बिहार की जीविका दीदियों को मिलेगी तकनीक की नई ताकत, डिजिटल और प्रोफेशनल ट्रेनिंग से खुलेगा रोजगार का नया रास्ता

0
5

पटना: बिहार सरकार ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रही है। राज्यभर की जीविका दीदियों को अब पारंपरिक कार्यों के साथ-साथ तकनीकी, डिजिटल और व्यावसायिक कौशल का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाओं को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना और उनके उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना है।

करोड़ों महिलाओं की आजीविका को मिलेगा नया आयाम

बिहार में करीब 13 लाख स्वयं सहायता समूहों से 1.81 करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं सिलाई-कढ़ाई, दीदी की रसोई, पौधशाला (नर्सरी), पुस्तकालय संचालन और अन्य आजीविका गतिविधियों के जरिए परिवार की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। अब सरकार इनकी कार्यक्षमता को और मजबूत करने के लिए विशेषज्ञों की मदद से उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रही है।

विशेषज्ञ सिखा रहे हैं आधुनिक तकनीक और व्यवसाय के गुर

ग्रामीण विकास विभाग के निर्देश पर विभिन्न जिलों में विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में विशेषज्ञों की टीम जीविका दीदियों को सिलाई-कढ़ाई, पशुपालन, उद्यमिता, तकनीकी दक्षता, उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग और बाजार प्रबंधन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दे रही है। इसका उद्देश्य महिलाओं को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर सफल उद्यमी के रूप में तैयार करना है।

अब ऑनलाइन बिकेंगे जीविका दीदियों के उत्पाद

डिजिटल बाजार से जोड़ने की दिशा में भी सरकार तेजी से काम कर रही है। हाल ही में हाजीपुर स्थित बिहार सुधारात्मक प्रशासनिक संस्थान (बीका) में आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में 250 से अधिक जीविका दीदियों ने भाग लिया। इस दौरान ई-कॉमर्स क्षेत्र के विशेषज्ञों ने महिलाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उत्पाद बेचने, डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स के जरिए कारोबार बढ़ाने की जानकारी दी।

इस पहल से उम्मीद है कि जीविका समूहों द्वारा तैयार किए जाने वाले उत्पाद अब स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि देशभर के ग्राहकों तक आसानी से पहुंच सकेंगे।

डेयरी सहित नए क्षेत्रों में भी बढ़ेगी जिम्मेदारी

सरकार की योजना आने वाले समय में ग्राम पंचायत स्तर पर जीविका दीदियों की भूमिका को और मजबूत करने की है। इसके तहत कई पंचायतों में डेयरी संचालन जैसी नई जिम्मेदारियां भी स्वयं सहायता समूहों को सौंपने की तैयारी की जा रही है। इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के नए अवसर पैदा होंगे और गांवों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

महिला सशक्तिकरण पर सरकार का विशेष फोकस

ग्रामीण विकास विभाग का मानना है कि प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार तक पहुंच—इन तीनों के बेहतर समन्वय से जीविका दीदियां आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ सफल उद्यमी भी बन सकती हैं। इसी दिशा में बैंक ऋण, वित्तीय सहयोग और कौशल विकास जैसी योजनाओं को भी लगातार मजबूत किया जा रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here