बीजेपी और वाईएसआर कांग्रेस के बीच पक रही खिचड़ी, जगनमोहन रेड्डी ने खुद ही बढ़ाया मदद का हाथ

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बीरेंद्र कुमार झा

संसद के मानसून सत्र से पहले जैसे ही 26 जनों का विपक्षी गठबंधन ‘ इंडिया’ बना और बीजेपी ने एनडीए के 38 दलों के कुनबे की मीटिंग बुलाई तो कई क्षेत्रीय दलों ने दोनों गठबंधन ओं से खुद को अलग रखा। लेकिन 10 दिनों के अंदर ही दक्षिण में सियासी समीकरण और वहां की भावी तस्वीर बदली बदली हुई दिखने लगी है। दिल्ली अध्यादेश के मुद्दे पर राज्यसभा में कमजोर दिख रही बीजेपी का साथ देने के लिए आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस ने खुद ही अपना हाथ बढ़ा दिया है तो दूसरी तरफ केसीआर मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर कांग्रेस के साथ खड़ी दिख रही है।

वाईएसआर कांग्रेस चीफ और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी ने कहा है कि राज्यसभा में उनकी पार्टी दिल्ली अध्यादेश पर केंद्र का साथ देगी। राज्यसभा में उनकी पार्टी के 9 सांसद हैं जबकि एनडीए के पास 101 और विपक्षी गठबंधन के पास एक सौ सांसद हैं। जेडीयू ने इस बीच अपने सांसद और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को भी व्हिप जारी किया है। अविश्वास प्रस्ताव पर भी वाईएसआर कांग्रेस मोदी सरकार का साथ दे सकती है उसके पास 22 सांसद हैं।

बीजेपी और वाईएसआर कांग्रेस में पक रही गुप्त खिचड़ी

18 जुलाई को जब दिल्ली में एनडीए की 38 घटक दलों की मीटिंग बुलाई गई थी, तबी यह संभावना जताई जा रही थी कि बीजेपी दक्षिण की दो पार्टियों को इसमें शामिल होने का न्योता भेजेगी। इनमें से एक कर्नाटक के जेडीएस थी जिसके साथ बीजेपी पहले भी चुनाव लड़ चुकी है और कर्नाटक में सरकार बना चुकी है और दूसरी तरफ आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी थी जो पहले भी एनडीए गठबंधन में शामिल रह चुकी है।

2019 के लोकसभा चुनाव से1 साल पहले ही आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिए जाने पर चंद्रबाबू नायडू ने एनडीए से नाता तोड़ लिया था और 2018 में मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया था।लेकिन 5 साल बाद उसी टीडीपी ने अपने रुख में बदलाव लाते हुए फिर से बीजेपी से नजदीकियां बढ़ाना शुरू कर दिया था। ऐसा लग रहा था कि टीडीपी एनडीए में लौटाने वाली है।लेकिन जेपी नड्डा ने दोनों ही पार्टियों को न्योता ना भेजकर उनके सपनों पर पानी फेर दिया है। अब लगता है कि बीजेपी और वाईएसआर कांग्रेस के बीच खिचड़ी पक रही है।

जगन मोहन रेड्डी का इरादा

जगन मोहन रेड्डी बीजेपी से कोई दोस्ती किए बिना ही अपनी शर्तों पर मुद्दों के आधार पर केंद्र की बीजेपी सरकार को समर्थन देते आ रहे हैं। चाही वह राष्ट्रपति के चुनाव का मामला हो या फिर पिछले अविश्वास प्रस्ताव का मामला। जगनमोहन रेड्डी चाहते हैं वह चुपचाप केंद्र को समर्थन देते रहे हैं और बदले में केंद्र सरकार से आर्थिक मोर्चे पर सहयोग करती रहे।

बीजेपी की योजना

बीजेपी भी चाहती है उसे दक्षिण में कोई मजबूत साथी मिले, जिसके दम पर वह दक्षिण में विस्तार कर सके ।कर्नाटक को छोड़ दें तो दक्षिण के बाकी राज्यों में बीजेपी के लिए सत्ता पाना तो दूर अच्छी संख्या में प्रतिनिधि जुटाना भी फिलहाल काफी मुश्किल लगती है। इसलिए बीजेपी आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में वाईएसआर कांग्रेस को एक भरोसेमंद और मजबूत साथी के विकल्प के रूप में देख रही है।

हाल के दिनों में मजबूत हुए कांग्रेस की वजह से बीजेपी को दक्षिण में मजबूत साथी की जरूरत

हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक के चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद और हालिया राजनीतिक घटनाक्रम से दक्षिण में कांग्रेस में भी जान आई है। ऐसे में कांग्रेस टीडीपी और केसीआर की पार्टी बीआरएस से मुकाबला करने के लिए अगर जगन मोहन रेड्डी और बीजेपी दोस्ती करते हैं तो दोनों दलों के लिए यह जीत की संभावना बन सकती है।

बीजेपी जनसेना में पहले से गठबंधन

हालांकि आंध्र प्रदेश में बीजेपी और जनसेना (एक्टर पवन कल्याण की पार्टी) का एक गठबंधन है और वे आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव साथ साथ लड़ने का ऐलान कर चुके हैं, लेकिन जब से डी पुरंदेश्वरी को राज्य इकाई का चीफ बनाया है तब से समीकरण में गांठ के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं।

बीजेपी का अगला मिशन

जगनमोहन जैसे साथी को लेकर बीजेपी दक्षिण के अन्य राज्यों तेलंगाना और तमिलनाडु में भी आक्रामक होना चाहती है। तमिलनाडु में वह पहले से ही एआईएडीएमके के साथ गठबंधन में है।गौरतलब है कि तेलंगाना में इसी साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने वाला है जबकि अगले साल लोकसभा चुनाव के साथ ही आंध्र प्रदेश में विधानसभा का चुनाव होना है। बीजेपी ने हाल के दिनों में दक्षिण में अपनी आक्रामकता को धार दिया है।लिहाजा उसे वह परिणामों में बदलते हुए देखने को बेकरार है।

किसकी कितनी ताकत

चुनावी आंकड़ों पर बात करें तो 2019 के चुनाव में आंध्र प्रदेश की 25 लोकसभा सीटों में से 22 पर जगन मोहन रेड्डी की पार्टी ने जीत दर्ज की थी जबकि सिर्फ 3 सीटों पर चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी को जीत मिली थी। वाईएसआर कांग्रेस को 47.15 % जबकि टीडीपी 44.58 %, वोट मिले थे। इसके अलावा कांग्रेस को 1.29% और बीजेपी को महज 0.96% वोट ही मिले थे ।ऐसे में बीजेपी एक मजबूत और युवा साथी के साथ दोस्ती पक्का करना चाहती हैं।

 

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