CBSE में मैथिली को मिली जगह, सम्राट चौधरी बोले- मिथिला की सांस्कृतिक पहचान को मिला सम्मान

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Maithili in CBSE: बिहार की मातृभाषा और मिथिला की सांस्कृतिक विरासत को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के पाठ्यक्रम में कक्षा 1 से माध्यमिक स्तर तक मैथिली भाषा को मातृभाषा विषय के रूप में मान्यता मिलने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसे ऐतिहासिक और स्वागतयोग्य निर्णय बताया है।

सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह फैसला मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मातृभाषा मैथिली को शिक्षा व्यवस्था में मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि इससे मिथिला की सांस्कृतिक अस्मिता और भाषाई गौरव को नई पहचान मिलेगी।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय भाषाओं, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन को लगातार नई मजबूती मिल रही है। सम्राट चौधरी ने कहा कि यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों को अपनी मातृभाषा, संस्कृति और जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा।

मिथिला क्षेत्र में खुशी की लहर

CBSE पाठ्यक्रम में मैथिली भाषा को शामिल किए जाने की खबर के बाद मिथिला क्षेत्र के लोगों में खुशी का माहौल है। शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने इसे मैथिली भाषा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए बड़ा कदम बताया है। लोगों का कहना है कि इससे बच्चों को अपनी मातृभाषा में शिक्षा पाने का अवसर मिलेगा और क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा मिलेगा।

नई शिक्षा नीति से जुड़ा बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि नई शिक्षा नीति के तहत मातृभाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में यह फैसला काफी अहम है। इससे छात्रों की सीखने की क्षमता मजबूत होगी और स्थानीय भाषाओं को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

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