ममता को मनाने की कोशिश, कांग्रेस ने फिर शुरू की टीएमसी के साथ सीट शेयरिंग पर बात

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अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के साथ सीट शेयरिंग का मुद्दा सुलझाने के बाद अब कांग्रेस की नजर पश्चिम बंगाल पर हैं। कांग्रेस ने ममता बनर्जी के लिए एक नया फॉर्म्युला तैयार किया है।सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कांग्रेस पार्टी को इस फार्मूले के अनुसार बंगाल की 42 सीटों में से 5 सीटें मिलने की उम्मीद है।इसके बदले में कांग्रेस को टीएमसी के लिए असम की दो और मेघालय की एक सीट छोड़ना पड़ सकता है।

टीएमसी के साथ फिर हुई बातचीत की शुरूआत

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार कांग्रेस और टीएमसी के बीच सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत एक बार फिर से शुरू हो गई है और यह सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है सीट शेयरिंग को लेकर अगर सहमति बनती है तो जल्दी ही इसकी घोषणा की जाएगी कांग्रेस पार्टी अभी भी बंगाल में एक और सीट के लिए जोर लगा रही है जबकि ट्रेन मूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इससे पहले बंगाल में कांग्रेस को सिर्फ दो सिम देने की पेशकश की थी।

कैसे अटकी थी सीट शेयरिंग की बात

कांग्रेस पार्टी ने टीएमसी के साथ सीट शेयरिंग पर जब बातचीत शुरू की थी तब यह14 सीटों पर दावा कर रही थी। धीरे-धीरे उसका यह आंकड़ा कम होता गया। इसके बाद कांग्रेस 6 सीटों की जीद पर आ गई। इसके बाद ममता बनर्जी ने स्पष्ट शब्दों में कांग्रेस से कहा था कि वह ज्यादा आगे न बढ़े।

मालदा में एक रैली के दौरान ममता बनर्जी ने कहा था कि मैंने कांग्रेस से कहा है कि आपके पास यहां एक भी विधायक नहीं है।दो एमपी सीटों की पेशकश कर रही हूं।हम उन दो सीटों पर आपकी जीत सुनिश्चित करेंगे। लेकिन कांग्रेस ने कहा कि उन्हें और सीटें चाहिए तो मैंने साफ कह दिया है कि में कांग्रेस को अब मैं एक भी सीट नहीं देने जा रही हूं।

कांग्रेस अब उन सीटों को तृणमूल से मांग रही है जो है बीजेपी के पास

कांग्रेस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कांग्रेस टीएमसी के साथ अब उन सीटों पर समझौता करने की उम्मीद कर रही है, जो वर्तमान में बीजेपी के पास है। इनमें से एक बीजेपी के गढ़ उत्तर बंगाल में हैं। कांग्रेस जिन सीटों पर लड़ना चाहती है वे सीटें हैं बहरामपुर, मालदा दक्षिण, मालदा उत्तर ,रायगंज और दार्जिलिंग। कांग्रेस वैसे तो पुरलिया सीट भी चाहती है। लेकिन टीएमसी इसे कांग्रेस को देगी इसकी संभावना बिल्कुल कम है।पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस अपने केंद्रीय नेतृत्व की हस्तक्षेप से ठंडा बस्ती में पड़े सीट शेयरिंग बातचीत को तेजी से अंतिम रूप देने में लगी हुई है।

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