चीन वर्तमान में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अपनी आक्रामक गतिविधियों, बुनियादी ढांचे के तेजी से विकास और कूटनीतिक दबाव के जरिए भारत को परेशान कर रहा है। अक्टूबर 2026 में सामने आई आधिकारिक रिपोर्टों और सुरक्षा अधिकारियों के बयानों के अनुसार, चीन मुख्य रूप से पूर्वी सेक्टर (अरुणाचल प्रदेश) और पश्चिमी सेक्टर (लद्दाख) दोनों तरफ से भारत के लिए चुनौतियां खड़ी कर रहा है।
चीन जिन मुख्य तरीकों से भारत को परेशान कर रहा है, वे निम्नलिखित हैं:
अरुणाचल प्रदेश सीमा पर ताज़ा आमना-सामना (Face-offs):हाल ही में (अक्टूबर 2026 में) भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक ने पुष्टि की है कि अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों पर चीनी सैनिकों (PLA) के साथ आमना-सामना (Face-offs) की स्थिति बनी हुई है। विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी (Taksing क्षेत्र) में चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों की पारंपरिक पेट्रोलिंग (गश्त) को रोकने और वहां तंबू गाड़ने की कोशिशें की हैं, जिससे सीमा पर तनाव फिर से बढ़ गया है।
मॉडल गांवों और सैन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण:चीन एलएसी के बिल्कुल करीब ‘झियाओकांग’ (Xiaokang) यानी आधुनिक मॉडल गांवों का तेजी से निर्माण कर रहा है। इन गांवों में नागरिकों को बसाने के बहाने चीन वहां अपनी सेना (PLA) के लिए स्थायी चौकियां, बंकर, हेलीपैड और अंडरग्राउंड शेल्टर बना रहा है। इसके जरिए वह विवादित क्षेत्रों पर अपना दावा मजबूत करना चाहता है।
भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर को रोकने के लिए नई चालें :भारत भी चीन को टक्कर देने के लिए सीमा पर सड़कों और सुरंगों (जैसे सेला टनल) का जाल बिछा रहा है। इसे धीमा करने के लिए चीन ने अक्टूबर 2026 में ‘टनल बोरिंग मशीनों’ (TBMs) और संबंधित उपकरणों के निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। चूंकि भारत पहाड़ों को काटने के लिए कुछ हद तक इस चीनी तकनीक पर निर्भर रहा है, इसलिए चीन इस तकनीकी बढ़त का इस्तेमाल भारत के रणनीतिक सीमा प्रोजेक्ट्स को रोकने के लिए कर रहा है।
कूटनीतिक और मनोवैज्ञानिक दबाव: चीन कूटनीतिक स्तर पर भी भारत को परेशान करता रहता है। वह अरुणाचल प्रदेश के भारतीय क्षेत्रों के नाम बदलकर उन्हें चीनी नाम देने की अवैध कोशिशें करता रहा है, जिसे भारत हमेशा पूरी तरह खारिज करता आया है। इसके अलावा, बातचीत की मेज पर चीन एलएसी के निर्धारण को जानबूझकर स्पष्ट नहीं करता ताकि सीमा पर अस्पष्टता बनी रहे और वह जब चाहे घुसपैठ की कोशिश कर सके।
आधुनिक युद्ध तकनीकों का इस्तेमाल:चीन सीमा पर पारंपरिक हथियारों के बजाय ड्रोन, सर्विलांस कैमरों और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (ई-वॉरफेयर) उपकरणों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है। वह भारतीय सैनिकों की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नज़र रखने के लिए एलएसी के पास बड़े-बड़े रडार और जासूसी उपकरण स्थापित कर रहा है।
चीन के इस रुख पर भारत भी निम्नलिखित रुप से उसे करारा जवाब दे रही है:
चीन की इन हरकतों का सामना करने के लिए भारतीय सेना और आईटीबीपी पूरी तरह मुस्तैद है। भारत ने भी सीमा पर ‘अरुणाचल फ्रंटियर हाईवे’ का निर्माण तेज कर दिया है, अग्रिम चौकियों पर सैनिकों की तैनाती बढ़ाई है और चीन के साथ सैन्य व राजनयिक स्तर (जैसे कॉर्प्स कमांडर मीटिंग्स) पर लगातार बातचीत के जरिए इन विवादों को सुलझाने का प्रयास कर रहा है ताकि किसी भी बड़े टकराव को रोका जा सके।
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम: यह भारत सरकार की एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना है, जिसे विशेष रूप से चीन की ‘मॉडल विलेज’ (झियाओकांग) नीति को टक्कर देने के लिए शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य भारत के उत्तरी सीमावर्ती गांवों का समग्र विकास करना है, ताकि वहां से लोगों का पलायन रुके और देश की सुरक्षा मजबूत हो सके।
भारत के सीमावर्ती युवाओं और गांवों को सशक्त बनाने के लिए चलाया जा रहा यह विशेष अभियान देश की पहली रक्षा पंक्ति को मजबूत कर रहा है:
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की मुख्य बातें:देश का ‘पहला गांव’: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच के अनुसार, इन सीमावर्ती गांवों को अब ‘आर्थिक या भौगोलिक रूप से आखिरी गांव’ नहीं, बल्कि देश का ‘पहला गांव’ माना जाता है। इस कार्यक्रम की आधिकारिक शुरुआत अप्रैल 2023 में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा अरुणाचल प्रदेश के सुदूर सीमावर्ती गांव किबिथू से की गई थी।
रणनीतिक कवरेज: यह योजना भारत के 4 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश (अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और लद्दाख) के 19 जिलों के 46 बॉर्डर ब्लॉकों को कवर करती है। प्रथम चरण में बुनियादी विकास के लिए 662 सीमावर्ती गांवों की पहचान की गई है।
अरुणाचल प्रदेश पर विशेष ध्यान: चीन की बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए कुल चिह्नित गांवों में से 455 गांव अकेले अरुणाचल प्रदेश में हैं। भारत सरकार ने यहां कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए लगभग ₹2,361 करोड़ की लागत से 1,022 किलोमीटर लंबी सड़कों और 27 बड़े पुलों (Long Span Bridges) के निर्माण को मंजूरी दी है।
सीमा पर भारत के अन्य बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (2026 की स्थिति):चीन के दबाव को बेअसर करने के लिए भारत ऑल-वेदर (हर मौसम में खुली रहने वाली) कनेक्टिविटी पर निम्नलिखित रूप से काम कर रहा है
सुरंगों का जाल :अरुणाचल प्रदेश में सेला टनल के बाद अब कश्मीर और लद्दाख को जोड़ने वाली रणनीतिक ज़ोजिला टनल का ब्रेकथ्रू जून 2026 में सफलतापूर्वक कर लिया गया है। इसके अलावा ज़ांस्कर मार्ग पर 4,800 मीटर की ऊंचाई पर शिंकु ला टनल (Shinku La) का निर्माण तेजी से जारी है।
अग्रिम हवाई पट्टियां : लद्दाख के न्योमा और दौलत बेग ओल्डी जैसे क्षेत्रों में लड़ाकू विमानों के लिए एयरबेस और एडवांस लैंडिंग ग्राउंड्स को अपग्रेड किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में सेना तुरंत भारी टैंक और सैनिक पहुंचा सके।
इस प्रकार, भारत केवल सैन्य चौकियों के दम पर नहीं, बल्कि सीमा पर रहने वाले नागरिकों को आत्मनिर्भर और बुनियादी रूप से मजबूत बनाकर चीन की हरकतों का करारा जवाब दे रहा है।

