दो साल की सजा मिलने के बाद क्या राहुल की संसद सदस्यता जा सकती है ?

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अखिलेश अखिल
सूरत की एक न्यायिक अदालत से मानहानि के एक मामले में राहुल गाँधी को दो साल की सजा मिलने के बाद अब इस बात की भी चर्चा होने लगी है कि क्या राहुल गाँधी की सांसदी भी जा सकती है ? वैसे बीजेपी का जोर इसी बात पर ही है कि राहुल की सांसदी ख़त्म की जाए और इसके लिए बीजेपी संसद के भीतर राहुल के भाषण भाषण के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला बताकर उसे बर्खास्त करने की मांग बीजेपी सांसद करते रहे हैं। अब जब राहुल को सूरत की अदालत ने दो साल की सजा दे दी है तब बीजेपी की कोशिश यही होगी कि इस मामले को आगे ले जाकर उनकी सांसदी को भी ख़त्म कराया जाए। हलाकि सूरत अदालत ने राहुल को एक महीने के लिए जमानत भी दे दी है ताकि आगे की अदलात में वे अपील कर सके।

लोक-प्रतिनिधि अधिनियम 1951 की धारा 8(3) के मुताबिक, अगर किसी नेता को दो साल या इससे ज्यादा की सजा सुनाई जाती है तो उसे सजा होने के दिन से उसकी अवधि पूरी होने के बाद आगे छह वर्षों तक चुनाव लड़ने पर रोक का प्रावधान है। अगर कोई विधायक या सांसद है तो सजा होने पर वह अयोग्य ठहरा दिया जाता है। उसे अपनी विधायकी या सांसदी छोड़नी पड़ती है। संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप कहते हैं कि राहुल गांधी को दो साल की सजा जरूर हुई है, लेकिन सजा अभी निलंबित है। ऐसे भी फिलहाल उनकी सांसदी पर कोई खतरा नहीं है। राहुल को अगले तीस दिन के भीतर ऊंची अदालत में फैसले को चुनौती देनी होगी। अगर वहां भी कोर्ट निचली अदालत को बरकार रखती है तो राहुल की संसद सदस्यता जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में इस अधिनियम को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए धारा 8(4) को असंवैधानिक करार दिया था। इस प्रावधान के मुताबिक, आपराधिक मामले में (दो साल या उससे ज्यादा सजा के प्रावधान वाली धाराओं के तहत) दोषी करार किसी निर्वाचित प्रतिनिधि को उस सूरत में अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता था, अगर उसकी ओर से ऊपरी न्यायालय में अपील दायर कर दी गई हो। यानी धारा 8(4) दोषी सांसद, विधायक को अदालत के निर्णय के खिलाफ अपील लंबित होने के दौरान पद पर बने रहने की छूट प्रदान करता है। इसके बाद से किसी भी कोर्ट में दोषी ठहराए जाते ही नेता की विधायकी-सासंदी चली जाती है।

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