अमित शाह ने किया तीन कानूनों को खत्म करने का ऐलान, लोकसभा में पेश किया सीआरपीसी संशोधन बिल

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बीरेंद्र कुमार झा

केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार ने अंग्रेजो के द्वारा बनाए गए भारतीय आपराधिक कानूनों में संपूर्ण बदलाव के लिए एक विधेयक पेश किया है।भारतीय दंड संहिता,दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को भारतीय न्याय संहिता से बदल दिया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में आज भारतीय दंड संहिता, सीआरपीसी और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को बदलने के लिए तीन विधेयक पेश किया।उन्होंने कहा कि यह तीनों कानून अंग्रेजो के द्वारा बनाए गए थे, हम इसे बदल रहे हैं।इसे बदलते हुए नए कानून ला रहे हैं। अमित शाह ने जिन तीन नए कानूनों की घोषणा की है,उसमें भारतीय न्याय संहिता2023,भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य विधेयक 2023 शामिल है।

अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा की 1860 से 2023 तक देश की आपराधिक न्याय प्रणाली अंग्रेजों के बनाए कानूनों के मुताबिक चलती थी। तीन कानूनों को बदल दिया जाएगा।इससे देश के आपराधिक न्याय प्रणाली में बड़ा बदलाव आएगा।

भारतीय न्याय संहिता 2023

यह संहिता अपराधों से संबंधित प्रावधानों को समेकित और संशोधित करने के लिए और उससे जुड़े या उसके आकस्मिक मामलों के लिए है।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023

यह संहिता दंड प्रक्रिया से संबंधित कानून को समेकित और संशोधित करने या उनसे जुड़े या उनके प्रासंगिक मामलों के लिए है।

भारतीय साक्ष्य विधेयक 2023

यह निष्पक्ष सुनवाई के लिए साक्ष्य के सामान्य नियमों और सिद्धांतों को समेकित करने और प्रदान करने के लिए है।

पुख्ता होगी जांच

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि किसी भी अपराध में जिसमें 7 साल से अधिक की सजा हो, उसके लिए फोरेंसिक टीम घटनास्थल पर मौजूद होनी चाहिए, जिससे अपराध की जांच करने में सहूलियत हो। लेकिन विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि देश इसके लिए तैयार नहीं है ।अमित शाह ने कहा कि विशेषज्ञों की आशंकाओं के बावजूद हम 2027 तक देश की सभी अदालतों को कंप्यूटरीकृत करना चाहते हैं। हमने जीरो एफआईआर को एक विशेष स्थान दिया है और आजादी के 75 साल बाद ऐसा पहली बार हुआ है। दुष्कर्म के आरोप में वीडियो रिकॉर्ड बयान अनिवार्य कर दिया गया है। पहली बार सामुदायिक सेवा शुरू की जा रही है। यह बहुत प्रासंगिक नहीं है लेकिन अब इसे अधिनियमित किया जाएगा ।

नहीं होगी कार्रवाई में देरी

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पुलिस अधिकारी भी अब जांच में देरी नहीं कर पाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि हमने सुनिश्चित किया है कि 90 दिनों में आरोप पत्र दायर किया जाएगा और केवल अदालत उन्हें 90 दिन और आगे बढ़ा सकती है। लेकिन 180 दिनों के भीतर पुलिस ने नए कानूनों के तहत जांच करने के लिए बाध्य होंगे।यहां तक की न्यायाधीश भी अब किसी भी दोषी के लिए अपनी सुनवाई और आदेश में देरी नहीं कर सकते हैं।

बर्दाश्त नहीं होगा महिलाओं के खिलाफ अपराध

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इन विधेयकों के तहत आतंकवाद, मॉब लिंचिंग और महिलाओं के खिलाफ अपराध के मुद्दों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इससे सख्ती से निपटा जाएगा।आईपीसी पर नया विधेयक राजद्रोह के अपराध को पूरी तरह से निरस्त कर देगा। सामूहिक बलात्कार के लिए 20 साल की सजा की गारंटी है और 18 साल से कम उम्र की किसी भी महिला के साथ बलात्कार के लिए नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से मौत की सजा सुनिश्चित की जाएगी।

 

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