2024 के लिए विपक्ष को एकजुट करने का कांग्रेस का खाका तय,कांग्रेस विपक्षी एकता को तैयार, पर 350 से कम सीटों पर नहीं लड़ेगी चुनाव

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बीरेंद्र कुमार झा

कर्नाटक में जीत के बाद कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनावों और अगले आम चुनाव को लेकर कुछ अहम फैसले लिए हैं। इन पर पार्टी में भी सहमति बन गई है। अब बस पार्टी की संचालन समिति में मुहर लगनी है। 2024 के लिए विपक्ष को एकजुट करने का खाका तय कर लिया गया है। कांग्रेस विपक्षी एकता को तैयार है, लेकिन 350 से कम सीटों पर नहीं लड़ेगी।

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने इसकी जानकारी विपक्षी दलों को एकजुट करने में लगे मित्र दलों को भी दे दी है। इसे लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर विपक्ष को एकजुट करने की तैयारी है। इसे लेकर पहले 12 जून को पटना में बैठक रखी गई थी। हालांकि राहुल और खड़गे की अनुपलब्धता के चलते फिलहाल टाल दी गई है।

कांग्रेस खुद को 250 सीटों पर सीमित नहीं करेगी

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस खुद को 250 सीटों पर सीमित नहीं करेगी। हालांकि नीतीश और ममता बनर्जी जैसे विपक्षी एकता के पक्ष वाले नेता कांग्रेस के लिए यही संकेत दे रहे हैं। पार्टी में यह बिल्कुल स्पष्ट मत है कि विपक्षी एकता के नाम पर क्षेत्रीय दल कांग्रेस का वोट, विचार और जनाधार चाहते हैं, लेकिन उनके पास इसके बदले देने को कुछ नहीं है।

राहुल गांधी विदेश से दे रहे संदेश

राहुल गांधी ने विदेश में यही संकेत दिया है। उनका कहना है कि एकता के लिए कुछ ‘गिव एंड टेक’ करने होंगे। ऐसे में क्षेत्रीय दलों की अपील और भाजपा को हराने के लिए हर समझौते की चाहत के बावजूद कांग्रेस 350 सीटों से नीचे नहीं लड़ेगी। ये वे सीटें हैं जहां 2009 में कांग्रेस-भाजपा में सीधा मुकाबला था।

कांग्रेस के मुताबिक, 140 सीटों पर क्षेत्रीय दलों की भाजपा से सीधी टक्कर है। 2014 और 2019 में भाजपा और कांग्रेस के सीधे मुकाबले की सीटें घटकर 260 के करीब रह गई थीं, लेकिन कांग्रेस पार्टी 2009 को बेंचमार्क मान रही है। सूत्रों के मुताबकि, सीटों का बंटवारा दिसंबर के बाद हो सकता है।

वाईएसआरसी, टीडीपी, बीजद से गठबंधन संभव नहीं

भाजपा को 2024 में सत्ता से दूर रखने की चाहत के बावजूद कुछ राज्यों के समीकरण ऐसे हैं, जहां क्षेत्रीय दलों से गठबंधन संभव नहीं है। कांग्रेस इन दलों के साथ विपक्षी एकता का मंच साझा करने को तैयार है। लेकिन, चुनावी समझौते की गुंजाइश नहीं है। इनमें आंध्र में वाईएसआरसी व टीडीपी, ओडिशा में बीजद, तेलंगाना में बीआरएस, बंगाल में तृणमूल और केरल में वाममोर्चा शामिल है।

AAP को लेकर बड़ी चुनौती नजर आ रही है

पंजाब-दिल्ली में आप से गठबंधन पर कांग्रेस में ज्यादा संदेह है। पार्टी इन राज्यों में वोट घटाकर क्षेत्रीय दल को मौका नहीं देना चाहती। इस बार पंजाब में आप ने विधानसभा चुनाव जीता है। हालांकि 2019 के आम चुनाव में कांग्रेस को 40.1% और आप को 7.4% वोट मिले थे। वहीं, दिल्ली में भाजपा ने सभी 7 सीटें जीती थीं, पर कांग्रेस का वोट 22.51% और आप का 18.11% था।

सूत्रों का कहना है कि पार्टी का ध्यान फिलहाल राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, मिजोरम, तेलंगाना के इसी साल होने वाले चुनाव पर है। इस दौरान कांग्रेस विपक्षी एकता की कोशिश में सहयोगी रहेगी, लेकिन सीटों का फैसला इन चुनावों के बाद होगा।

 

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