अखिलेश अखिल
पिछले दस सालों में देश की राजनीति में जड़ जमा चुकी बीजेपी आज राहुल की सदस्यता खत्म होने पर ताली थोक रही हो लेकिन राजनीति और लोकतंत्र में कोई कोई स्थाई नहीं होता। जनता समय के मुताबिक़ अपना निर्णय देती रही है और आगे भी देती रहेगी। यही तो सच्चा जनतंत्र है। मोहिनी मंत्र से भले ही कुछ समय के लिए जनता को भटकाया जा सकता है उस पर राज किये जा सकते हैं लेकिन जब झूठ और मंत्र का नशा टूटता है तो सबकुछ झटके में बदल जाता है। जातीय राजनीति हो या फिर धार्मिक खेल वाली राजनीति ,पूंजी पर आश्रित राजनीति हो या फिर डराने वाली तानाशाही रजनीती कभी भी अक्षुण नहीं रहा करती। दुनिया के इतिहास को टटोले तो बड़े से बड़े तानाशाह और जनता के सेवक कहे जाने वाले नेता और राजा महराजा भी काल के गाल में समा गए। ताज छीन गया ,बंदी भी बनाये गए और सत्ता भी बदल गई। संसार का यही नियम आखिरी सच है। राजनीति तो बस संसार का मात्र एक छोटा खेल है।
पिछले कई दिनों से देश के भीतर जो कुछ भी हो रहा था ,राहुल की सजा और सांसदी के खात्मे के साथ ही अध्याय का खात्मा हो गया। बीजेपी में तरंग है ,तमाशा जारी है और अब नए खेल के लिए पटकथा की तैयारी है। राहुल गाँधी बीजेपी के लिए भस्मासुर दिख रहे थे बीजेपी ने ठिकाने लगा दिया। बीजेपी संसद में राहुल से माफ़ी की मांग कर रही थी। बीजेपी संसद से राहुल की बर्खस्तगी की मांग कर रही थी लेकिन शायद इससे बीजेपी की बदनामी होती ,खेल को आगे बढ़ाया गया। ममला ढूंढा गया। बीजेपी कई मसलो को दबा कर रखती है। किस मसले का उपयोग कब और कहा करना है ,बीजेपी उसका उपयोग हमेशा करती रही है। सूरत का नया खेल मौजूदा राजनीति की बानगी भर है।
अब बीजेपी ओबीसी राजनीति को धार दे रही है। बीजेपी कह रही है कि राहुल गाँधी ने एक जाती विशेष के लोगो को अपमानित किया है। इसके साथ ही बीजेपी अब खेल को पिछड़ी जातियों के अपमान से जोड़कर नया नर्तन शुरू करने को तैयार है। इस पूरी राजनीति में सच कुछ भी नहीं। झूठ का नया तड़का है। सवाल तो यही है कि क्या नीरव मोदी या फिर ललित मोदी या मोदी मोदी समाज से आते हैं ? कतई नहीं। सबकी अपनी अलग जातियां है। इसमें कोई मारवाड़ी है तो कोई और जाती से। पीलू मोदी को आप जानते ही होंगे ? वे किस जाति से थे ? नरेंद्र मोदी की जाति तेली समाज की है ? सवाल तो यह उठा था कि ये मोदी नाम वाले ही चोर क्यों है ? इसमें जाति कहा से आ गई ?लेकिन बेशर्म राजनीति जाति में ही अपना सब कुछ देखती है। और इंसान की फितरत दिखिए भले ही उसके पेट में दाना नहीं हो जाति और धर्म को पकडे वह माला जाप्ता रहता है। आगे का खेल बड़ा ही दिलचस्प होगा ,इसकी संभावना बढ़ती जा रही है। इधर कांग्रेस क्या करेगी ? उसके तो बहुत कुछ दाव पर लग गए हैं। कांग्रेस ने बहुत कुछ खो दिया है। लेकिन उसके हौसले अभी बुलंद है। बीती रात कांग्रेस की हुई बैठक में कई रोड मैप तैयार हुए है। ऊपरी तौर पर तो यही कहा जा रहा है कि कांग्रेस इस खेल में क़ानूनी और राजनीतिक लड़ाई को आगे बढ़ाएगी। लेकिन सच यही तक का नहीं है है। उसका प्लान बी भी तैयार है।
