अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, विशेषकर ग्रेट निकोबार विकास परियोजना को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच तीखा राजनीतिक विवाद चल रहा है। बीजेपी कांग्रेस के विरोध को देश विरोधी और चीन के हित में बता रही है।
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट परियोजना मुद्दा की बात करें तो पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार ग्रेट निकोबार में ₹92,000 करोड़ की लागत से एक बहुत बड़ा ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, टाउनशिप और पावर प्लांट बना रही है। यह प्रोजेक्ट मलक्का जलडमरूमध्य के पास है, जहाँ से चीन का 80% तेल गुजरता है। यह भारत को हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर नजर रखने और नौसेना को मजबूत करने में मदद करेगा। इस परियोजना के लिए 160 वर्ग किलोमीटर से अधिक प्राचीन वर्षावन काटे जाने की योजना है, जिससे वहां की पारिस्थितिकी और स्थानीय आदिवासी समुदायों (विशेषकर शोम्पें जनजाति) को खतरा होने का दावा किया जा रहा है।
इस मामले में बीजेपी निम्नलिखित कर्म से कांग्रेस से खफा है:-
(चीन का Agent वाला दावा) राहुल गांधी का विरोध: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अंडमान का दौरा किया और इस प्रोजेक्ट को “विकास के भेष में विनाश” और “महाघोटाला” बताया। बीजेपी का आरोप: बीजेपी का आरोप है कि जब भारत इस प्रोजेक्ट के जरिए चीन की घेराबंदी (strategic containment) कर रहा है, तब कांग्रेस इसका विरोध करके चीन के हितों की रक्षा कर रही है।बयानबाजी: बीजेपी के सोशल मीडिया हैंडल और नेताओं ने दावा किया है कि इस प्रोजेक्ट से चीन डर गया है और राहुल गांधी उसे रोकने की कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी ने इसे “देश द्रोह” और “चीन का एजेंडा” कहा है।कॉर्पोरेट आरोप: राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि स्थानीय लोगों की जमीन छीनकर अडानी ग्रुप को दी जा रही है
कांग्रेस ने इन आरोपों को नकारा है और इसे “अडानी के फायदे के लिए तबाही” का प्रोजेक्ट बताया है।कांग्रेस का कहना है कि यह प्रोजेक्ट पर्यावरण के लिए “मौत की घंटी” है और आदिवासियों के अधिकारों का उल्लंघन है।कांग्रेस ने मांग की है कि इस प्रोजेक्ट की संसदीय समीक्षा होनी चाहिए और विकास की आड़ में इस तरह का विनाश नहीं होना चाहिए।

