बॉम्बे हाई कोर्ट ने अगस्त 2026 की हालिया सुनवाई में दिशा सालियान मामले की पुलिस जांच पर कड़े सवाल उठाए हैं और इसे “व्यर्थ (futile)” व अधूरा बताया है। सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान द्वारा स्वतंत्र और पारदर्शी जांच (CBI जांच) के लिए दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने मुंबई पुलिस की थ्योरी और कानूनी प्रक्रियाओं में कई बड़ी विसंगतियों को रेखांकित किया है।अदालत की टिप्पणियों और मामले से जुड़े मुख्य पहलू निम्नलिखित हैं:
1. पुलिस की थ्योरी और जांच पर हाई कोर्ट के मुख्य सवालFIR दर्ज न करना: कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि जब मृतका के पिता ने सामूहिक बलात्कार और हत्या की आशंका जताते हुए शिकायत दर्ज कराई थी, तो पुलिस ने FIR दर्ज क्यों नहीं की और इसे केवल ‘एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट’ (ADR) के तहत ही क्यों रखा? सुप्रीम कोर्ट के नियमों के तहत ऐसे गंभीर आरोपों पर FIR होना अनिवार्य है।
2. शारीरिक चोटों पर विसंगतियां: याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में बताया कि 14वें माले से गिरने के बाद भी दिशा का चेहरा और नाक पूरी तरह ठीक दिखे, जो कि मेडिकल दृष्टिकोण से संदेहास्पद है। कोर्ट ने भी इस पर पुलिस के दावों और पोस्टमॉर्टम रिकॉर्ड में विरोधाभास पाया।
3. लाश की स्थिति (Landing Position): कोर्ट में यह तथ्य सामने लाया गया कि वैज्ञानिक गणना के अनुसार गिरने पर शव सीधे नीचे होना चाहिए था, जबकि वह इमारत से लगभग 10 फीट दूर पाया गया।दस्तावेजों को छुपाना: कोर्ट ने इस बात पर सख्त नाराजगी जताई कि घटना के इतने साल बीत जाने के बाद भी पुलिस ने परिवार को पोस्टमॉर्टम और ADR की कॉपियां उपलब्ध नहीं कराई थीं।
4. पोस्टमॉर्टम नियमों का उल्लंघन: सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार ऐसे मामलों में दो डॉक्टरों की टीम द्वारा पोस्टमॉर्टम होना चाहिए, जबकि दिशा सालियान का पोस्टमॉर्टम केवल एक डॉक्टर द्वारा किया गया।
बॉम्बे हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच (जस्टिस सारंग कोटवाल और जस्टिस रंजीतसिम्हा भोंसले) ने तीन दिनों की लंबी बहस सुनने के बाद 28 अगस्त 2026 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट जल्द ही तय करेगा कि इस मामले की नए सिरे से या CBI के द्वारा स्वतंत्र जांच कराई जाएगी या नहीं। पुलिस द्वारा दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट पर अदालत ने असंतोष जताया और साफ कहा कि पीड़ित पिता को इस क्लोजर रिपोर्ट को अदालत में चुनौती देने का पूरा अधिकार है।
राज्य सरकार के लोक अभियोजक (Public Prosecutor) ने पुलिस जांच का बचाव किया है। उनका दावा है कि मौका-ए-वारदात के पंचनामे, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों (जैसे दिशा के मंगेतर रोहन राय) के बयानों में किसी भी तरह की गड़बड़ी या साजिश (Foul Play) के सबूत नहीं मिले हैं और यह आत्महत्या या दुर्घटना का मामला है। वहीँ इस मामले में याचिकाकर्ता की तरफ से राजनीतिक हस्तियों (जैसे आदित्य ठाकरे) के खिलाफ भी आरोप लगाए गए हैं, हालांकि आदित्य ठाकरे के वकीलों ने इसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के तहत छवि खराब करने की कोशिश बताया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी राजनीतिक आरोप में न पड़कर केवल ‘कानून की पवित्रता और निष्पक्षता’ को ध्यान में रखकर काम कर रही है।इस प्रकार, पुलिस द्वारा पूर्व में पेश की गई थ्योरी पर बॉम्बे हाई कोर्ट की टिप्पणियों के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है। कोर्ट के अंतिम फैसले से ही यह साफ होगा कि क्या इस केस की दोबारा नए सिरे से निष्पक्ष जांच शुरू होगी।

