बड़बोले अभिषेक बनर्जी को कोर्ट की फटकार, शुभेंदु सरकार का बुलडोजर भी तैयार

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान टीएमसी के नेताओं ने खासकर अभिषेक बनर्जी ने अपनी बोली से बीजेपी के नेताओं के प्रति बड़े आग उगले थे। तब वे इस मुगालते में थे कि उनकी पार्टी टीएमसी जीत जाएगी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इन सारी बातों पर चूना लगा देगी। लेकिन उनका यह दांव उल्टा पड़ गया और पश्चिम बंगाल में टीएमसी की जगह पर भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिल गया और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की जगह सुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बन गये। इसके बाद ममता बनर्जी के भतीजे और डायमंड हार्बर के सांसद बड़बोले अभिषेक बैनर्जी दो तरफा घेरे में आ गये। एक तरफ उनके उपर गृह मंत्री अमित शाह सू संबंधित कथित भड़काऊ बयान देने को लेकर अदालत में मामला चलने लगा तो दूसरी तरफ सुभेंदु अधिकारी उनके अवैध संपत्तियों के पता चलने की बात कह कर उन पर बुलडोजर चलाने पर आमदा हो गए हैं।

हाल में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान गृह मंत्री अमित शाह को लेकर कथित भड़काऊ और धमकी भरे बयानों को लेकर टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर एक एफआईआर (FIR) दर्ज हुई थी। इस एफआईआर को रद्द करने के लिए उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट ने उनके बयानों को “गैर-जिम्मेदाराना” और “भड़काऊ” बताते हुए कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने उनकी याचिका को तो खारिज कर दिया, लेकिन उन्हें पुलिस द्वारा कठोर कार्रवाई यानी गिरफ्तारी) से अंतरिम राहत प्रदान की है,पश्चिम बंगाल पुलिस को चुनाव रैलियों के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित टिप्पणियों के संबंध में उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने पर भी रोक लगा दी गई है।

अभिषेक बनर्जी को यह सुरक्षा 31 जुलाई तक या जब तक मामले का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक लागू रहेगी।इसके लिए उन्हें जांच में सहयोग करना होगा और बिना अदालत की अनुमति के विदेश न जाने जैसी शर्तें माननी होंगी।

गौरतलब है कि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कथित भड़काऊ भाषण देने के मामले में बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एक FIR दर्ज की गई थी।

एफआईआर के मुताबिक, यह केस 15 मई को दर्ज किया गया था।यह FIR सामाजिक कार्यकर्ता राजीव सरकार के द्वारा 5 मई को की गई शिकायत के आधार पर चुनाव नतीजों के ऐलान के ठीक एक दिन बाद दर्ज की गई थी।

राजीव सरकार ने बागूइहाटी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई और आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी ने 27 अप्रैल से 3 मई के बीच हुए कई चुनावी कार्यक्रमों के दौरान भड़काऊ बयान दिए।शिकायत में आगे आरोप लगाया गया कि इन भाषणों से दुश्मनी को बढ़ावा मिला, सार्वजनिक शांति भंग हुई और इनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सीधे तौर पर धमकियां भी दी गईं।राजीव सरकार ने शिकायत के साथ-साथ कई भाषणों के लिंक भी जमा किए थे।
अदालती कार्रवाई से इतर शुभेंदु अधिकारी की सरकार भी अभिषेक बनर्जी के पीछे पड़ गई है। एक भाषण के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि उनके हाथ अभिषेक बनर्जी के 24 अवैध संपत्तियों का विवरण हाथ लगा है और उसके विरुद्ध यह बुलडोजर की कार्रवाई करने की तैयारी में जुट गए हैं। इस सिलसिले में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने अभिषेक बनर्जी के कथित अवैध निर्माण और संपत्तियों की जांच के लिए कोलकाता नगर निगम (KMC) द्वारा नोटिस चस्पा कराए हैं। इस कार्रवाई पर शुभेंदु अधिकारी का रुख यह है कि यदि नियमों का उल्लंघन और अवैध निर्माण पाया जाता है, तो बुलडोजर जरूर चलेगा।

अभिषेक बनर्जी संपत्ति विवाद को लेकर प्रमुख घटनाक्रम निम्न लिखित हैं।
नोटिस: निगम ने दक्षिण कोलकाता के हरीश मुखर्जी रोड स्थित ‘शांतिनिकेतन’ और कालीघाट रोड स्थित संपत्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर 7 दिनों का अल्टीमेटम दिया है।
कार्रवाई का दायरा: अभिषेक बनर्जी से जुड़े 24 से अधिक ठिकानों और संपत्तियों की जांच की जा रही है। टी.एम.सी. की प्रतिक्रिया: अभिषेक बनर्जी ने इस पर पलटवार करते हुए कहा है कि चाहे जो नोटिस भेजें या घर तोड़ दें, वे इन धमकियों के आगे सिर नहीं झुकाएंगे और यह बदले की राजनीति है।

अभिषेक बैनर्जी अपने ऊपर चल रहे हैं ऐसे मामले को लेकर उसे राजनीतिक बदला करार दे रहे हैं तो वहीं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई की जगह पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार मुक्त सरकार के में एक बड़े बदलाव की कार्रवाई बता रहे हैं। ऐसे में बात अभिषेक बनर्जी की बात सही है या मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की। इसका पता तो तभी चलेगा जबकि ऐसे मामले में अभिषेक बनर्जी या तो दोषी पाए जाएंगे या दोष मुक्त। यह भी हो सकता है यह दो राजनीतिक दलों के बीच लोगों को दिखाने वाला नूरा कुश्ती साबित हो जाए, जिसमें ऊपर से तो दिखावे के लिए घात और प्रतिघात किए जाते हैं, लेकिन अंदर से सब कुछ मिला हुआ होता है।

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