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बृजभूषण भूषण शरण सिंह मामले में बीजेपी कर रही है वेट एंड वॉच, एक्शन लेने पर कई जनपदों की सियासत हो सकती है प्रभावित

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बीरेंद्र कुमार झा

भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष और कैसरगंज से बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर से विवादों में हैं।महिला पहलवानों के शोषण के आरोप में मुकदमा दर्ज के बाद उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा होने की बात कही है।ऐसे में अब सवाल उठने लगे हैं क्यों अपने राजनीतिक दबदबे से विरोधियों को धूल चटाने वाले बृजभूषण शरण सिंह इस बार खुद पहलवानों के धोबी पछाड़ के शिकार हो गए हैं। बीजेपी इन मामलों पर वैट एंड वॉच की पॉलिसी अपना रही है,क्योंकि उन पर मामला दर्ज होने का अवैध और पूर्वांचल के करीबी जनपदों की सियासत पर पड़ सकता है बड़ा प्रभाव ।

उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में भूषण शरण सिंह का ही दबदबा

बृजभूषण शरण सिंह के सियासी दबदबे वाले क्षेत्र की की जाए तो गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती जनपद में उनकी मजबूत पकड़ है। हिंदुत्व के मुद्दे पर अपने आक्रामक तेवर के कारण शुरुआत से ही उन्होंने इन क्षेत्रों में अपनी एक अलग पहचान बनाई है ।अंबेडकरनगर में भी उनका दबदबा है। प्रदेश में वर्ष 2021 में पंचायती राज चुनाव में बृजभूषण शरण सिंह ने अपने बलबूते पर बीजेपी को बड़ी कामयाबी दिलाई थी। बृजभूषण शरण सिंह ने गोंडा, बलरामपुर,बहराइच श्रावस्ती और अंबेडकरनगर में बीजेपी पार्टी के जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित कराने में बड़ी भूमिका निभाई थी।

1991 में पहली बार पहुंचे लोकसभा

बृजभूषण शरण सिंह ने पहली बार 1991 ईस्वी में चुनाव लड़ा था और अपने प्रतिद्वंदी आनंद सिंह को रिकॉर्ड एक लाख से अधिक मतों से हराया था। इसके बाद उन्होंने सियासत में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।धीरे-धीरे गोंडा, बलरामपुर और अयोध्या समेत कई जनपदों में बृजभूषण शरण सिंह का दबदबा बढ़ता चला गया। 1999 के बाद से कभी भी चुनाव नहीं हारे हैं,भले ही उनकी सीट और पार्टी बदलती रही हो, लेकिन हर बार उन्हें कामयाबी मिली है।

2014 से पहले की बीजेपी में वापसी

एक समय मतभेद के कारण बृजभूषण शरण सिंह ने बीजेपी छोड़ दी थी और 2009 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर कैसरगंज से जीत दर्ज की थी। हालांकि इसके बाद उन्होंने अगले लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही बीजेपी में घर वापसी कर ली थी। इसके बाद 2014 और फिर 2019 के लोकसभा चुनाव में वे कैसरगंज सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतने में सफल रहे। बृजभूषण शरण सिंह का बेटा प्रतीक भूषण गोंडा से बीजेपी का विधायक है।

विवादों से रहा है पुराना नाता

बृजभूषण शरण सिंह अपने बयानों से लेकर और कई कारणों की वजह से अक्सर विवादों और सुर्खियों में रहते रहे हैं। उन्होंने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे को अयोध्या में प्रवेश नहीं करने देने की धमकी भी दी थी। बृजभूषण शरण सिंह उन 39 आरोपियों में से एक थे जिन्हें 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने के लिए जिम्मेदार बताया गया था। हालांकि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 30 सितंबर 2020 को कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

बृजभूषण शरण सिंह पर 1993 में दाऊद इब्राहिम के चार सहयोगियों को अपने घर पर पनाह देने का आरोप लगा था इसे लेकर उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था।वहीं समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रहे पंडित सिंह पर जानलेवा हमला करने के आरोप में भी वे विवादों में रहे। वर्ष 2004 में राजस्व मंत्री रहे घनश्याम शुक्ला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत को लेकर भी उन पर आरोप लगे। वर्ष 2008 में यूपीए के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में बीजेपी सांसद होने के बावजूद उन पर कांग्रेस के समर्थन का आरोप लगा इसके अलावा 15 दिसंबर 2001 को रांची में एक आयोजन में मंच पर एक पहलवान को थप्पड़ मारने का भी उनका वीडियो वायरल हुआ था ।

कुश्ती और पहलवानी के हैं शौकीन

बृजभूषण शरण सिंह कुश्ती और पहलवानी के खासे शौकीन है।अखाड़ों से उनका पुराना नाता रहा है।छात्र जीवन से ही वे राजनीति में सक्रिय रहे।वे छात्र संघ अध्यक्ष भी रह चुके हैं।1988 के दौर में वे बीजेपी से जुड़े और हिंदुत्ववादी नेता के रूप में लोकप्रिय हुए।इसके बाद 90 के दशक से लेकर आज तक सियासत में उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में है, जिनकी अपने प्रदेश के बड़े क्षेत्र में एक मजबूत पकड़ हो।

भविष्य पर टिकी है निगाहें

पहलवानों द्वारा जंतर मंतर पर धरना देने और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दिल्ली पुलिस के द्वारा एफआईआर करने की बात कही जाने के बाद, अब यह माना जा रहा है कि बृजभूषण शरण सिंह पर कानूनी शिकंजा कस सकता है।कानूनी शिकंजा कसने का प्रभाव बीजेपी की सियासत पर भी पड़ सकता है। माना जाता है कि करीब 6 जनपद में इनका खासा प्रभाव है। बीजेपी अगर इनके विरुद्ध ज्यादा दबाव बनाएगी तो यह राजनीतिक रूप से बीजेपी के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

लोकसभा चुनाव 2024 बीजेपी के मिशन 400 प्लस के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बृजभूषण शरण सिंह जैसे हिंदूवादी नेताओं का सक्रिय होना बेहद जरूरी है। यही कारण है कि बीजेपी इस प्रकरण में जल्दी बाजी में फैसला करती नजर नहीं आ रही है।यह मामले की किसी नतीजे पर पहुंचने का इंतजार कर रही है। अगर भविष्य में किसी परिस्थिति के मद्देनजर पार्टी अपने सांसद पर कोई कार्यवाही करती है या फिर कानूनी शिकंजा कसने की स्थिति में उनका टिकट काटा जाता है तो इसका राजनीतिक प्रभाव देखने को मिलेगा जिससे बीजेपी भी वंचित नहीं रह सकती है।

 

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