पटना (बीरेंद्र कुमार): बेतिया स्टेशन पर डिजिटल भिखारी के रूप में राजू की अपनी एक अलग ही पहचान है। वह हमेशा अपने गले में क्यूआर कोड की तख्ती हमेशा लटकाए रखता है और हाथ में टैब भी रखता है। पैसे मांगने पर अगर कोई उसे कहता है कि छुट्टे पैसे नहीं है, तो राजू बोलता है कि फोन पे पर दे दो, गूगल पे कर दो। राजू बिहार का पहला डिजिटल भिखारी है, लेकिन आज इसके साथ एक बड़ा हादसा हो गया। एक्सप्रेस ट्रेन के एक पैंट्री स्टाफ ने राजू से गले मिलने के बहाने उसके ₹5 हजार उड़ा लिए।
डीएसपी की मदद से वापस मिले पैसे
रेल डीएसपी पंकज कुमार ने बताया कि उन्हें पता चला कि राजू उनके ऑफिस में चक्कर लगा रहा था। इसकी जानकारी मिलने पर मैंने राजू को अपने पास बुलाया। बुलाए जाने पर राजू मेरे पास आया और अपनी आपबीती बताई की उसके ₹5000 एक एक्सप्रेस ट्रेन के पैंट्री स्टाफ ने उससे गले मिलने के बहाने उड़ा लिए हैं। धोखाधड़ी को अंजाम देने वाले को अंदाजा था कि राजू जैसे कमजोर , असहाय ,अकेले और बेघर लोगों की पुलिस नहीं सुनेगी और उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा। लेकिन राजू की बात को पुलिस ने गंभीरता से लिया और कार्रवाई करते हुए डीएसपी ने तत्काल संबंधित ट्रेन के पैंट्री मैनेजर का मोबाइल नंबर पता कराया। मोबाइल नंबर मिलते ही उससे संपर्क किया इस घटना के बाबत जब उससे पूछा गया तो उसने पहले साफ-साफ इससे से मना कर दिया।
इधर राजू का स्पष्ट कहना था कि जब पैंट्री स्टाफ उसे गले मिल रहा था तो उसके पहले तक उसके पॉकेट में पैसे थे। लेकिन थोड़ी ही देर बाद पैसे गायब हो गए। पैंट्री स्टाफ द्वारा राजू के पॉकेट पर हाथ साफ करने की घटना को कुछ लोगों ने देखा भी था। डीएसपी ने तब पैंट्री स्टाफ को दो विकल्प दिया कि या तो वह आते समय राजू के पैसे वापस कर दे और नहीं तो फिर कानूनी प्रक्रिया के लिए तैयार रहें। राजू के साथ धोखाधड़ी के मामले में खुद रेल डीएसपी द्वारा कॉल करने और पुलिस कार्रवाई की बात से वह डर गया और कुछ घंटे बाद वापस आकर राजू का पैसा वापस लौटा दिया। गौरतलब है कि राजू करीब दो दशक से बेतिया स्टेशन पर ही अपना गुजर-बसर करता है। हाल में उसने गले में स्केनर कोड डालकर हाथ में टैब लेकर फोन पे के जरिए भिक्षाटन करना शुरू कर चर्चा का पात्र बन गया है।

