पटना: बिहार सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर अत्याधुनिक हाट-बाजार विकसित किए जाएंगे, जहां जीविका दीदियों, किसानों और ग्रामीण उद्यमियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की बिक्री और प्रदर्शनी की व्यवस्था होगी। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी, वहीं गांवों में रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा होंगे।
शुक्रवार को ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने नाबार्ड और विभागीय अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में इस संबंध में कई अहम निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं में गरीब परिवारों, महिलाओं और रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
पर्यटन स्थलों पर बनेगा आधुनिक हाट-बाजार
बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के प्रमुख पर्यटन केंद्रों पर आधुनिक सुविधाओं से लैस हाट-बाजार विकसित करने की योजना तैयार की जाए। इन हाटों में जीविका समूहों और किसानों के उत्पादों की बिक्री होगी, जिससे स्थानीय उत्पादों को बड़ा बाजार मिलेगा और ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि पर्यटन और स्थानीय उत्पादों को जोड़ने से बिहार के पारंपरिक उत्पादों की पहचान देश और विदेश तक पहुंचेगी। इससे आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का लक्ष्य भी मजबूत होगा।
हर पंचायत में हाट-बाजार विकसित करने की तैयारी
बैठक में यह भी तय किया गया कि आने वाले पांच वर्षों के भीतर प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम एक हाट-बाजार विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा। इन बाजारों को डिजिटल सुविधाओं से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया, ताकि ग्रामीण उत्पाद ऑनलाइन बाजार तक भी पहुंच सकें।
इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से खाली पड़े सरकारी भवनों की पहचान कर उन्हें हाट-बाजार के रूप में विकसित करने का सुझाव भी दिया गया।

जीविका दीदियों के कौशल विकास पर विशेष फोकस
ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि जीविका दीदियों को केवल उत्पाद तैयार करने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें आधुनिक कौशल प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद वे बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार कर सकेंगी और उनकी मार्केटिंग भी आसान होगी।
उन्होंने प्रत्येक प्रखंड में कम से कम 10 महिलाओं और युवतियों को प्रशिक्षित करने का निर्देश दिया। ये प्रशिक्षित महिलाएं आगे अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देंगी।
प्लंबर प्रशिक्षण से मिलेगा नया रोजगार
बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में प्लंबरों की बढ़ती मांग को देखते हुए जरूरतमंद युवाओं और महिलाओं को प्लंबिंग का प्रशिक्षण देने का भी निर्णय लिया गया। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत बनेगी विस्तृत योजना
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कराई जाए। इसके लिए विशेषज्ञ एजेंसियों का सहयोग लेने पर भी जोर दिया गया, ताकि योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।
बैठक के दौरान विभागीय अधिकारियों ने नाबार्ड से ग्रामीण विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और संभावित सहयोग पर भी विस्तृत चर्चा की।

पहाड़ी जिलों में बकरी पालन को मिलेगा बढ़ावा
बैठक में ग्रामीण आजीविका के नए विकल्पों पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने पश्चिम चंपारण, मुंगेर, नवादा सहित अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में पशुपालन से गरीब परिवारों, विशेषकर महिलाओं और आदिवासी समुदायों की आय बढ़ाई जा सकती है। इसके लिए जागरूकता अभियान और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।

