झारखंड में अब तक नहीं बना पेसा कानून, केंद्र ने दी पैसा रोकने की चेतावनी

0
130

बीरेंद्र कुमार झा

झारखंड में अब तक पेसा कानून नहीं बना है। पेसा एक्ट 1996 के अनुसार जनजातीय बहुल राज्यों को इससे संबंधित कानून बनाना है।झारखंड और उड़ीसा में अब तक यह कानून नहीं बना है। इस पर भारत सरकार ने नाराजगी जताई है। भारत सरकार के पंचायती राज विभाग के सचिव ने राज्य सरकार को कहा है कि अगर कानून नहीं बना तो, केंद्र आर्थिक सहयोग रोक सकती है। पेसा एक्ट के तहत लागू प्रावधानों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार आर्थिक सहयोग करती है। इसके लिए सभी राज्यों का अपना अपना कानून होना जरूरी है।वित्त आयोग का पैसा लेने के लिए राज्यों को पेसा कानून लागू करना जरूरी है। झारखंड में पांचवी अनुसूची के अंतर्गत 16 जिले आते हैं।राज्य को इसके विकास के लिए वित्त आयोग से करीब 1300 से ₹1400 करोड़ मिलते हैं।

ग्रामसभा को सशक्त करने के लिए है पेसा कानून

ऐसा कानून ग्रामसभा को सख्त करने के लिए है। इसके तहत जमीन हस्तांतरण सहित कई तरह के अधिकार ग्राम सभा को देने होंगे। पांचवी और छठी अनुसूची में शामिल राज्यों को 1997 से पूर्व पेसा कानून बनना था। झारखंड और छत्तीसगढ़ का गठन इसके बाद हुआ था। इस कारण यहां नए सिरे से कानून बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। आंध्र प्रदेश हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र ,गुजरात, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों ने पेसा एक्ट बना लिया है।

16 जिलों के 135 ब्लॉक है अनुसूची 5 में

झारखंड में 16 जिलों के 135 ब्लॉक अनुसूची 5 के अंतर्गत आते हैं। इसमें करीब 2066 ग्राम पंचायत तथा 16028 ग्रामसभा है।सबसे अधिक 18 अट्ठारह प्रखंड रांची और पश्चिम सिंहभूम जिला में है।पलामू जिले में भी 2 पंचायतों में पेशा कानून लागू करना है।रांची जिला में 305 पंचायतों में पेशा कानून लागू करना है।

आरजीसीए से मिले ₹12 करोड़

इस वर्ष पंचायती राज विभाग को राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान से ₹12करोड़ मिले हैं। इससे पंचायत प्रतिनिधियों को पैसा संबंधित जानकारी देनी है। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन करना है। पेशा का फैसिलिटेटर नियुक्त करना है। पंचायती राज विभाग को वित्त आयोग से पैसा मिलता है। केंद्रीय पदाधिकारियों ने झारखंड को बताया है कि पेसा कानून बनाना सभी राज्यों के लिए जरूरी है। जो सरकार अपने यहां यह कानून नहीं बनाएगी, वहां पैसा रोक दिया जाएगा।

पेशा कानून के तहत ग्राम सभा को मिलने वाले अधिकार

*भूमि अधिग्रहण से पहले सलाह लेना
*जलाशयों के विकास की योजना व प्रबंधन तैयार करना
*लघु उपज का लाइसेंस देना
*लघु पद में मिलने वाली छूट की अनुशंसा करना
*स्थानीय संपदा पर नियंत्रण और प्रबंधन करना

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here