Bihar News: बिहार में कानून व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए गृह विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पटना और पूर्णिया प्रमंडल के जिलों में अभियोजन कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।
वीसी के माध्यम से आयोजित इस बैठक में जिलावार प्रदर्शन का आकलन करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी लाई जाए।
एक महीने में हजारों समन-वारंट का निष्पादन
समीक्षा के दौरान सामने आया कि मार्च 2026 में संबंधित जिलों में बड़ी संख्या में कानूनी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। इस दौरान 10,303 समन, 5,314 जमानतीय वारंट, 5,953 गैर-जमानतीय वारंट, 1,105 इश्तेहार और 703 कुर्की मामलों का निष्पादन किया गया। यह आंकड़े दिखाते हैं कि प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की रफ्तार तेज हुई है।
10 हजार से ज्यादा FIR दर्ज, गवाहों की पेशी भी बढ़ी
रिपोर्ट के मुताबिक, CCTNS सिस्टम पर 10,011 प्राथमिकी दर्ज की गईं, जबकि 14,058 मामलों का निष्पादन किया गया। इसके अलावा अदालतों में 4,930 गवाहों की गवाही कराई गई, जो न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
लंबित मामलों पर सख्त निर्देश
बैठक में स्पष्ट रूप से कहा गया कि लंबित आदेशिकाओं और मामलों के निष्पादन दर को और बढ़ाया जाए। खासकर शस्त्र अधिनियम से जुड़े लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द निपटाने का निर्देश दिया गया, ताकि कानून व्यवस्था और मजबूत हो सके।
बड़े अधिकारियों की मौजूदगी में समीक्षा
इस हाई लेवल बैठक में गृह विभाग, अभियोजन निदेशालय, पुलिस मुख्यालय और मद्य निषेध विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इसके साथ ही सभी जिलों के एसएसपी, एसपी, लोक अभियोजक और अन्य संबंधित पदाधिकारी भी वर्चुअल माध्यम से जुड़े और अपने-अपने जिले की स्थिति प्रस्तुत की।
न्याय प्रक्रिया को तेज करने की दिशा में पहल
सरकार की इस पहल को न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने और कानून व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन और गवाहों की नियमित पेशी से अपराध नियंत्रण में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

