पटना: वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में बिहार ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के तहत खातों की संख्या और जमा राशि के मामले में बिहार देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य बनकर उभरा है। राज्य में जन धन खातों में जमा राशि 30 हजार करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गई है, जो ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बढ़ती बैंकिंग जागरूकता और बचत की प्रवृत्ति का संकेत माना जा रहा है।
6.87 करोड़ जन धन खातों के साथ बिहार दूसरे स्थान पर
वित्त मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार बिहार में प्रधानमंत्री जन धन योजना के अंतर्गत 6.87 करोड़ खाते संचालित हैं। इस उपलब्धि के साथ बिहार देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। पहले स्थान पर उत्तर प्रदेश है, जहां 10.32 करोड़ जन धन खाते हैं और इनमें लगभग 64 हजार करोड़ रुपये जमा हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर भी जन धन योजना लगातार मजबूत होती जा रही है। अप्रैल 2026 तक देशभर में कुल खातों की संख्या 58.06 करोड़ से अधिक हो चुकी है, जबकि इन खातों में जमा राशि 3.09 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है।
बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट नेटवर्क की अहम भूमिका
ग्रामीण क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने में बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (BC) नेटवर्क की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बिहार में बड़ी संख्या में बीसी एजेंट गांव-गांव जाकर लोगों को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
इनके माध्यम से लोग जमा, निकासी और धन हस्तांतरण जैसी सुविधाओं का लाभ अपने घर या गांव के आसपास ही उठा पा रहे हैं। इससे बैंक शाखाओं पर निर्भरता कम हुई है और ग्रामीण आबादी की बैंकिंग व्यवस्था तक पहुंच आसान बनी है।
ग्रामीण इलाकों में बढ़ी बचत की संस्कृति
विशेषज्ञों के अनुसार बिहार में वित्तीय जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। ग्रामीण परिवार अब अपनी बचत को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था में रखने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके चलते निष्क्रिय खाते भी सक्रिय हो रहे हैं और नियमित लेन-देन में वृद्धि देखी जा रही है।
पश्चिम बंगाल भी बराबरी पर
जन धन योजना के तहत जमा राशि के मामले में पश्चिम बंगाल भी करीब 30 हजार करोड़ रुपये के आंकड़े के साथ बिहार के बराबर खड़ा है। वहां कुल 5.64 करोड़ खाते हैं।
इसके अलावा राजस्थान में लगभग 24 हजार करोड़ रुपये, महाराष्ट्र में 22 हजार करोड़ रुपये और मध्य प्रदेश में करीब 19 हजार करोड़ रुपये जमा हैं। वहीं कर्नाटक, ओडिशा, झारखंड और गुजरात जैसे राज्यों में भी 13 से 15 हजार करोड़ रुपये के बीच जमा राशि दर्ज की गई है।

