चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले में गुरुवार शाम निर्माणाधीन सुरंग में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। विष्णुगाड़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की सुरंग में अचानक मलबा और पानी भरने के बाद कई श्रमिक अंदर फंस गए। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के मुताबिक हादसे में 9 श्रमिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 6 अन्य की तलाश जारी है।
हादसे के बाद सुरंग के भीतर राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया, लेकिन भारी दलदल, पानी और ऑक्सीजन की कमी ने बचाव दल के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। रात में अभियान रोकना पड़ा और शुक्रवार सुबह इसे दोबारा शुरू करने की तैयारी की गई। एनडीआरएफ अधिकारियों के मुताबिक लापता श्रमिकों तक पहुंचने के लिए ऑपरेशन लगातार जारी रखा जाएगा।
शाम करीब 7 बजे हुआ हादसा, अचानक सुरंग में घुसा मलबा-पानी
घटना 13 अगस्त की शाम करीब पौने सात बजे के आसपास हुई। उस समय निर्माणाधीन सुरंग के भीतर बड़ी संख्या में श्रमिक काम कर रहे थे। अचानक भूस्खलन के बाद सुरंग के हिस्से में मलबा और पानी पहुंच गया, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई और कई कर्मचारी फंस गए। प्रारंभिक रिपोर्टों के मुताबिक सुरंग में अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव पहुंचने से श्रमिकों को संभलने का पर्याप्त मौका नहीं मिला।
बताया जा रहा है कि हादसा परियोजना की लंबी निर्माणाधीन सुरंग के अंदर हुआ। राहत टीमों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर फंसे लोगों को निकालने का अभियान शुरू किया।
9 की मौत, 6 की तलाश जारी
हादसे में अब तक 9 श्रमिकों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं छह श्रमिकों का अभी पता नहीं चल पाया है और उन्हें खोजने के लिए अभियान जारी है। कई श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है। घायलों का इलाज गोपेश्वर, श्रीनगर और पीपलकोटी के अस्पतालों में चल रहा है। एक घायल को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी भी दी गई है।
रेस्क्यू टीमों के लिए सबसे बड़ी मुश्किल सुरंग के अंदर जमा पानी, गाद और दलदल बनी हुई है। इसके अलावा ऑक्सीजन का स्तर कम होने के कारण भी अभियान को सावधानी से आगे बढ़ाना पड़ रहा है।
रात में क्यों रोकना पड़ा रेस्क्यू?
बचाव अभियान के दौरान सुरंग के भीतर पानी और दलदल की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई। ऑक्सीजन की कमी ने भी बचावकर्मियों की मुश्किल बढ़ा दी। इन परिस्थितियों में रात के समय ऑपरेशन को रोकना पड़ा।
एनडीआरएफ के असिस्टेंट कमांडेंट आलोक जायरा के मुताबिक बचाव अभियान को परिस्थितियों के अनुसार आगे बढ़ाया जाएगा और लापता श्रमिकों की तलाश जारी रहेगी।
444 मेगावाट की परियोजना, 70 फीसदी काम पूरा
विष्णुगाड़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना 444 मेगावाट क्षमता की है। परियोजना का निर्माण अलकनंदा नदी पर किया जा रहा है और इसका बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार परियोजना का करीब 70 फीसदी काम पूरा हो चुका था। हादसा निर्माणाधीन सुरंग के भीतर हुआ, जहां उस समय श्रमिक निर्माण संबंधी काम में जुटे थे।
पहाड़ में बारिश के बीच बढ़ी चुनौती
उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में इन दिनों बारिश का दौर जारी है। ऐसे मौसम में पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और अचानक मलबा आने का खतरा बढ़ जाता है। चमोली हादसे के बाद राहत एजेंसियों के सामने मौसम और सुरंग के भीतर की मुश्किल परिस्थितियों से निपटने की दोहरी चुनौती है। फिलहाल प्राथमिकता सुरंग में फंसे छह श्रमिकों का पता लगाकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है।

