार में सुपर फ्लॉप है।’’
उन्होंने आगे लिखा ‘‘सत्ताधारी नेताओं-पुलिस और शराब माफिया के बीच नापाक गठजोड़ के कारण बिहार में 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध शराब का काला बाजार पनप गया है। राज्य सरकार के रिकॉर्ड के अनुसार, नकली शराब पीने से मरने वालों की संख्या 300 से अधिक है। उनका हत्यारा कौन है? ’’
राजद नेता मनोज कुमार झा ने कहा, “मरने वालों की संख्या 25 से ऊपर जा चुकी है। सरकार ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना में भी डेटा को छिपाना चाहती थी। मुख्यमंत्री कहां है? राज्य को कौन चला रहा है? मौतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। शराबबंदी के नाम पर गरीब और लाचार लोगों को जेल भेजा जा रहा है। तेजस्वी यादव ने सही कहा कि यह एक उद्योग है, एक सिंडिकेट है।”
