वर्ष 2026 ईस्वी में हुए विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने अपार सफलता प्राप्त करते हुए अपने विधायकों की संख्या 207 तक कर ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और एनडीए शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री की उपस्थिति में शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली।शुभेंदु अधिकारी एक ब्राह्मण चेहरा हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो अब बीजेपी पश्चिम बंगाल से कम्युनिस्ट और टीएमसी के शासनकाल में पनपे और फुले फले सिंडिकेट के आतंक को खत्म कर सवर्ण मुख्यमंत्री के भरोसे पश्चिम बंगाल में स्वर्ण युग लाने की तैयारी में जुट गई है।
पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में 207 विधायकों का अपार बहुमत प्राप्त करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी के समक्ष मुख्यमंत्री पद के लिए कई चेहरे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के निर्देश पर काम करने वाली भारतीय जनता पार्टी ने ऐसे में अगर उत्कल ब्राह्मण समुदाय से संबंध रखने वाले शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री के पद पर बिठाया है तो वह अकारण नहीं है। इसके पीछे कई कारण जिसका उल्लेख में एक-एक कर कर रहा हूं।
शुभेंदु अधिकारी का जन्म पश्चिम बंगाल के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ है। इनके पिता शिशिर अधिकारी हैं ,जो मनमोहन सिंह के सरकार में केंद्रीय मंत्री थे। इनकी मां गायत्री देवी एक ग्रहणी और समाज सेविका है। शुभेंदु अधिकारी ने छात्र जीवन से ही राजनीति में प्रवेश कर लिया था और यह कांग्रेस के छात्र परिषद के नेता थे। इसके बाद शुभेंदु अधिकारी ने नगरपालिका में पार्षद का चुनाव जीता था।
मुख्य धारा की राजनीति में शुभेंदु अधिकारी 2006 ईस्वी में टीएमसी के टिकट पर कांटी दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधायक बने। इसके बाद शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी के ही टिकट पर 2009 ईस्वी में लोकसभा का चुनाव जीता और एमपी बने। इसके बाद 2014 ईस्वी में हुए आम चुनाव जिसमें नरेंद्र मोदी की पुरजोर हवा चल रही थी और उस आंधी में पश्चिम बंगाल के कई दिग्गज चुनाव हार गए थे , लेकिन शुभेंदु अधिकारी ने मोदी लहर के बावजूद तमलुक लोक सभा सीट से दोबारा सांसद बनने में सफलता प्राप्त की थी । इसके बाद 2016 ई के विधानसभा चुनाव में उन्होंने टीएमसी के टिकट पर नंदीग्राम से चुनाव जीता और ममता बनर्जी की सरकार में मंत्री बने।
वर्ष 2020 में शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। अमित शाह ने उन्हें एक बड़ी रैली में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण करवाया। वर्ष 2021 ईस्वी में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इन्होंने नंदीग्राम से टीएमसी की नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चुनाव में हराकर सनसनी फैला दी। वह विधानसभा में नेता विपक्ष बने। वर्ष 2026 ईस्वी में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों जगह से चुनाव लड़ा और दोनों जगह से चुनाव जीता। चुनाव में एक बार फिर से ममता बनर्जी को भवानीपुर से हराकर शुभेंदु अधिकारी ने सभी को अपना लोहा मनवा दिया, जिसके प्रसाद स्वरूप भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के पद पर बिठा दिया।
नंदीग्राम जमीन अधिग्रहण मामले में शुभेंदु अधिकारी की बड़ी भूमिका रही। भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी के मुख्य आयोजक की भूमिका में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में तत्कालीन वाम मोर्चा (Left Front) सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों को एकजुट किया और जमीनी स्तर पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया।
उस समय कम्युनिस्ट के विरुद्ध किसी के भी कुछ बोलने की हिम्मत नहीं होती थी, लेकिन शुभेंदु अधिकारी डटकर लोगों के साथ खड़े रहे और उनके मन से वाम दल के आतंक को मिटा दिया। उन पर माओवादियों को हथियार देने का भी आरोप लगा, लेकिन उन्होंने इसका विरोध किया और इस मामले में बेदाग निकालने में सफलता प्राप्त की ,और सरकार के इस क्षेत्र के लोगों के भूमि अधिग्रहण के प्रयास को विफल कर दिया।
