अखिलेश अखिल
अभी बैकफुट पर चल रही बीजेपी को राम मंदिर की अगली राजनीति से काफी आस है। बीजेपी को लग रहा है कि 2024 का चुनाव वह राम मंदिर के भव्य उद्घाटन के नाम पर जीत जायेगी। राम मंदिर आंदोलन को आगे बढाकर ही बीजेपी आज इस मुकाम पर पहुंची है हुए उसे यह यकीन है कि जब अगले साल की शुरुआत में मंदिर का भव्य उद्घाटन होगा तो पूरा देश बीजेपी के साथ खड़ा होगा। बीजेपी जानती है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भले ही मंदिर का निर्माण चल रहा है लेकिन देश के लोगों के मन में वह बैठा चुकी है कि यह मंदिर बीजेपी बना रही है। भारत का जन मानस मान रहा है कि बीजेपी नहीं रहती तो यह मंदिर भी नहीं बनता। जनता के मन में राम मंदिर के साथ बीजेपी के जुड़ाव की यह झूठी कहानी घर कर गई है और बीजेपी इसी कहानी के जरिये आगामी लोक सभा चुनाव को फतह करने को तैयार है। लेकिन आगे बढे इससे पहले कुछ और बात को भी रेखांकित करना जरुरी है।
राजनीति कब करवट बदलती है और कब हारी बाजी जीत में बदल जाती है यह कोई नहीं जानता। लेकिन इतना तय है कि समय के मुताबिक राजनीति बदलती है और नेताओं के भविष्य भी बदल जाते हैं। कौन जानता था कि कभी मात्र दो सीट सीट जीतने वाली बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज होगी ? वह भी मोदी के नेतृत्व में लगातार केंद्र की सरकार बनाएगी ! लेकिन ऐसा हुआ। जिन राज्यों में बीजेपी की पहुँच नहीं थी उन राज्यों में बीजेपी सरकार चला रही है और खेल तो यह है कि कई राज्यों में उसकी सरकार लौटती भी रही है। राजनीति यही ऐसा सच है जो जीवंत रखता है। लोकतंत्र की यही खूबी जनता को लुभाती भी है और भरमाती भी है।
राहुल की भारत जोड़ो यात्रा ने कांग्रेस को जिन्दा कर दिया। जिस कांग्रेस के नाम से सब भागते फिरते थे ,अब वही कांग्रेस सबके चाहत बनती दिख रही है। जो विपक्ष कल तक कांग्रेस और राहुल गाँधी से पिंड छुड़ाती फिरता था आज सारे विपक्ष कांग्रेस के साथ खड़े दिख रहे हैं। यह सब कमाल ही तो है। राजनीति का यही रंग लोकतंत्र को जीवित किये हुए है। बदलाव प्रकृति का नियम है। जो आया है उसे जाना भी पडेगा .जिसकी जीत हुई है उसकी हार भी सुनिश्चित है। जो महान दिखता है नाश भी आवश्यक है। और प्रकृति का यही खेल इंसान को आस दिलाता है और लगे रहने के लिए प्रेरित करता है।
बदले समय में अभी बहुत कुछ कांग्रेस और विपक्ष के पक्ष में जाता दिख रहा है। कल तक जिस मोदी के सामने कुछ बोलने से विपक्ष बचता था आज उसी मोदी पर हमलावर है। हमला भी इस तरह के कि जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती। मौजूदा समय में किसी प्रधानमंत्री के बारे में जो कुछ भी कहा जा रहा है ,जितने आरोप लगाए जा रहे हैं ,वह आजाद भारत का एक ऐसा सच है जिसकी कल्पना कल्पना देश की जनता ने भी नहीं की थी। जाहिर है पीएम मोदी का इकबाल कम हो गया है। अब उनकी छवि पहले वाली नहीं रही। झूठ की राजनीति ज्यादा दिनों तक नहीं चलती। दुसरो का अपमान ज्यादा दिनों तक नहीं ठहरता। किसी को अपमानित और नीचा दिखाने का परिणाम खुद को भी भुगतना पड़ता है। बीजेपी अभी तक मोदी के सहारे ही थी। लेकिन अब नायक घेरे में हैं। जितने इल्जाम उन पर लग गए हैं और जितने नामो से उन्हें विभूषित किया गया है ,आज तक देखा सुना नहीं गया। यह सब समय का खेल ही तो है।
