Bihar News: बिहार में न्यायिक प्रक्रिया को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और तेज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को ध्यान में रखते हुए राज्य में ‘न्यायश्रुति’ प्रणाली के पायलट प्रोजेक्ट का पहला मॉक ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। यह पहल भविष्य में अदालतों की कार्यप्रणाली को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
गृह विभाग के सचिव कुंदन कुमार के नेतृत्व में इस नई प्रणाली का परीक्षण किया गया। इसका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करना, संसाधनों की बचत करना और मामलों के त्वरित निष्पादन को सुनिश्चित करना है।
एक साथ जुड़े न्याय व्यवस्था के सभी प्रमुख विभाग
पायलट ट्रायल के लिए पटना के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-23 की अदालत में लंबित एक मामले का चयन किया गया। इस दौरान अभियोजन कार्यालय, बेऊर स्थित आदर्श केंद्रीय कारा, विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) तथा अन्य संबंधित संस्थानों को डिजिटल माध्यम से एकीकृत किया गया। पूरे ट्रायल का तकनीकी संचालन राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) की सहायता से किया गया।
कोर्ट पहुंचे बिना दर्ज होगी गवाही
‘न्यायश्रुति’ प्रणाली लागू होने के बाद गवाहों, पुलिस अधिकारियों, जेल में बंद आरोपियों और वैज्ञानिक विशेषज्ञों को हर सुनवाई में अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी। वे सुरक्षित और प्रमाणित डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी गवाही और बयान दर्ज करा सकेंगे। इससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक और समयबद्ध बनेगी।
लंबित मामलों के निपटारे में मिलेगी तेजी
सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद अदालतों में लंबित मामलों के निपटारे की गति बढ़ेगी। साथ ही, न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली अनावश्यक देरी और प्रशासनिक खर्च में भी कमी आएगी। इससे आम लोगों को समय पर और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
पूरे बिहार में होगा चरणबद्ध विस्तार
पायलट ट्रायल के सफल रहने के बाद राज्य सरकार अब इस प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से बिहार के अन्य जिला न्यायालयों में लागू करने की तैयारी कर रही है। गृह विभाग का लक्ष्य है कि आधुनिक तकनीक की मदद से बिहार की न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी और देश के अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बनाया जाए।