शुभेंदु अधिकारी की सांगठनिक क्षमता लाजवाब है। इनकी रैलियां प्रायोजित नहीं होती है, लेकिन फिर भी जिधर से ये निकल जाते हैं ,लोग इनसे जुड़ते चले जाते हैं। उनकी इस सांगठनिक क्षमता का ही कमाल है कि 2021 ई के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की संख्या 3 से बढ़कर 77 और 2026 के चुनाव में 77 से बढ़कर 207 तक पहुंच पाई।
पीएम मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी की तरह शुभेंदु अधिकारी भी अविवाहित है। भले ही यह गृहस्थ जीवन जीते हैं, लेकिन उसके बावजूद उन्होंने अपने अविवाहित रहने का जो कारण बताया है, वह पीएम मोदी और योगी आदित्यनाथ की ही तरह है कि वह अपने या अपने परिवार की जगह जनकल्याण की भावना को प्रमुखता देंगे। इस भावना का को उन्होंने सिर्फ अपने मन में ही नहीं रखा है बल्कि वह समय-समय पर इसका खुलासा भी करते रहे हैं। उनकी कार्यशैली से भी परिलक्षित होती है।अपनी जनसभा में वे अक्सर बताया करते हैं कि उन्होंने समाज और जनसेवा के लिए अपना जीवन समर्पित करने का फैसला किया है, इसी वजह से उन्होंने शादी नहीं की।
शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के शासनकाल में मंत्री रहते हुए भी सिंडिकेट और कट मनी का विरोध किया था। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिन्होंने विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान लोगों को यह वचन दिया था कि बीजेपी की सरकार सत्ता में आई तो वह से भय मुक्त समाज का निर्माण करेगी। इस मामले में शुभेंदु अधिकारी की प्रतिबद्धता को देखकर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री बनाया होगा।
बीजेपी के कुछ अन्य ब्राह्मण मुख्यमंत्री की कार्य क्षमता को देखें तो महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस ने भारतीय जनता पार्टी को जो कभी शिवसेना की छोटे भाई की भूमिका में रहा करती थी,उसे दो-दो बार खुद की सरकार और एक बार गठबंधन की सरकार बनाने का अवसर प्रदान किया। और अब देवेंद्र फडणवीस अपने क्रियाकलाप से लोगों के मन में सुशासन का विश्वास उत्पन्न कर आगामी चुनाव में भी बीजेपी की सरकार बनाने के लिए प्रयत्नशील है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा भी ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। इन्होंने अपनी मेहनत से असम में लगातार दूसरी बार भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में बनाए रखने में सफलता प्राप्त की है। अकेले अपने दम पर हिमंत विश्व शर्मा ने असम में बीजेपी के विधायकों की संख्या पिछले बार की 60 से बढ़कर उल्लेखनीय रूप से 82 तक लाने में सफलता प्राप्त की है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सवर्ण के अंतर्गत राजपूत जाति से आते हैं ।हालांकि गोरखपुर मठ के पीठाधीश होने के कारण ये ब्राह्मण के समतुल्य माने जाते हैं। उत्तर प्रदेश में एक तरफ उन्होंने राजनीतिक रूप से लगातार दो बार चुनाव जीतकर ऐसा करने का रिकॉर्ड बनाया तो वहीं दूसरी तरफ उन्होंने उत्तर प्रदेश ने अपराध नियंत्रण में भी बड़ी भूमिका निभाई है। अभी वे उत्तर प्रदेश में औद्योगीकीकरण के लिए जी तोड़ प्रयास कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने राज्य में कई एक्सप्रेस वे भी बनावे हैं। बीजेपी के चुनाव प्रचारक के रूप में जिस भी राज्य में हुए चुनाव प्रचार में जाते हैं,वहां बीजेपी उम्मीदवार की जीत लगभग सुनिश्चित हो जाती है। योगी आदित्यनाथ के इन्हीं कारनामों की वजह से देश के बड़े हिस्से में इन्हें पीएम मोदी के उत्तराधिकारी के रूप में भी देखा जाने लगा है।
पुष्कर सिंह धामी भी सवर्ण जाति के राजपूत समुदाय से आते हैं। इन्होंने भी उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी की लगातार दो बार सरकार बनाकर उत्तराखंड को बेहतर ढंग से चलाने का संदेश दिया है।
ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि शुभेंदु अधिकारी के रूप में स्वर्ण मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा पश्चिम बंगाल में सिंडिकेट की आतंक को खत्म करने और मंद पड़े औद्योगिकरण को तेज करने के साथ-साथ बेहतर शासन व्यवस्था प्रदान कर पश्चिम बंगाल को आतंक युग से स्वर्ण युग में परिवर्तित करने में सफल होती है या नहीं।