मोदी की बड़ी चुनौती आगामी लोकसभा चुनाव जीतने की है। 2024 का चुनाव बीजेपी के लिए ही नहीं पीएम मोदी के लिए काफी कठिन है। अगर यह मैदान वह मार गए तो बड़े विजेता बन कर उभरेंगे और चूक गए तो बीजेपी रसातल में जा सकती है। बीजेपी टूट सकती है। बीजेपी का वह हर सपना चूर हो सकता है जो हिंदुत्व के नाम पर पिछले कई सालों से वह आगे बढ़ती रही है। ऐसे में बीजेपी का हश्र क्या होगा ,उनके नेताओं की कहानी क्या बनेगी यह तो देखने की बात होगी लेकिन कथित हिंदुत्व के नाम पर हिन्दू मुसलमान करने वाले लाखों -करोड़ों लोगों को कितना कष्ट होगा इसकी कल्पना ही की जा सकती है।
अब फिर मुद्दे की बात। आज की राजनीति भले ही बीजेपी के खिलाफ जाती रही है लेकिन यह भी सच है कि जब जनवरी 2024 में भव्य राम मंदिर का निर्माण पूरा होगा ,तब बीजेपी अपने इतिहास के सबसे गौरवशाली क्षण का अनुभव करेगी। राम मंदिर बीजेपी के इतिहास में लाभदायक साबित होगा और उस आंदोलन की पराकाष्ठा को भी चिन्हित करेगा जिसने इसे देश में पूर्ण सत्ता तक पहुंचाया। 1980 में बीजेपी की स्थापना हुई और तभी से राम मंदिर बीजेपी की राजनीति का आधार रहा है।
बता दें कि 2024 के जनवरी में रम मंदिर के कपाट खुल जायेंगे ,हालांकि तब तक भूतल ही बनकर तैयार होगा। वहाँ रामलला स्थापित की जाएँगी और जनता के लिए खोल दिया जाएगा। बाकी के मंदिर तैयार होने में साल भर और लगेंगे। लेकिन बीजेपी को तो राम मंदिर के पट खुलने का इंतज़ार है। पट खुलने से पहले देश के हर गांव में बीजेपी और संघ के लोग पहुंचेंगे और राम लला के दर्शन के लिए अयोध्या का निमंत्रण देंगे। सारा देश कथित भक्ति में डूबेगा। बीजेपी का जयघोष होगा और फिर चुनाव की क्या बिसात ! बीजेपी और संघ का प्रचार तंत्र इसके लिए पहले से ही तैयार है। विपक्ष की सभी राजनीति धर्म की इस आंधी में सकती है। लोक्तन्त्र धर्म से जुड़ जाएगा। इसे आप हिंदुत्व की जीत कहिये या फिर हिन्दू देश ! विपक्ष को भी बीजेपी के खेल पर नजर लगाने की जरूरत है। सूत्रों के अनुसार, मंदिर का उद्घाटन, एक बड़े पैमाने पर प्रचार अभियान से पहले होगा, जिसे हिंदू भावनाओं को बढ़ाने और 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए उन्माद पैदा करने के लिए डिजाइन किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, संघ परिवार के अन्य घटक इस भव्य अवसर के लिए एक बिल्ड-अप बनाने के लिए कार्यक्रमों की योजना बना रहे हैं। मंदिर के निर्माण पर 1,800 करोड़ रुपए खर्च होंगे, जो पूरी तरह से दान से आएंगे।
उत्तर प्रदेश सरकार 32,000 करोड़ रुपए की मेगा योजना के साथ अयोध्या को विकसित करने के लिए कमर कस रही है, जिसमें अयोध्या के चेहरे को वैश्विक पर्यटन और आध्यात्मिक गंतव्य में बदलने के लिए 37 एजेंसियों द्वारा निष्पादित 264 परियोजनाएं शामिल हैं।

