सैलून की कुर्सी पर बैठे-बैठे जब बालों का रंग बदलता दिखता है, तो मन में एक सवाल जरूर आता है कि क्या ये केमिकल्स वाकई शरीर के लिए नुकसानदेह हैं? तेज गंध और तरह-तरह की बातें सुनकर कई लोगों को लगता है कि हेयर डाई से लिवर तक खराब हो सकता है। लेकिन हकीकत थोड़ी अलग है।
सैफी हॉस्पिटल के हेपेटोलॉजिस्ट और लिवर ट्रांसप्लांट फिजिशियन डॉ. चेतन कलाल ने मीडियाकर्मियों को बताया कि रूटीन तरीके से कॉस्मेटिक हेयर डाई इस्तेमाल करने से आम लोगों में लिवर की गंभीर बीमारी होने का कोई ठोस क्लिनिकल सबूत नहीं है।इसकी वजह भी सीधी है मार्केट में मिलने वाली ज्यादातर डाई रेगुलेटेड होती हैं और स्कैल्प के जरिए शरीर में इनका एब्जॉर्प्शन बहुत कम होता है। यानी ये केमिकल्स इतनी मात्रा में ब्लडस्ट्रीम तक नहीं पहुंचते कि लिवर को नुकसान पहुंचा सकें।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि जोखिम बिल्कुल शून्य है।कुछ मामलों में लिवर डैमेज की रिपोर्ट सामने आई है, खासकर जब डाई में मौजूद पैरा-फिनाइलिन डायमीन जैसे केमिकल शामिल हों। लेकिन ये मामले बेहद रेयर और इडियोसिंक्रेटिक होते हैं, यानी हर व्यक्ति में अलग तरह से, बिना किसी तय पैटर्न के।ये डोज पर निर्भर नहीं होते, बल्कि शरीर की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया पर आधारित होते हैं।
डॉ. हर्षिल एस. शाह बताते हैं कि PPD और अमोनिया जैसे तत्व तब नुकसानदेह हो सकते हैं, जब ये शरीर में ज्यादा मात्रा में प्रवेश करें ।अगर स्कैल्प पर घाव हो या एप्लिकेशन के दौरान फ्यूम्स ज्यादा इनहेल किए जाएं तो आम तौर पर इससे स्किन एलर्जी होती है, जो असहज तो होती है, लेकिन खतरनाक नहीं। जिन मामलों में हेयर डाई और हेपेटाइटिस के बीच संबंध पाया गया, उनमें लंबे समय तक या बार-बार इस्तेमाल के साथ पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याएं भी शामिल थीं।
असल चिंता तब बढ़ती है, जब कई जोखिम एक साथ जुड़ जाते हैं जैसे स्मोकिंग स्मोकिंग खुद लिवर के लिए बड़ा खतरा है। यह ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, सूजन और फाइब्रोसिस को बढ़ाता है, जिससे लिवर डिजीज का खतरा बढ़ जाता है, खासकर अगर फैटी लिवर या शराब का इतिहास हो। ऐसे में जब शरीर केमिकल्स के संपर्क में आता है, तो कुल मिलाकर टॉक्सिक असर बढ़ सकता है,लेकिन डॉ. कलाल का जोर साफ है कि लिवर हेल्थ के लिए हेयर डाई छोड़ने से ज्यादा जरूरी स्मोकिंग छोड़ना है।
ऐसे में सबसे बेहतर तरीका है सावधानी के साथ उपयोग।हमेशा भरोसेमंद और रेगुलेटेड ब्रांड की डाई चुनें। अमोनिया-फ्री या हर्बल लिखे होने का मतलब पूरी तरह सुरक्षित होना नहीं है। इनमें भी अलग तरह के केमिकल्स होते हैं। हर बार इस्तेमाल से पहले पैच टेस्ट जरूर करें, ताकि एलर्जी का पता पहले ही चल सके।कभी भी डाई को कटे-फटे या इंफ्लेम्ड स्कैल्प पर न लगाएं।

