नारेबाजी और गुटबाजी में उल्टी हरियाणा कांग्रेस, पहली बैठक से मिल रहे संकट के संकेत

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बीरेंद्र कुमार झा

राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पहले से ही आंतरिक कलह से जूझ रहे कांग्रेस के लिए हरियाणा के हालात भी परेशानी का एक बड़ा सबक बन सकता है।खबर है कि राज्य के नए प्रभारी दीपक बावरिया की पहली ही बैठक में नेताओं के बीच की गुटबाजी खुलकर सामने आ गई। बैठक के बीच ही जहां प्रदेश कांग्रेस की पूर्व प्रमुख कुमारी शैलजा बैठक से बाहर चली गई, वही रणदीप सुरजेवाला समेत कई नेताओं के गुट अपने अपने नेता के समर्थन में नारेबाजी करते नजर आए।

गुजरात कांग्रेस के नेता बाबरिया को दिल्ली और हरियाणा का प्रभारी बनाया गया है। उन्होंने शनिवार को चंडीगढ़ में पार्टी दफ्तर में बैठक ली थी। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उनके सामने ही मंच साझा कर रहे नेता एक दूसरे की बातचीत में रोक टोक करते नजर आए। इस दौरान बावरिया ने खुद नेताओं से एकजुटता पेश करने की अपील की।

बैठक से निकली शैलजा हुड्डा की बात को किया खारिज

गौरतलब है कि कुमारी शैलजा जारी बैठक के पूरी होने से पहले ही बाहर निकल गई थी,हालांकि उन्होंने बाद में कहा कि अन्य जरूरी कामों के चलते उन्हें बाहर जाना पड़ा और पार्टी नेतृत्व को इस बारे में जानकारी दे दी गई थी।रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे और राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा की तरफ से कांग्रेस से जुड़े कुछ दस्तावेज सामने रखे गए तो कुमारी शैलजा ने इसे खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस का घोषणा पत्र नहीं है।इसे समिति की तरफ से ही तैयार किया जाना चाहिए और पार्टी की तरफ से जारी किया जाना चाहिए।

नारेबाजी का दौर

बैठक के दौरान हुड्डा और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु गुट,किरण चौधरी गुट, शैलजा गुट और सुरजेवाला गुट ने अपने अपने नेताओं के लिए जमकर नारेबाजी की। कहा जा रहा है कि नौबत यहां तक आ गई कि नारेबाजी के चलते बाबरिया को नेताओं को फटकार तक लगानी पड़ी। एक और जहां कुमारी शैलजा पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और बावरिया के लिए नारेबाजी की मांग करती हुई नजर आई तो वहीं दूसरी तरफ हुड्डा ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कांग्रेस के लिए नारे लगाने को कहा।

लंबे समय से जारी है तकरार

हरियाणा कांग्रेस ने लंबे समय से तकरार जारी है।2019 विधानसभा चुनाव में हार के बाद अशोक तंवर को हटाकर कुमारी शैलजा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। इसके बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा से उनकी तानातानी के बीच हुड्डा के ही करीबी माने जाने वाले उदयभान को हरियाणा कांग्रेस की कमान सौंपी गई।बीते साल वरिष्ठ कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई ने भी हुड्डा पर नजरअंदाज करने का आरोप लगाकर पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।विश्नोई भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे।

माना जा रहा है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समर्थन में कांग्रेस के सबसे ज्यादा विधायक हैं। ऐसे में पार्टी विधानसभा और लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें नाराज करने का जोखिम नहीं उठाना चाहेगी।

 

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