Bihar Industrial Policy 2026: बिहार में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। उद्योग विभाग, बिहार सरकार और IIM बोधगया के बीच Bihar Industries Investment Promotion Policy (BIIPP) 2026 तैयार करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर और उसका आदान-प्रदान हुआ।
इस पहल का उद्देश्य बिहार के लिए ऐसी औद्योगिक निवेश नीति तैयार करना है, जो शोध, आर्थिक विश्लेषण और राज्य की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भविष्य की औद्योगिक रणनीति का आधार बन सके।
IIM बोधगया निभाएगा रिसर्च पार्टनर की भूमिका
समझौते के तहत IIM बोधगया Knowledge & Research Partner के तौर पर काम करेगा। संस्थान नीति अनुसंधान, दूसरे राज्यों और क्षेत्रों की नीतियों की तुलना यानी बेंचमार्किंग, हितधारकों से बातचीत, आर्थिक विश्लेषण और नीति के ड्राफ्ट तैयार करने में सहयोग देगा।
हालांकि नीति की अंतिम प्राथमिकताएं, वित्तीय प्रावधान, परामर्श का ढांचा और अंतिम निर्णय उद्योग विभाग के अधिकार क्षेत्र में रहेंगे। IIM बोधगया की ओर से दी जाने वाली सिफारिशें सलाहकारी प्रकृति की होंगी।
‘सभी क्षेत्रों के लिए मदर पॉलिसी’ बनाने की तैयारी
उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार ने कहा कि IIM बोधगया की शोध क्षमता और बहुविषयक विशेषज्ञता BIIPP 2026 तैयार करने में उपयोगी होगी। उन्होंने कहा कि नीति में बिहार की जमीनी परिस्थितियों और राज्य में मौजूद औद्योगिक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।
उन्होंने BIIPP 2026 को “सभी क्षेत्रों के लिए मदर पॉलिसी” बताते हुए कहा कि भविष्य में अलग-अलग सेक्टर के लिए तैयार होने वाली नीतियों और हस्तक्षेपों के लिए यह आधार तैयार कर सकती है।
निवेश और रोजगार के नए अवसरों पर जोर
IIM बोधगया की निदेशक डॉ. विनिता सिंह सहाय ने बिहार की जनसांख्यिकीय क्षमता, संभावनाओं और जैव-विविधता का उल्लेख करते हुए राज्य में उपलब्ध अवसरों को युवा प्रतिभाओं से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया।
MoU के जरिए तैयार होने वाली नीति का फोकस निवेश, उद्यमिता और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के साथ राज्य के औद्योगिक इकोसिस्टम को मजबूत करने पर रहेगा। विभाग के मुताबिक, यह साझेदारी शोध और साक्ष्य के आधार पर निवेशक-अनुकूल औद्योगिक नीति तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
MoU कार्यक्रम में उद्योग विभाग और IIM बोधगया के अधिकारियों के अलावा MSME, हैंडलूम एवं सेरिकल्चर तथा बिहार राज्य उद्यमी एवं व्यवसायी आयोग सहित विभिन्न संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

