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लैंड फॉर जॉब केस : अब राजद सुप्रीमो लालू यादव को मिली सीबीआई की नोटिस ,होगी पूछ्ताछ

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न्यूज़ डेस्क 

बिहार में अब जांच एजेंसियों का तांडव जारी रहेगा। आगामी लोकसभा चुनाव तक जांच एजेंसियां एक्टिव रहेगी और विपक्ष को निशाना बनती रहेगी। विपक्षी नेता भी इस बात को जान गए हैं। जिस तरह से सीबीआई ने ‘नौकरी के बदले जमीन घोटाला’ मामले में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से पटना स्थित उनके आवास पर पूछताछ की उससे साफ़ हो गया है कि बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव हो सकते हैं। सीबीआई ने अब पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद को भी नोटिस जारी किया है। अधिकारियों ने बताया कि कोई तलाशी नहीं ली गई, न ही छापा मारा गया है। उन्होंने बताया कि सीबीआई ने राबड़ी देवी को नोटिस जारी किया था, जिसके बाद उन्होंने सोमवार को उपलब्ध रहने की बात कही थी और जांच एजेंसी की टीम उनसे पूछताछ करने के लिए उनके आवास पर गई थी। इसी तरह का एक नोटिस राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद को भी जारी किया गया है, लेकिन पूछताछ की तारीख पर वह चुप्पी साधे हुए हैं। सीबीआई मामले में आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। विशेष अदालत ने प्रसाद और उनके परिवार के सदस्यों सहित अन्य आरोपियों को 15 मार्च को अदालत में पेश होने के लिए सम्मन जारी किया है।           
  यह मामला लालू प्रसाद के परिवार को तोहफे में जमीन दे कर या बेचकर कथित तौर पर नौकरी दिए जाने से संबंधित है। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों को मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर में स्थित रेलवे के विभिन्न जोन में 2004-2009 के दौरान ग्रुप-डी पदों पर नियुक्त किया गया और इसके बदले में उन लोगों ने या उनके परिवार के सदस्यों ने प्रसाद और एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के नाम पर अपनी जमीन स्थानांतरित की। बाद में इस कंपनी का स्वामित्व प्रसाद के परिवार के सदस्यों ने अपने हाथ में ले लिया था। यह भी आरोप लगाया गया है कि पटना में लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों ने 5 बिक्री सौदों, दो उपहार सौदों के माध्यम से 1,05,292 वर्ग फुट जमीन लोगों से ली। आरोप है कि नियुक्तियों के लिए रेलवे प्राधिकरण की ओर से जारी दिशानिर्देशों और आवश्यक प्रक्रियाओं को दरकिनार कर लाभार्थियों की सेवाएं नियमित की गई।           
कहा जा रहा है कि सीबीआई की यह पूछताछ और छापेमारी बिहार में लम्बे समय तक चलेगी। बता दें किबिहार के 22  विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों में केस दर्ज है। इसके अलावे करीब 60 ऐसे लोगो के  खिलाफ भी मामले दर्ज है जो किसी न किसी पार्टी से जुड़े हुए हैं। इनमे कई कारोबारी है तो कुछ नौकरशाह भी।         जानकार यह भी कह रहे कि जब से नीतीश कुमार बीजेपी से अलग होकर राजद के साथ गए हैं ,बीजेपी की मुश्किलें बढ़ गई है। बीजेपी अब बिहार में भ्रष्टाचार का मामला उठाकर आगामी लोकसभा  चुनाव को प्रभावित करना चाह रही है। बीजेपी को पता कि चुनाव में महागठबंधन के सामने टिकना मुश्किल है ऐसे में अधिकतर नेताओं को जेल में डालकर जनता के बीच यह सन्देश देने की कोशिश भी की जा रही है कि नीतीश कुमार भ्रष्ट लोगो के साथ राजनीति कर रहे हैं। बीजेपी की चाहत अभी भी है कि नीतीश कुमार बीजेपी के साथ लौट आये। 

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