आप का हाथ थामने को तैयार नहीं कांग्रेस ,याद दिलाया 10 साल पुराना धोखा

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बीरेंद्र कुमार झा

एक तरफ विपक्षी एकता की कोशिश हो रही तो दूसरी तरफ अध्यादेश पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के टकराव की स्थिति बनी हुई है। आम आदमी पार्टी केंद्र सरकार की ओर से लाए गए अध्यादेश के खिलाफ कांग्रेस पार्टी से समर्थन देने के लिए दवाब बना रही है तो कांग्रेस की दिल्ली इकाई लगातार पार्टी को इस पर विचार नहीं करने को कह रही है। अजय माकन , संदीप दीक्षित और अलका लंबा जैसे नेताओं के बाद अब दिल्ली के पूर्व मंत्री हारून यूसुफ ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आलोचना करते हुए उन पर धोखा देने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस के पूर्व मंत्री ने केजरीवाल पर अध्यादेश के बहाने बड़ा खेल करने का लगाया आरोप

हारून ने कहा कि केजरीवाल अध्यादेश के मुद्दे पर एक बार फिर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं, जैसा कि उन्होंने 2013 में लोकपाल के नाम पर किया था। शीला दीक्षित सरकार में मंत्री रहे यूसुफ ने कहा कि केजरीवाल ने सरकार बनाने के लिए कांग्रेस से लोकपाल के नाम पर समर्थन लिया और फिर वादा पूरा नहीं किया।

एक दिन पहले ही अजय माकन ने आम आदमी पार्टी से दोस्ती को खुदकुशी जैसा बताया।उन्होंने कहा कि यदि हम खुद किसी ही कर लेंगे तो मोहब्बत की दुकान कैसे चला पाएंगे ।अब यूसुफ ने केजरीवाल पर जमकर प्रहार किया है। उन्होंने 2013 में कांग्रेस के समर्थन से बनी आम आदमी पार्टी की सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि केजरीवाल जो आज कर रहे हैं, उसमें कुछ भी नया नहीं है। 2013 के चुनाव के बाद भी उन्होंने ऐसा ही किया था जब मैं सीएलपी नेता था ।उन्होंने लोकपाल बिल पास कराने के लिए सरकार बनाने की बात कही थी और इसके लिए हमसे समर्थन मांगा। हमारे नेताओं का उपहास करने के बावजूद हमने दिल्ली की भलाई के लिए उनका समर्थन किया। बाद में क्या हुआ यह हम सब जानते हैं। उन्होंने लोकपाल बिल पास किए बिना ही 49 दिन बाद सरकार भंग कर दी।

दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच लंबे समय से अफसरों के ट्रांसफर पोस्टिंग के अधिकार को लेकर जंग चल रही है ।हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को सेवाओं पर अधिकार (पुलिस , लैंड और पब्लिक ऑर्डर को छोड़कर)दिया तो केंद्र सरकार ने एक अध्यादेश लाकर इस फैसले को निष्प्रभावी कर दिया। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि केजरीवाल अध्यादेश का इस्तेमाल करके खुद को राष्ट्रीय नेता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। केजरीवाल न सिर्फ खुद को राष्ट्रीय नेता के रूप में पेश करने के लिए इस अध्यादेश का उपयोग कर रहे हैं,बल्कि वे उसका इस्तेमाल कांग्रेस की बाहें मरोड़ने के लिए भी कर रहे हैं।

कांग्रेस केजरीवाल को अध्यादेश मुद्दे पर बातचीत के लिए नही दे रहा वक्त

पिछले महीने केजरीवाल ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात के लिए समय की भी मांग की थी, जिस पर अभी तक कांग्रेस ने प्रतिक्रिया नहीं दी है। 23 जून को पटना में केजरीवाल का सामना मॉल8कर्जन खड़गे और राहुल गांधी से जरूर हुआ,लेकिन यहां भी अध्यादेश को लेकर कोई तारीख कांग्रेस ने केजरीवाल को नहीं दिया। बैठक से पहले और बैठक के दौरान भी आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस पर दबाव बनाकर अध्यादेश पर रुख स्पष्ट करने को कहा, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा इस पर पार्टी कोई भी फैसला मानसून सत्र के दौरान ही लेगी।इसपर आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता ने कांग्रेस और बीजेपी में उसे लेकर डील होने तक का आरोप लगा दिया।

 

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