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आखिर पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव में कांग्रेस हार कर भी क्यों उत्साहित है ?

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न्यूज़ डेस्क 

पश्चिम बंगाल के कांग्रेस नेता इन दिनों काफी उत्साहित हैं। यह बात और है कि अभी हालिया पंचायत चुनाव में पार्टी की बड़ी हार हुई है लेकिन कांग्रेस के नेताओं का उत्साह चरम पर है। कांग्रसी अब कहते सुने जा रहे हैं कि हम भले ही पंचायत चुनाव में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाए लेकिन जस लिहाज से कांग्रेस का वोट प्रतिशत बढ़ा है अगर माहौल यही रहा तो आगामी लोकसभा चुनाव में उसे अच्छी सीट मिल सकती है। कई कांग्रेस नेता यह भी कह रहे हैं कि लोकसभा चुनाव में पार्टी को चार से पांच सीटों पर जीत हासिल हो सकती है।  
   पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव में टीएमसी को बड़ी जीत हासिल हुई है। टीएमसी को करीब 52 फीसदी वोट मिले हैं। दूसरी बड़ी पार्टी के रूप में बीजेपी सामने आयी है उसे करीब 23  फीसदी वोट मिले हैं। सीपीएम को करीब 13 फीसदी और कांग्रेस को करीब 7 फीसदी वोट मिले हैं। इंडियन सेक्युलर फ्रंट को करीब दो फीसदी वोट मिले हैं। लेकिन सबसे ज्यादा खुश कांग्रेस पार्टी है। बंगाल में कांग्रेस जीवित हो रही है और आने वाले दिनों में इसका असर और बढ़ेगा इसको लेकर कांग्रेस में काफी उत्साह है।            
  पार्टी के एक सूत्र ने कहा कि पिछले चुनाव की तुलना में राज्य में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर हुआ है। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने दो फीसदी वोट हासिल किए और इस बार के पंचायत चुनाव में पार्टी के मत प्रतिशत में चार फीसदी से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। यह कांग्रेस के लिए एक सकारात्मक संकेत है। सूत्र ने माना कि 2021 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को सबसे खराब नतीजों में से एक मिला था। विधानसभा चुनावों में पार्टी एक सीट भी नहीं जीत सकी थी। लेकिन, पंचायत चुनावों के नतीजों में पार्टी का वोट शेयर बढ़ा है।              सूत्र ने यह भी स्वीकार किया कि 42 वर्षों से अधिक समय तक राज्य में नहीं रहने के बावजूद कांग्रेस अपने प्रदर्शन में सुधार कर रही है। वहीं, केंद्रीय नेतृत्व और राज्य स्तर के नेताओं के बीच कोई मतभेद नहीं है। पंचायत चुनावों में पार्टी ने 63,229 सीटों में से 3,000 से अधिक सीटें जीतीं।
                राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में अच्छा प्रदर्शन नहीं करने का कारण बताते हुए सूत्र ने कहा कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो ध्रुवों के बीच थे। जिससे भाजपा को दूसरी सबसे बड़ी पार्टी का स्थान हासिल करने में मदद मिली। भाजपा कुल 294 सीटों में से 77 सीटें जीतने में सफल रही। जबकि, विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीटें जीती थीं।
                    2016 के विधानसभा चुनाव में 44 सीटें जीतने वाली कांग्रेस 2021 में वाम दलों के साथ अपना खाता भी नहीं खोल सकी। राज्य में 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 2.94 फीसदी वोट हासिल करने में सफल रही। वाम दलों को 4.72 प्रतिशत वोट शेयर मिले।
                 सूत्र ने कहा कि पार्टी को उम्मीद है कि वह अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में राज्य में मजबूत वापसी करेगी, भले ही उसका किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन न हो। सूत्र ने बताया कि 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के कारण तृणमूल कांग्रेस को 6 सीटों का नुकसान हुआ, जिसमें मालदा उत्तर और जादवपुर की सीटें भी शामिल थीं। सूत्र ने कहा कि 2021 के विधानसभा चुनावों में खराब नतीजों ने कांग्रेस को बैकफुट पर नहीं धकेला है और वह 2024 के लोकसभा चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए उत्सुक है। 

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