Vibrant Village Program-II पर बिहार सरकार का बड़ा फोकस, सीमावर्ती गांवों के विकास को मिलेगी नई रफ्तार

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Bihar News: पटना में गुरुवार को योजना एवं विकास विभाग, बिहार सरकार की ओर से “Vibrant Village Program–II (VVP-II)” के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक अहम कार्यशाला आयोजित की गई। अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय के सम्मेलन कक्ष में हुई इस बैठक में राज्य और केंद्र स्तर के अधिकारियों ने भाग लिया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती गांवों के समग्र विकास को तेज करना, विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाना और मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत करना था।

ACS डॉ. एन. विजयलक्ष्मी का सख्त निर्देश – समय पर पूरे हों लक्ष्य

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने स्पष्ट कहा कि Vibrant Village Program–II सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजना के क्रियान्वयन में किसी तरह की ढिलाई न हो। खासतौर पर डेटा आधारित मॉनिटरिंग और फील्ड लेवल पर निगरानी को मजबूत करने पर जोर दिया गया, ताकि तय समयसीमा में लक्ष्य हासिल किए जा सकें।

सुरक्षा और विकास साथ-साथ जरूरी – गृह विभाग

विशेष सचिव के. एस. अनुपम ने कहा कि सीमावर्ती जिलों में विकास तभी संभव है जब सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन बनाया जाए। उन्होंने साफ किया कि अलग-अलग विभागों के बीच मजबूत कोऑर्डिनेशन इस योजना की सफलता की कुंजी होगी।

SSB और केंद्र सरकार ने भी रखी अहम भूमिका

सशस्त्र सीमा बल (SSB) के डीआईजी मुकेश कुमार ने कहा कि बॉर्डर एरिया में विकासात्मक गतिविधियां स्थानीय लोगों के विश्वास को मजबूत करती हैं और उनकी भागीदारी बढ़ाती हैं।

वहीं, गृह मंत्रालय के निदेशक मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि इस योजना के तहत सीमावर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाएं, रोजगार और कनेक्टिविटी को तेजी से बढ़ाया जा रहा है, जिसमें राज्यों की भूमिका बेहद अहम है।

डिजिटल मॉनिटरिंग और IT सॉल्यूशन पर जोर

राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के वरिष्ठ तकनीकी निदेशक दीपक कुमार ने बताया कि VVP-II में डिजिटल मॉनिटरिंग और डेटा मैनेजमेंट बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने आईटी आधारित सिस्टम के जरिए पारदर्शिता और तेजी से काम पूरा करने की रणनीति पर प्रकाश डाला।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े सीमावर्ती जिले

इस कार्यशाला में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया और सहरसा समेत कई सीमावर्ती जिलों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े।

जिला पदाधिकारी, जिला योजना पदाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी सहित कई स्तर के अधिकारियों ने इसमें भाग लेकर अपने सुझाव और अनुभव साझा किए।

तकनीकी सत्रों में हुई गहन चर्चा

कार्यशाला के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें योजना के क्रियान्वयन, मॉनिटरिंग और मूल्यांकन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने फील्ड लेवल की चुनौतियों और उनके समाधान पर खुलकर बात की, जिससे इस योजना को और प्रभावी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने की तैयारी दिखी।

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