करवट ले रही महाराष्ट्र की राजनीति ,बढ़ रही सीएम शिंदे की मुश्किलें !

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न्यूज़ डेस्क 

महाराष्ट्र की राजनीति धीरे -धीरे करवट ले रही है। अभी तक की राजनीति यही थी कि सूबे की दो बड़ी पार्टी की टूट हुई। यह टूट कल्पना से भी पड़े है। शिवसेना में टूट हो सकती है ,इसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। लेकिन यह सब हुआ। लगे हाथ एनसीपी भी टूट गई। चाचा -भतीजा अलग हो गए। भतीजे ने चाचा को सबक सिखाया। अब चाचा जनता के बीच है। अंजाम क्या होगा यह देखना बाकी है।  
  इधर शिंदे सरकार के भीतर मंत्रिमंडल विस्तार की कहानी चल रही है। चार मंत्री शिंदे गुट से और चार मंत्री बीजेपी से बनाये जाने की बात सामने आयी है। अजित पवार गुट से दो विधायक को मंत्री बनाया जायेगा। यानी दस लोगों को मंत्रिमंडल में शामिल होने की बात है। अब यही से अगली राजनीति शुरू होती है। शिंदे गुट से दस विधायक पहले ही मंत्री बने हुए हैं और फिर से चार मंत्री बनते हैं तो शिंदे गुट का कोटा 14 हो जाता है। लेकिन वहां तो कई और विधायक मंत्री बनने के आस में बैठे हैं। असली खेल तो तब शुरू होगा जब बाकी विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया जायेगा। इसके साथ ही शिंदे के साथ दस निर्दलीय विधायक भी हैं। पिछले एमवीए सरकार में इनमे से कई मंत्री बने हुए थे। मंत्री बनने की चाहत लिए ये शिंदे गुट के साथ आये थे। ये निर्दलीय विधायक न बीजेपी और न ही शिवसेना के नजदीक हैं। कांग्रेस और एनसीपी वालों से तो  रिश्ता है ही नहीं। लेकिन जबसे अजित पवार की इंट्री मंत्रिमंडल में हुई है ये निर्दलीय विधायक काफी असहज हो गए हैं।    
  अब इन दस निर्दलीय विधायकों ने कहा है कि  होने के लिए जिस तरह के खींचतान चल रही है उसे देखते हुए अब वे मंत्री बनने का कोई दावा नहीं कर रहे हैं। इन विधायकों ने सीएम शिंदे का बता दिया है कि अब उनका कोई दावा नहीं है ,हमारी कोई इच्छा भी नहीं है। लेकिन हम जल्द ही अगला निर्णय लेंगे। प्रहार जनशक्ति पार्टी के प्रमुख और पूर्व मंत्री ओमप्रकाश बी. उर्फ बच्चू कडू के नेतृत्व वाले निर्दलियों ने कहा कि वे कैबिनेट पदों के लिए चल रही मांग से हतोत्साहित हैं, खासकर डिप्टी सीएम अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सरकार में शामिल होने से। अब इसके क्या मायने हैं इसको लेकर कई तरह की बातें की जा रही है।                
     कडू ने घोषणा की, ‘हमने फैसला किया है कि हम कैबिनेट पद के लिए जोर नहीं देंगे, क्योंकि हम इस पर सीएम को और परेशान नहीं करना चाहते।  हम आज अपना दावा छोड़ने की योजना बना रहे हैं।  लेकिन सीएम ने हमें 17 जुलाई को एक बैठक के लिए बुलाया और हम अगले दिन अपनी योजनाओं की घोषणा करेंगे। उन्होंने पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी)-कांग्रेस-एनसीपी की पिछली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार का जिक्र किया।
                     बच्चू कडू ने ठाकरे के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, ‘उनके अनुरोध और हमें कैबिनेट में प्रतिनिधित्व देने के आश्वासन के बाद हम एमवीए में शामिल हुए थे। उन्होंने अपना वादा निभाया और मुझे मंत्री बनाया गया।’ हालांकि, अचलपुर (अकोला) के विधायक ने कहा कि एमवीए विकलांगता कल्याण के लिए अलग मंत्रालय बनाने में विफल रही, लेकिन शिंदे के नेतृत्व वाली अगली सरकार ने ऐसा किया। कडू ने कहा, ‘अगर एमवीए ने निर्णय लिया होता, तो हम छोड़कर शिंदे के साथ नहीं जुड़ते। अब महाराष्ट्र देश का पहला राज्य है, जहां विकलांगों के लिए समर्पित मंत्रालय है। हम इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए हमेशा शिंदे के आभारी हैं।’      
 लेकिन इसके आगे कुडू ने जो कहा काफी अहम् है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में महाराष्ट्र की राजनीति दोराहे पर खड़ी है। आज के माहौल में कई लोग ठगे हुए महसूस कर रहे हैं। कई विधायक काफी परेशान है। उनकी राजनीति  दाव पर लग गई है। अब बहुत से विधायकों का भरोसा हिल सा गया है और घुटन भी महसूस हो रहा है। जाहिर है सब लोग अपने भविष्य के बारे में सोचेंगे।  
    जाहिर है महाराष्ट्र में जो कुछ भी हुआ है उससे राजनीति बदनाम हुई है और नेताओं के प्रति जनता का विश्वास भी हिल गया है। सोमवार को सीएम शिंदे के साथ इन विधायकों की बैठक होगी। इस बैठक के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में फिर से कुछ बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। अगर शिंदे के गुट से निकल कर कुछ विधायक शिवसेना के साथ चले जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। 

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