सूत्रों से मिल रही खबर के मुताबिक़ पार्टी ने तय किया है कि अगर फौरी तौर पर राहुल के मसले पर अदालत से कोई निर्णय नहीं मिलता है तो संभव है कि कांग्रेस के सभी सांसद भी इस्तीफा देकर मैदान में उतरेंगे। यह भी मौजूदा राजनीति का एक अलग सच होगा। राहुल गाँधी ने देर शाम को एक ट्वीट किया था -मैं हर कीमत चुकाने को तैयार हूँ — यह कोई मामूली शब् नहीं है। आगे की लड़ाई बड़ी होगी और कांग्रेस इसके लिए तैयार है। सोमवार से देश भर में कांग्रेस अपने अंदाज में धरना -प्रदर्शन करने जा रही है। अगर इस खेल में विपक्ष भी शामिल होती है तो खेल का आयाम और भी बड़ा होगा। राजनीति का यह तमाशा देश को कहा ले जाएगा इसकी कल्पना नहीं की जा सकती। लेकिन इतना तो तय है कि बीजेपी भी डरी हुई है। जेपीसी की मांग से वह अबतक बच रही है। क्या कोई सवाल करेगा कि अडानी के मसले पर सरकार जेपीसी की जांच क्यों नहीं करा रही ? यही पहला और अंतिम सवाल है। याद कीजिये यह जांच हो गई तो आजाद भारत का एक बड़ा खेल सामने आएगा और फिर उस खेल के परिणाम क्या होंगे इसका अनुमान लगाना भी कठिन है। बीजेपी इसी डर के साये में जी रही है। और यही कांग्रेस की बड़ी ताकत होगी। विपक्ष की ताकत होगी और यही लोकतंत्र का सबसे बड़ा सबुत भी होगा।
कांग्रेस की योजना है कि वह इस लड़ाई को बाकायदा एक आंदोलन का रूप दे, जिसे सदन के भीतर और बाहर बाकायदा सिलसिलेवार ढंग से लड़ा जाए। इसके तहत कांग्रेस ने अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन और मार्च की योजना बनाई है। रमेश ने बताया कि कांग्रेस सोमवार से देशभर में एक जन आंदोलन शुरू करेगी, जिसमें दिल्ली के साथ-साथ राज्यों से लेकर जिलों और ब्लॉक लेवल तक जन आंदोलन चलाया जाएगा। इसे लेकर जल्द ही कांग्रेस एक कमिटी बनाकर अपना आगामी टाइम टेबल बनाएगी। कांग्रेस अपने संगठन के जरिए देश भर में आंदोलन करेगी।
कांग्रेस इस मौके को अपने पक्ष में मोड़ने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस को लगता है कि भारत जोड़ो यात्रा से देश में कांग्रेस को लेकर जो एक माहौल तैयार हुआ है, इस घटनाक्रम से उसे एक नई ताकत मिलेगी। कांग्रेस इसे लोगों के बीच दिखाएगी कि राहुल गांधी देश के लोगों की आवाज उठाने और उनके जुड़े मुद्दों को सामने रखने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं। कांग्रेस संदेश देना चाहती है कि देश में प्रमुख विपक्षी दल होने के नाते कांग्रेस ही वो ताकत है, जो पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी को सीधी चुनौती दे सकती है। इतना ही नहीं, कांग्रेस अडाणी मामले को लेकर जेपीसी की मांग उठाने की बात करते हुए लगातार सरकार को घेरने की कोशिश करेगी।
कांग्रेस ने तय किया है कि वह जेपीसी सहित तमाम मुद्दों को जमीन पर लेकर जाएगी, जिससे लोगों को वह बता सके कि कैसे बेरोजगारी, महंगाई, चीन सीमा विवाद, अडाणी मुद्दे पर संसद के भीतर व बाहर सरकार को घेरने के लिए राहुल गांधी के खिलाफ यह कार्रवाई की गई। दरअसल, कांग्रेस को लग रहा है कि वह इसे आगामी राज्यों के चुनाव में मुद्दा बना सकती है। जल्द ही कर्नाटक में चुनाव होने जा रहे हैं, जहां कांग्रेस बीजेपी के सामने प्रमुख विपक्षी दल है और वह वहां लगातार बीजेपी को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेर रही है। कांग्रेस को लगता है कि वह अडाणी मुद्दे को उठाकर इस लड़ाई को आगामी चुनाव में नई धार दे सकती है। इसके अलावा, आने वाले समय में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ चुनावों में भी कांग्रेस-बीजेपी की सीधी टक्कर है। कांग्रेस राहुल का मुद्दा उठाकर इसके जरिए लोगों की सहानुभूति लेने की कोशिश करेगी।

