Crude Oil Crash: एक हफ्ते में 8% टूटा कच्चा तेल, भारत में घटेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

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Crude Oil Price Today: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में हल्की बढ़त जरूर दर्ज हुई, लेकिन पूरे सप्ताह के दौरान तेल बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। पिछले सात दिनों में वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल करीब 8 प्रतिशत तक सस्ता हो चुका है।

ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 78 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में तनाव कम होने और सप्लाई बढ़ने की उम्मीदों ने तेल बाजार पर दबाव बनाया है।

क्यों टूटे कच्चे तेल के दाम?

विश्लेषकों के अनुसार हाल के दिनों में तेल बाजार पर सबसे बड़ा असर पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों का पड़ा है। इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष विराम की खबरों तथा ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती कूटनीतिक सहमति ने निवेशकों की चिंताओं को कम किया है।

बाजार को उम्मीद है कि यदि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहती है तो तेल आपूर्ति में सुधार होगा। इसके साथ ही ईरानी तेल की वैश्विक बाजार में वापसी की संभावना भी मजबूत हुई है, जिससे सप्लाई बढ़ने और कीमतों पर दबाव बनने की आशंका है।

ब्रेंट और WTI में कितनी आई गिरावट?

पिछले एक सप्ताह के दौरान ब्रेंट क्रूड में करीब 8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड भी इसी अवधि में लगभग 9 फीसदी तक कमजोर हुआ है।

तेल बाजार के जानकारों का कहना है कि निवेशक अब युद्ध और सप्लाई बाधित होने के जोखिम को पहले की तुलना में कम आंक रहे हैं, जिसका सीधा असर कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट और तेल सप्लाई पर नजर

दुनिया की तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते गुजरता है। हालिया घटनाक्रमों के बाद तेल टैंकरों की आवाजाही बढ़ने लगी है, जिससे बाजार को अतिरिक्त सप्लाई मिलने की उम्मीद है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्रीय परिस्थितियों पर अभी भी नजर बनाए रखने की जरूरत है, क्योंकि किसी भी नए तनाव का असर तेल की कीमतों पर तुरंत पड़ सकता है।

85 मिलियन बैरल तेल बाजार में आने की उम्मीद

ऊर्जा बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच समझौते की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो करोड़ों बैरल तेल वैश्विक बाजार में उपलब्ध हो सकता है।

इससे न केवल सप्लाई मजबूत होगी बल्कि लंबे समय में कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है। कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों ने अनुमान लगाया है कि अगले कुछ महीनों में तेल बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति देखने को मिल सकती है।

क्या 60 डॉलर तक आ सकता है कच्चा तेल?

कई वैश्विक वित्तीय संस्थानों का अनुमान है कि यदि मौजूदा हालात बने रहते हैं और सप्लाई सामान्य हो जाती है, तो अगले 6 से 12 महीनों में कच्चे तेल की कीमतें 60 से 65 डॉलर प्रति बैरल के दायरे तक पहुंच सकती हैं।

कुछ संस्थाओं ने अपने सालाना अनुमान में कटौती करते हुए ब्रेंट क्रूड के लक्ष्य मूल्य को पहले के मुकाबले कम कर दिया है। हालांकि मांग और सप्लाई के संतुलन पर अंतिम दिशा निर्भर करेगी।

भारत में पेट्रोल और डीजल होगा सस्ता?

यही सवाल इस समय आम लोगों के मन में सबसे ज्यादा है। पिछले कुछ सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आई है। इसके बावजूद घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अभी कोई बदलाव नहीं हुआ है।

विशेषज्ञों के अनुसार तेल कंपनियों को पहले हुए नुकसान की भरपाई करनी है। माना जा रहा है कि जब तक कच्चा तेल लंबे समय तक कम कीमत पर स्थिर नहीं रहता, तब तक खुदरा ईंधन कीमतों में राहत मिलना मुश्किल हो सकता है।

हालांकि यदि क्रूड ऑयल 75 डॉलर प्रति बैरल या उससे नीचे टिकता है, तो भविष्य में पेट्रोल और डीजल के दाम कम होने की संभावना बढ़ सकती है।

देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम

फिलहाल देश के बड़े महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव दर्ज नहीं किया गया है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत प्रमुख शहरों में ईंधन के दाम स्थिर बने हुए हैं।

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